दिव्य महाराष्ट्र मंडल

मैं अनिकेत हूं: दिलचस्‍प नाटक से रोमांचित हुए दर्शक

- महाराष्‍ट्र मंडल में स्‍व. अशोक चंद्राकर स्‍मृति रंग संस्‍कार महोत्‍सव का आगाज

रायपुर। भारद्वाज वकील के डायलॉग ‘ये आरोपी बदमाश तो है ही, साथ ही साथ एक चतुर अभिनेता भी है। इसका ये दिखावे का मायूस चेहरा और दर्दभरी गाथा सुनाने की कला किसी के भी दिल को पिघलाने के लिए काफी है और कोई भी इसकी बातों पर विश्वास कर इस पर दया कर सकता है’ से शुरू हुआ नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ भारद्वाज वकील के ही संवाद ‘अनिकेत ने जो अब तक बर्ताव किया वो अनजाने में किया था, जान बूझकर नहीं किया। अतः मेरी अदालत से यह दरख्वास्त है कि आरोपी पर लगे सभी आरोपों को निरस्त किया जाए और इन्हें बाइज्जत बरी किया जाए’ तक के बेहद दिलचस्‍प व रोचक प्रवास में रंगप्रेमी दर्शक नाटक के हर उतार-चढ़ाव और अदालत की जिरह को भरपूर एंजॉय करते हैं।

मैं अनिकेत हूं के मंचन के साथ साथ महाराष्‍ट्र मंडल में संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह में स्‍व. अशोक चंद्राकर स्‍मृति रंग संस्‍कार महोत्‍सव का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन के पहले ही दिन 80 मिनट के सस्‍पेंस व थ्रीलर ड्रामा ‘मैं अनिकेत हूं’ में हर एक गवाह अनिकेत की मुसीबतों को बढ़ाते हुए ही लगा। वहीं इसका क्‍लाइमेक्‍स ‘कुछ ऐसा होगा’ कोई सोच भी नहीं पाता। अनिकेत की केंद्रीय भूमिका में नाटक के निर्देशक शशि वरवंडकर न केवल कमाल का अभिनय करते हुए दिखे, बल्कि पर्दा गिरने तक उन्‍होंने नाटक की गति को बरकरार रखा। तेज तर्रार भारद्वाज वकील यानी चेतन गोविंद दंडवते हर फ्रेम में अनिकेत से भिड़ने के साथ ही गवाहों से सवाल- जवाब करते हुए सहजता बनाए रखते हैं।

अनिकेत की पत्‍नी की भूमिका में डॉ. अनुराधा दुबे अपनी सधी हुई अभिनय शैली से प्रभावित करतीं हैं। डॉ. गजानन ब्रह्मानंद शिरोड़कर के दमकर किरदार में आचार्य रंजन मोड़क दर्शकों को याद रह जाते हैं। मुनीम गंगाधर जोशी के रूप में प्रकाश खांडेकर, जज दिलीप लांबे, डॉ. सुधा गुप्‍ता के रोल में डॉ. प्रीता लाल, घरेलू नौकर धर्मा रविंद्र ठेंगडी, आनंद चौधरी के रूप में विनोद राखुंडे अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे। सावित्री शशिकांत जाधव की भूमिका में भारती पलोसकर नाटक में महत्‍वपूर्ण मोड़ लाते हुए हास्‍य के कुछ पल भी जुटातीं हैं। डॉ. शुचिता देशमुख, पंकज सराफ, डॉ. अभया जोगलेकर, श्‍याम सुंदर खंगन अपनी भूमिकाओं में जमे हैं। अजय पोतदार का सेट अदालत का पूरा माहौल तैयार करने में सहायक है। प्रवीण क्षीरसागर की प्रकाश व पार्श्‍व संगीत व्‍यवस्‍था आवश्‍यकतानुसार है।

इससे पूर्व संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के प्रदेश संरक्षक योगेश अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष रिखी क्षत्रिय, अध्यक्ष रायपुर महानगर शशांक शर्मा, अशोक चंद्राकर की पत्नी सविता चंद्राकर ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगेश अग्रवाल ने कहा कि संस्कार भारती सभी में संस्कार भरने का काम कर रही है। कुछ लोग कला को विकृत रूप देने का काम करते है, लेकिन संस्कार भारती हमारी संस्कृति का लेकर कर काम कर रही है। आरएसएस के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी यहां लगाई गई है। शशांक शर्मा ने कहा कि यह आयोजन का तीसरा वर्ष है। बीते दिनों एक महीने का प्रशिक्षण हुआ जिसमें प्रशिक्षण पाकर कई कलाकारों यहां इस मंच पर अपनी प्रस्तुति देंगे। निसंदेह इस बार अच्छे नाटक देखने को मिलेगा।

 

 

लीना मोहन एंटी को मिला कला साधक सम्मान

रंग संस्कार महोत्सव में इस वर्ष लीना मोहन एंटी को कला साधक सम्मान से सम्मानित किया गया। लीना मोहन एंटी ने कहा कि रायपुर में उनके जीवन की शुरूआत महाराष्ट्र मंडल के साथ हुई। वहां अपने शुरूआती दिनों में यहां के कामकाजी महिला वसती गृह में रहा करती थी।  उस समय में सुरक्षा की दृष्टिकोण से यह सबसे सुरक्षित स्थान था। यहां तक आने का श्रेय में महाराष्ट्र मंडल को देना चाहती हूं। जिन्होंने उन दिनों में मेरा पूरा सहयोग किया।

 

 शनिवार को दो और रविवार को एक नाटकों का मंचन

रंग संस्कार महोत्सव के दौरान दूसरे दिन शनिवार, 16 मई को अर्पिता बेडेकर के दिग्दर्शन में सूखी डाली नाटक और संत फऱिकार के दिग्दर्शन में तैयार नाटक संत रविदास का मंचन किया जाएगा। रिखी क्षत्रीय ने आगे बताया कि रविवार 17 मई को नाटक राज रवि वरमा, एक अनकही लड़ाई का मंचन होगा। जिसके लेखक रोहित श्रीवास्त्व है। दिग्दर्शक डा आनंद कुमार पांडेय है।