“रंग संस्कार महोत्सव” का द्वितीय दिवस गरिमामयी आयोजन के साथ संपन्न
2026-05-16 09:05 PM
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रायपुर। संस्कार भारती छत्तीसगढ़ द्वारा प्रख्यात कलासाधक स्वर्गीय अशोक चंद्राकर की स्मृति में आयोजित त्रिदिवसीय “रंग संस्कार महोत्सव” के द्वितीय दिवस का आयोजन आज महाराष्ट्र मंडल, रायपुर में गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में कला, साहित्य और रंगमंच से जुड़े अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रवेश द्वार पर दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात अतिथियों ने “राष्ट्र रंग — संघ साधना के 100 वर्ष” विषय पर आधारित विशेष चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में राष्ट्रजीवन, सांस्कृतिक चेतना एवं संगठनात्मक यात्रा को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
मंच पर कार्यकारी अध्यक्ष माणिक विश्वकर्मा, प्रांतीय अध्यक्ष रिखी क्षत्रिय, रायपुर महानगर अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा स्वर्गीय अशोक चंद्राकर की पत्नी सविता चंद्राकर की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय अजय चंद्राकर रहे, जिन्होंने संस्कृति, शिक्षा सहित अनेक महत्वपूर्ण मंत्रालयों का सफल दायित्व संभाला है तथा वर्तमान में कुरूद विधायक के रूप में जनसेवा कर रहे हैं। वे स्वयं भी रंग साहित्य और नाट्यकला से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं।
मंच पर अतिथियों का तिलक-चंदन से स्वागत एवं परिचय कराया गया। स्वागत उद्बोधन रायपुर महानगर अध्यक्ष शशांक शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि माननीय अजय चंद्राकर ने भारतीय रंग परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों तथा रंगकर्मियों की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना और संवेदनशीलता को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर मंचीय अतिथियों द्वारा माननीय अजय चंद्राकर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में कार्यकारी अध्यक्ष श्री माणिक विश्वकर्मा ने आभार प्रदर्शन किया।
द्वितीय दिवस पर आयोजित नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को विविध भावभूमियों से जोड़ा। प्रथम प्रस्तुति “सूखी डाली” का निर्देशन अर्पिता बेडेकर द्वारा किया गया, जिसमें सामाजिक संवेदनाओं और मानवीय रिश्तों को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। वहीं द्वितीय प्रस्तुति संत फरिकार जी के निर्देशन में “संत रविदास” ने संत परंपरा, सामाजिक समरसता और मानवता के संदेश को अत्यंत प्रेरणादायी रूप में प्रस्तुत किया। दोनों नाटकों को दर्शकों की भरपूर सराहना मिली तथा कलाकारों के सशक्त अभिनय ने सभागार को देर तक तालियों की गूंज से भर दिया।
प्रस्तुतियों के पश्चात नाट्य निर्देशक द्वारा समस्त कलाकारों का परिचय कराया गया तथा सभी कलाकारों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। साथ ही नाट्य निर्देशकों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
संस्कार भारती छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के कला प्रेमियों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों एवं नागरिकों से महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने की अपील की है।