दिव्य महाराष्ट्र मंडल

अशोक बाला साहेब कुसरे के नेत्रों से दो नेत्रहीन देख सकेंगे दुनिया

रायपुर। आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है, पंचतत्व में इसका मिलना तय है, इस नश्वर शरीर से किसी की ज़िंदगी में रोशनी भर जाए तो इससे बड़ी बात क्या होगी। गीता के इस ज्ञान को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तात्यापारा निवासी बाला साहेब कुसरे के परिवार ने चरितार्थ किया।

महाराष्ट्र मंडल के नेत्रदान महादान अभियान के प्रभारी विक्रम हिशीकर ने बताया कि कुसरे बाड़ा तात्यापारा निवासी अशोक बाला साहेब कुसरे के निधन के उपरांत उनके बेटा-बहू ने उनका नेत्रदान कराया। इस अभिनय और समाजसेवी पहल से अब अशोक बाला साहेब कुसरे के नेत्रों को दो नेत्रदीन इस दुनिया को देख सकेंगे।

अशोक बाला साहेब की पुत्रवधू, महाराष्ट्र मंडल की सदस्य और संत ज्ञानेश्वर स्कूल की शिक्षिका अस्मिता कुसरे ने बताया कि सोमवार को दोपहर 2 बजे परिवार में शोक की घटना होते ही पूरा परिवार शोक में था। तब एक परिचित ने सुझाव दिया कि पिता की आंखों से दो नेत्रहीन बच्चे दुनिया देख सकेंगे। इस पुनीत कार्य के माध्यम से पिता की आंखों आने वाले कई सालों तक दुनिया में रहेंगी। इस बात कर परिवार नेत्रदान के लिए तैयार हुआ। एमजीएम नेत्र संस्थान रायपुर में अशोक बाला साहेब कुसरे का नेत्रदान कराया गया।  विक्रम हिशीकर ने मंडल के सभी सदस्यों और जन सामान्य से अपील की हैं कि नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता जरूर करें।