छत्तीसगढ़ की महिला आर्किटेक्टरों ने जानी गुड़ ,राई व चूने से बने गारे की तकनीक
रायपुर। आज हम सभी घर बनाने के लिए ईंटों के जोड़ने सीमेंट का इस्तेमाल करते है, लेकिन पुराना समय में सीमेंट नहीं था, फिर पर हजारों साल पुराने महल आज भी जीवटता के साथ खड़े है। इन महलों में पत्थरों को जोड़ने के लिए गुड़, राई और चूने से बने गारे के इस्तेमाल किया जाता था। उक्त बातें द इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स छत्तीसगढ़ चैप्टर के दवारा महिला आर्किटेक्ट्स के सम्मान समारोह में जयपुर राजस्थान से आई आर्किटेक्ट और वास्तुविद कविता जैन ने कहीं।
द इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स छत्तीसगढ़ चैप्टर द्वारा महिला दिवस के अवसर पर शनिवार को वीआईपी रोड स्तिथ एक होटल में छत्तीसगढ़ की महिला आर्किटेक्ट्स का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जहां महिला आर्किटेक्ट्स का सम्मान किया गया। वहीं जयपुर राजस्थान से आई महिला वास्तुविद आर्किटेक्ट कविता जैन ने ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के बारे में सभी को जागरूक किया। ताकि आने वाली जनरेशन इन धरोहरों से बहुत कुछ प्रेरणा ले सकें।
कविता जैन ने अपने प्रेजेंटेशन में मध्यप्रदेश स्तिथ ओरछा के महलों व मंदिरों के रेनोवेशन व हेरिटेज कन्सेरवेशन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने भवनों के संरक्षण को विभिन्न तकनीकों के बारे में अवगत कराया। राजस्थान स्थित जलमहल के संरक्षण की विभिन्न तकनीकों के बारे में भी जानकारी प्रदान की। जाली-झरोखो को साइट पर पुराने तरीको से लोकल कारीगरों द्वारा बनाने की पद्धति से अवगत कराया। ईटों को जोड़ने के लिए सीमेंट की जगह गुड़ ,राई, व चूने को मिलाकर गारे से जोड़ने की तकनीक के बारे में बताया ।
समारोह में इस वर्ष आर्किटेक्ट मेघा चावड़ा को छत्तीसगढ़ वीमेन ऑफ़ द ईयर से पुरस्कृत किया गया। मेघा चावड़ा वर्तमान में नगर निवेश एवं संचनालय में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदस्थ है। उनके द्वारा आर्किटेक्चर फील्ड में किए गए योगदान के लिए इस वर्ष उन्हें यह अवार्ड प्रदान किया गया है।
समारोह में सभी महिला वास्तुविदों का सम्मान कविता जैन एवं चैप्टर के अध्यक्ष सौरभ राहटगांवकर के द्वारा किया गया। महिला वास्तुविदों में प्रमुख रूप से भारती उपाध्याय, स्वस्ति स्थापक, नीता मिश्रा, नीना सिंह, कुसुम जायसवाल, प्रवीणा टौंक, प्रशस्ति खरे, नम्रता नायक, वैशाली शर्मा, संध्या सिंग, अदिति प्रजापति और कृपा पुजारा उपस्थित थे।