संत ज्ञानेश्वर सभागृह में नाटक ‘रवि वर्मा: द अनटोल्ड बैटल’ का प्रभावशाली मंचन
2026-05-17 10:05 PM
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- भारतीय कला, समाज और विचारधारा के गहरे संघर्ष से रूबरू हुए दर्शक
- तीन दिवसीय रंग संस्कार महोत्सव का हुआ समापन
रायपुर। संस्कार भारती छत्तीसगढ़ द्वारा कलासाधक स्व. अशोक चंद्राकर की स्मृति में आयोजित तीन दिवसीय ‘रंग संस्कार महोत्सव’ के तीसरे और अंतिम दिन महाराष्ट्र मंडल, रायपुर में नाटक ‘रवि वर्मा: द अनटोल्ड बैटल’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। जिसमें भारतीय कला, समाज और विचारधारा के गहरे संघर्ष से दर्शक रूबरू हुए। राजा रवि वर्मा आधुनिक भारतीय कला के जनक और 19वीं सदी के सबसे महान चित्रकारों में से एक थे। रविवर्मा ने रामायण, महाभारत और हिंदू धर्मग्रंथों के दृश्यों को कैनवास पर उतारा, जैसे 'शकुंतला', 'द्रौपदी का चीरहरण' और 'जटायु वध'। आज हम कैलेंडर और तस्वीरों में जिन देवी-देवताओं को देखते हैं, वह राजा रवि वर्मा द्वारा गढ़ी है।
नाटक का निर्देशन प्रख्यात रंगकर्मी डॉ. आनंद कुमार पांडे द्वारा किया गया, जबकि इसका लेखन रोहित श्रीवास्तव और आनंद पांडे ने संयुक्त रूप से किया है। यह नाटक महान चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन के उस अनछुए संघर्ष को सामने लाता है, जिसमें उन्होंने कला की स्वतंत्रता और सामाजिक बंधनों के बीच एक नई राह बनाई। उनकी कला ने देवी-देवताओं को मानवीय रूप में प्रस्तुत कर उन्हें आम जन तक पहुँचाया, जिसके कारण उन्हें विरोध, विवाद और न्यायालय तक का सामना करना पड़ा ।
मंचन में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। राजा रवि वर्मा की भूमिका में रोहित श्रीवास्तव ने प्रभावशाली प्रस्तुति दी, वहीं आयिलियम तिरुनाल के रूप में अल्बर्ट श्रीवास्तव ने राजसी गरिमा को बखूबी प्रस्तुत किया। थावेंद्र रजक ने थियोडोर जेम्सन और वकील की दोहरी भूमिका निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया। आमोद श्रीवास्तव ने रामस्वामी नायकर और जज की भूमिकाओं में संतुलित अभिनय प्रस्तुत किया।
सुगंधा के रूप में दिव्या राई ने भावनात्मक दृश्यों में दर्शकों को प्रभावित किया, जबकि आचार्य चिंतामणि के रूप में मनमोहन कास्दे ने अपने प्रभावशाली संवादों से नाटक में गहराई जोड़ी। अनमोल पमनानी ने बड़ौदा महाराज और राजा वर्मा की भूमिका निभाई, वहीं सोमनाथ साहू ने राजा राज वर्मा और मोहन श्री के रूप में सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। देवांशु ने आर्मुखम पिल्लई और रंगनाथन के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।