रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। सियासत के मंझे खिलाड़ियों को अब बेसब्री से चुनाव का इंतजार है। राजनीतिक दलें भी आसन्न चुनाव को लेकर रणनीतियों में माथापच्ची करने में जुटी हुई हैं। सियासतदारों के बीच मौखिक तीर—कमान से जंग जारी है। सत्तासीन कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनाव की बाजी जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हाथ में आई सत्ता को किसी भी तरह से हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं।
विदित है कि एक दिन पहले ही कांग्रेस का 85 वां राष्ट्रीय अधिवेशन समाप्त हुआ है। यह पहली बार था, जब अधिवेशन की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिली थी। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने अधिवेशन के दौरान छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नई तारीख के साथ नई शिक्षा भी दी है। दिग्गज नेताओं ने अपने अनुभवों को अपनी नई पीढ़ी के सामने रखा है।
इस अधिवेशन के समापन के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तेवर एक बार फिर बदले नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने इन चार सालों में कई बार अपने संकल्प को दोहराया है कि 'लड़ेंगे और जीतेंगे'। पर अधिवेशन के समापन के साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने संकल्प को बदल दिया है। सीएम बघेल ने कहा कि अब मैं नए संकल्प के साथ आगे चलूंगा। उन्होंने इस बार 'लड़ो और जीतो' का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री भूपेश के इस संकल्प के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका अनुसरण शुरु कर दिया है। बहरहाल सीएम बघेल और कांग्रेस के इस नए संकल्प का परिणाम विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम से ही सामने आ पाएगा।