छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनावी हलचल तेज, नामांकन 26 फरवरी से
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो रिक्त सीटों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि उम्मीदवार 5 मार्च तक अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखते हुए एक सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि दोनों दल अंतिम निर्णय से पहले संभावित नामों का पैनल अपने केंद्रीय नेतृत्व को भेजेंगे।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार प्रदेश संगठन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी सामाजिक संतुलन, आदिवासी नेतृत्व और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय ले सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार प्रदेश नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा सकती है।
भाजपा परंपरागत रूप से राज्यसभा चुनाव में प्रदेश के स्थानीय नेतृत्व को तरजीह देती रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार भी ऐसा ही रुख देखने को मिल सकता है। किसान पृष्ठभूमि या क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़े किसी प्रभावशाली चेहरे को आगे लाने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही यह भी चर्चा है कि भाजपा अंतिम समय में कोई चौंकाने वाला नाम सामने रख सकती है। सूत्रों के अनुसार सरगुजा और बस्तर संभाग के सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रदेश स्तर पर संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी, जहां अंतिम मुहर लगेगी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। वर्तमान में भाजपा के 54, कांग्रेस के 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के एक विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव के तय फार्मूले के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर दोनों प्रमुख दल एक-एक सीट जीतने की स्थिति में नजर आ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा में फिलहाल पांच सदस्य हैं। इनमें से दो सदस्यों – फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी – का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। कांग्रेस के राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन का कार्यकाल 2028 तक है, जबकि भाजपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह 2030 तक सदस्य बने रहेंगे। संख्या के लिहाज से मुकाबला भले स्पष्ट दिख रहा हो, लेकिन उम्मीदवार चयन को लेकर दोनों दलों में रणनीतिक मंथन जारी है। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए आने वाले दिनों में तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।