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महाराणा प्रताप घास की रोटी खाकर स्वाभिमान के साथ जिये…. उन्होंने कभी स्वतंत्रता के साथ नहीं किया समझौता

भोपाल। तमाम तरह के मुगल आक्रमण के बाद भी महाराणा प्रताप घांस की रोटी खाकर स्वाभिमान के साथ जिये, पर उन्होंने कभी स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाजापुर जिले के शुजालपुर में महाराणा प्रताप की जन्म जयंती पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए यह बात कहीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन जितना पढ़ो उतना कम है। महाराणा प्रताप जीते-जी किवदंती बन गये। वे जब युद्ध में 76 किलो का कवच, 80 किलो का भाला और 2 तलवार लेकर जब उतरते थे, तो उनके सामने मुकाबला करने से हर दुश्मन कतराता था। महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक से भी उनकी मित्रता का उदाहरण दुनिया में आज भी अद्वितीय है। तमाम प्रकार के मुगलों के आक्रमण एवं आतंक के बाद भी महाराणा प्रताप घास की रोटी खाकर स्वाभिमान के साथ जिये, लेकिन उन्होंने स्वतंत्रता के साथ समझौता नहीं किया। ऐसे शूरवीर महापुरूष महाराणा प्रताप की जन्म जयंती आज हम मना रहे हैं, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आर्मी में नायक के पद पर तैनात मेवाड़ा समाज के शहीद के स्मारक बनाने सहित छात्रावास की भूमि, महाराणा प्रताप की प्रतिमा की स्थापना एवं चौराहे का नामकरण किया जायेगा। जो भी मांगे रखी गई हैं, उन्हें प्रक्रिया के अनुसार पूरा किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेवाड़ा समाज की पत्रिका प्रताप वार्ता का विमोचन भी किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज "जल गंगा संवर्धन" अभियान के तहत शाजापुर जिले  की विभिन्न ग्राम पंचायतो में किए गए उत्कृष्ट कार्य की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतो के कार्य की प्रशंसा भी की। उल्लेखनीय है कि 5 जून से 16 जून गंगा दशहरा तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से नदीनालों और ऐतिहासिक एवं पारम्परिक जल संरचनाओंतालाबझीलकुंआबावड़ी आदि के संरक्षणपुनर्जीवन के लिए कार्य किया जा रहा है तथा उनकी साफ-सफाई गहरीकरण का कार्य भी किया जा रहा है।

 

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