रायपुर

'जानकारी नहीं, तो काम नहीं' का बुलंद किया नारा... सामूहिक हड़ताल पर रहे हजारों अनियमित कर्मचारी... सीएम हाउस घेराव की चेतावनी

रायपुर। प्रदेश के हजारों अनियमित कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ते जा रहा है। कांग्रेस ने प्रदेश के अनियमित कर्मचारियों को सरकार बनने के 10 दिनों के भीतर नि​यमित करने का दिलाशा दिया था, लेकिन भूपेश सरकार के अंतिम बजट में भी इन अनियमित कर्मचारियों को निराशा ही हाथ आई है, जिसके बाद से प्रदेश के अनियमित और संविदा कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 

नियमितीकरण की मांग को लेकर प्रदेश के हजारों अनियमित कर्मी सोमवार को सामूहिक हड़ताल पर थे। कर्मचारियों ने आज के हड़ताल के लिए " जानकारी नहीं तो काम नहीं" का नारा बुलंद किया है। आज सभी जिलों के कर्मचारी हड़ताल में रहकर अपने अपने जिलो के जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा है।

टालने की नीति पर सरकार
हड़ताली कर्मियों का कहना है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार द्वारा जन घोषणा पत्र में उल्लेखित संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के संबंध में चार साल पश्चात भी किसी भी प्रकार की ठोस कार्यवाही आज तक नहीं हुई। विभिन्न मीडिया चैनलों को दिए इंटरव्यू में सरकार ने यह कहा कि, विभिन्न विभागों से कर्मचारियों की जानकारी अभी नहीं आई है आएगी तो नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे बयान यह साबित करते हैं कि प्रदेश की सरकार संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर अपना वादा पूरा करने में हीला-हवाला कर रही है तथा उसने ढुल-मुल रवैया अपनाया हुआ है। किसी सरकार के लिए कर्मचारियों की जानकारी एकत्रित करना अत्यंत सरल है परंतु जैसा रवैया अभी तक सरकार का दिखाई पड़ रहा है उससे उसकी नीयत पर संदेह उत्पन्न होता है ।

सरकार की नीयत पर संशय
इस स्थिति का विरोध करने हेतु है प्रदेश भर के 45 हज़ार संविदा कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले 20 मार्च को जानकारी नहीं तो काम नहीं के नारे के साथ एक दिन का प्रदेश स्तरीय काम बंद करने का ऐलान किया था। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कौशलेश तिवारी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत सिन्हा और अशोक कुर्रे ने सरकार पर यह आरोप लगाया कि यह बात गले नहीं उतर रही है कि सरकार कोई जानकारी मांगे और विभाग उसमें टालमटोल करें। 4 साल तक जानकारी एकत्रित नहीं की जा सकी है तो इससे यही समझ आता है कि संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के मसले पर सरकार अपने वादे से मुकर रही है एवं बहाने बना रही है।

राजस्थान से लेनी चाहिए सीख
संघ के प्रदेश प्रवक्ता सूरज सिंह ठाकुर एवं सचिव श्रीकांत लास्कर के अनुसार संविदा कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है पूर्व में जो नियमितीकरण हेतु कमेटी गठित हुई थी उसने अपनी रिपोर्ट देने में देर की और अब सरकार नियमितीकरण के मसले को जानकारी ना मिलने की ओट में टालने का प्रयास कर रही है जिससे प्रदेश के समस्त संविदा कर्मचारी अत्यंत ही आक्रोशित है यह विडंबना ही है कि चुनाव में जन घोषणा पत्र में वादा करने के पश्चात भी इस पर आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई । कांग्रेस शासित ही राजस्थान में संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जा चुका है जिससे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की सरकार को भी सीख लेने की आवश्यकता है ।