वंदेमातरम गीत भारत माता के प्रति प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक हैः मनोज वर्मा
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर में प्राचार्य डॉ प्रीति मिश्रा के मार्गदर्शन में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति द्वारा वंदेमातरम गीत की 150 वर्षगांठ एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रायपुर नगर पालिका निगम के एमआईसी सदस्य के गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी की छायाचित्र में माल्यार्पण कर किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि वंदेमातरम गीत भारत माता के प्रति प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में यह गीत लिखा, जिसमें उन्होंने मातृभूमि को देवी माँ के रूप में चित्रित किया। मूल रूप से यह संस्कृत और बांग्ला भाषा का मिश्रण है, जिसके शुरुआती दो पद संस्कृत में हैं।
24 जनवरी,1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।इसी प्रकार तरह से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पश्चिमी शक्तियों के विरुद्ध आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व करने वाले बोस भारतीय क्रांतिकारी थे,जिनको ससम्मान 'नेताजी' भी कहते हैं।अदम्य साहस,त्याग और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक नेताजी के सम्मान में यह दिन पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है,जो उनके निर्भीक नेतृत्व,अनुशासन और स्वतंत्रता संग्राम में अतुलनीय योगदान को स्मरण करता है।
नेताजी ने देशवासियों में आत्मबल और स्वाभिमान का संचार किया। इस अवसर पर संगीत विभाग द्वारा वंदेमातरम गीत का सामूहिक रूप से गायन हुआ।वरिष्ठ प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र डॉ विनोद कुमार जोशी ने अतिथि स्वागत करते हुए कहा कि वंदेमातरम गीत देश के प्रति समर्पण के भाव को जागृत करतीं हैं तथा नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की जीवन यात्रा राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय जागरण में वंदेमातरम का योगदान विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित किया गया।
जिसमें क्रमशः नमिता फरिकार प्रथम,टुकेश्वरी नायक द्वितीय तथा कंचन साहू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ श्रद्धा मिश्रा ने किया। सफल आयोजन में समिति के संयोजक डॉ निधि गुप्ता तथा डॉ सीमा रानी प्रधान एवं सुश्री नयनी तांडी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ाधिकारी, ग्रंथपाल, कार्यालयीन अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्राएं, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस के स्वयंसेवक उपस्थित रही।