छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी की तैयारी; किसानों के लिए टोकन
2026-10-16 09:30 AM
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रायपुर : छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों के लिए धान खरीदी को लेकर महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार धान उपार्जन की तैयारियों में जुटी हुई है। इस बार भी 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू किए जाने की संभावना है। धान खरीदी नीति को लेकर 27 अक्टूबर को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय हो सकता है। हालांकि, खरीदी शुरू होने की तारीख, अंतिम लक्ष्य और नई शर्तों की औपचारिक पुष्टि अभी बाकी है। प्रस्तावित व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों की सुविधा, डिजिटल पंजीयन, टोकन प्रणाली, बायोमेट्रिक सत्यापन और धान की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है। किसानों के लिए जरूरी होगा कि वे खरीदी शुरू होने से पहले अपने भूमि रिकॉर्ड, पंजीयन और बैंक खाते से संबंधित जानकारी की जांच कर लें।
15 नवंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी का प्रस्ताव
उपलब्ध विवरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक धान खरीदी की अवधि प्रस्तावित है। धान उपार्जन का लक्ष्य 160 लाख मीट्रिक टन रखे जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, अंतिम नीति जारी होने के बाद ही इस लक्ष्य की पुष्टि हो सकेगी। पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में भी राज्य सरकार ने 15 नवंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी की व्यवस्था की थी। उस वर्ष 160 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने की तैयारी
धान खरीदी व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दिए जाने पर जोर है। इसका उद्देश्य कम भूमि वाले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक सुविधा उपलब्ध कराना है। प्राप्त नीति विवरण में खरीदी केंद्रों की दैनिक क्षमता का 70 प्रतिशत हिस्सा लघु और सीमांत किसानों के लिए रखने का उल्लेख है। हालांकि, पिछले वर्ष की आधिकारिक टोकन व्यवस्था में 70 प्रतिशत क्षमता मोबाइल ऐप के लिए आरक्षित थी और उसके भीतर 80 प्रतिशत हिस्सा छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए निर्धारित किया गया था। इसलिए वर्ष 2026-27 के लिए अंतिम अनुपात नई अधिसूचना से स्पष्ट होगा।
प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदी का
प्रावधान धान खरीदी के लिए प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल की सीमा जारी रखे जाने का प्रस्ताव है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, किसानों से लिंकिंग सहित अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जा सकेगा। यदि राजस्व विभाग द्वारा निर्धारित औसत उपज इससे कम होगी, तो उसी के आधार पर खरीदी की मात्रा निर्धारित की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक उत्पादन के अनुरूप धान खरीदी सुनिश्चित करना और अनियमितताओं को रोकना है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा पिछले वर्ष भी लागू थी। नए खरीफ विपणन वर्ष के लिए इसका अंतिम स्वरूप राज्य शासन की अधिसूचना से स्पष्ट होगा।
सामान्य धान का समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल
केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिया है। धान की किस्म केंद्रीय न्यूनतम समर्थन मूल्य- सामान्य धान ₹2,441 प्रति क्विंटल, ग्रेड-ए धान ₹2,461 प्रति क्विंटल, ये दोनों दरें भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य हैं। छत्तीसगढ़ में किसानों को राज्य की कृषक उन्नति योजना सहित अन्य प्रावधानों के अंतर्गत मिलने वाली अतिरिक्त राशि और भुगतान की व्यवस्था को केंद्रीय एमएसपी से अलग समझना जरूरी है। वर्ष 2026-27 के लिए अंतिम राज्यस्तरीय भुगतान व्यवस्था की पुष्टि नई नीति से होगी।
टोकन के बिना धान बेचने में हो सकती है परेशानी
धान खरीदी में टोकन प्रणाली किसानों के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इससे किसानों को निर्धारित तिथि पर खरीदी केंद्र पहुंचकर धान बेचने की सुविधा मिलती है। प्राप्त प्रस्तावित नियमों के अनुसार, किसानों को धान बेचने की निर्धारित तारीख से कम से कम सात दिन पहले टोकन के लिए आवेदन करना होगा। इसमें लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम दो तथा बड़े किसानों को अधिकतम तीन टोकन दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, पिछले वर्ष सीमांत, लघु और बड़े किसानों के लिए टोकन की अलग-अलग सीमाएं निर्धारित की गई थीं। इसलिए किसानों को नई नीति जारी होने पर अंतिम टोकन संख्या और आवेदन की समयसीमा की जांच करनी चाहिए।
एग्रीस्टैक पंजीयन पर विशेष जोर
धान बेचने वाले किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन महत्वपूर्ण है। डिजिटल पंजीयन व्यवस्था का उद्देश्य भूमि, किसान पहचान और खरीदी रिकॉर्ड को आपस में जोड़ना है। प्रस्तावित नीति में एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य रखने का उल्लेख किया गया है। खरीदी के समय किसानों की ऋण पुस्तिका का उपयोग कर बेची गई धान की मात्रा दर्ज करने की व्यवस्था भी बताई गई है। अधिया और रेगहा पर खेती करने वाले किसानों को भूमि स्वामी की सहमति और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने से संबंधित नियमों का पालन करना पड़ सकता है। ऐसे किसानों के लिए अलग रिकॉर्ड बनाए रखने का प्रस्ताव है, ताकि खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद होगी खरीदी
धान खरीदी में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था जारी रखने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था के तहत किसान की पहचान का सत्यापन होने के बाद खरीदी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। किसान स्वयं अथवा नियमानुसार अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से धान बेच सकेंगे। प्रस्तावित प्रावधानों में माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्र-पुत्री, सगे भाई-बहन और अन्य निकट संबंधियों को नामांकित प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने की बात कही गई है। खरीदी के बाद किसानों को निर्धारित राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। भुगतान के प्रमाण के रूप में कंप्यूटर से तैयार पावती देने का प्रावधान भी बताया गया है।
17 प्रतिशत से अधिक नमी वाले धान पर रोक का प्रस्ताव
धान की गुणवत्ता को लेकर खरीदी केंद्रों पर निर्धारित मानकों का पालन किया जाएगा। प्रस्तावित नीति के अनुसार, 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाला धान स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए किसानों को धान खरीदी केंद्र पर ले जाने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि फसल पर्याप्त सूखी हो और निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरे। अधिक नमी होने की स्थिति में किसानों को धान सुखाकर दोबारा लाना पड़ सकता है।
सीमावर्ती जिलों के 76 खरीदी केंद्रों पर विशेष निगरानी
छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों से धान लाकर समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिशों को रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी की योजना है। प्राप्त विवरण के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों के 76 खरीदी केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके लिए राजस्व, खाद्य, मंडी, सहकारिता, वन और परिवहन विभाग के अधिकारियों को शामिल करते हुए जांच दल तैनात किए जा सकते हैं। इन दलों का उद्देश्य संदिग्ध परिवहन, अवैध भंडारण और खरीदी प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं पर नजर रखना होगा।
पुराने जूट बारदानों की दर 25 रुपये प्रस्तावित
धान खरीदी के लिए बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। मार्कफेड के माध्यम से नए और पुराने जूट बारदानों की व्यवस्था की जाएगी। प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार, पुराने जूट बारदानों की दर 25 रुपये प्रति नग और उपयोगिता शुल्क 10.22 रुपये प्रति नग निर्धारित करने की बात है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा मिलरों के पास उपलब्ध पुराने बारदानों का भी निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत उपयोग किया जा सकता है।
बीज उत्पादक किसानों के लिए मार्च से अलग खरीदी
प्रस्तावित नीति में बीज उत्पादक किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की जानकारी है। इसके अनुसार, अस्वीकृत या फेल धान बीज की खरीदी नियमित उपार्जन अवधि से अलग 1 मार्च से 31 मई 2027 तक की जा सकती है। इस खरीदी के लिए बीज निगम के प्रमाणपत्र और निर्धारित केंद्रों की व्यवस्था की बात कही गई है। कृषि विभाग द्वारा बीज उत्पादक किसानों के रकबे, उत्पादन तथा स्वीकृत एवं अस्वीकृत बीज की मात्रा से संबंधित जानकारी का डेटाबेस तैयार करने का भी प्रस्ताव है।
किसानों के लिए ये तैयारियां रहेंगी जरूरी
नई धान खरीदी नीति को देखते हुए किसानों को पंजीयन, भूमि रिकॉर्ड और बैंक खाते की जानकारी पहले से तैयार रखनी चाहिए। किसानों के लिए समय पर टोकन प्राप्त करना, धान की नमी और गुणवत्ता जांचना तथा अपनी पात्रता के अनुसार उपार्जन मात्रा की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा। राज्य सरकार की अंतिम नीति जारी होने के बाद ही तारीखों, टोकन सीमा और अन्य शर्तों को निश्चित माना जाना चाहिए।