छत्तीसगढ़
बड़ी खबर : कोल घोटाला मामले में IAS रानू साहू और दीपेश टांक को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोल घोटाले के दो बड़े आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बता दें आज सोमवार को काफी लंबे समय से जेल में बंद आईएएस रानू साहू और दीपेश टांक को सुप्रीम कोर्ट ने कोल लेवी मामले में जमानत मंजूर कर दी है।
वहीं ईओडब्ल्यू और एसीबी ने तीन नई एफआईआर दर्ज की है। निलंबित आईएएस रानू साहू, समीर बिश्नोई और निलंबित राप्रसे अधिकारी सौम्या चौरसिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत यह मामले दर्ज हुए हैं। तीनों के खिलाफ अलग-अलग मामले में एफआईआर दर्ज हुई है।
छत्तीसगढ़ में बंधक बनाए गए असम से लाए वन भैंसे पर जनहित याचिका, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर शासन से मांगा जवाब
रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन भैंसों के संरक्षण योजनाओं की विफलता और जंगली भैंसों की आबादी में गिरावट को देखते हुए प्रदेश के वन विभाग ने असम से एक नर और एक मादा वन भैंसा साल 2020 में लेकर आए। इसके बाद चार मादा वन भैंसा अप्रैल 2023 में लाए गए हैं। इन्हें बारनवापारा अभ्यारण में रखा गया है। वन भैंसों को आजीवन कैद करके रखने और इनके ब्रीडिंग प्लान को केंद्रीय जू अथॉरिटी द्वारा नामंजूर करने को लेकर दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation) की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और रविंद्र अग्रवाल की युगल बेंच ने नोटिस जारी कर सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि असम से लाए गए वन भैंस के स्थानांतरण की एक शर्त यह थी। अप्रैल 2023 में लाए गए 4 मादा वन भैंसों को 45 दिनों के अंदर जंगल में छोड़ा जाएगा, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय हो गया है। मादा भैंसों को अभी भी बारनवापारा अभयारण्य में कैद में रखा गया है। 2020 में लाये गए एक नर और एक मादा को भी कैद कर रखा गया है। सिंघवी ने हाईकोर्ट को यह भी बताया कि असम से इन जंगली भैंसों को छत्तीसगढ़ के जंगली वन भैंसा से क्रॉस कराकर आबादी बढ़ाने के लिए लाया गया था।
छत्तीसगढ़ में केवल एक शुद्ध नस्ल का नर “छोटू” है, जिसकी आयु वर्तमान में 22-23 वर्ष है। जंगली भैंसों की औसत आयु 25 वर्ष है और इतनी अधिक आयु होने के कारण उसे प्रजनन के लिए अयोग्य माना जाता है। उम्र के चलते छोटू का वीर्य भी नहीं निकला जा सकता। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने छत्तीसगढ़ के क्रॉस ब्रीड (अशुद्ध नस्ल) के वन भैसों से असम से लाई गई मादा वन भैसों से प्रजनन कराने के अनुमति केंद्रीय जू अथॉरिटी से मांगी, जिसे यह कह कर नामंजूर कर दिया गया कि केंद्रीय जू अथॉरिटी के नियम अशुद्ध नस्ल से प्रजनन कराने की अनुमति नहीं देते।
केंद्रीय जू अथॉरिटी ने असम से वन भैसा लाने के बाद बारनवापारा में बनाये गए ब्रीडिंग सेंटर को सैद्धांतिक अनुमति दी थी, लेकिन अंतिम अनुमति नहीं दी है। याचिका में इस सैद्धांतिक अनुमति को भी चुनौती दी गई है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी अभ्यारण में ब्रीडिंग सेंटर नहीं खोला जा सकता। भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी कर रखी है कि किसी भी अभ्यारण, नेशनल पार्क में ब्रीडिंग सेंटर नहीं खोला जा सकता। केंद्रीय जू अथॉरिटी की सैद्धांतिक अनुमति को चुनौती दी गई है कि जब अभ्यारण में ब्रीडिंग सेंटर खोला ही नहीं जा सकता तो सैद्धांतिक अनुमति कैसे मिल गई।
वन विभाग की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि असम से लाये गए वन भैसों की तीसरी पीढ़ी को ही जंगल में छोड़ा जायेगा। याचिका में बताया गया है कि वन भैंसा शेड्यूल एक का वन्यप्राणी है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 11 के अनुसार किसी भी अनुसूची एक के वन्यप्राणी को तब तक बंधक बनाकर नहीं रखा जा सकता, जब तक कि वह छोड़े जाने के लिए योग्य ना हो। असम के सभी वन भैसे स्वस्थ हैं और इन्हें जंगल में छोड़ा जा सकता है। इन्हें बंधक बनाकर रखने के आदेश भी मुख्य वन संरक्षक ने जारी नहीं किये और गैर कानूनी रूप से इन्हें बंधक बना रखा है।
बस्ती में घुसा हाथियों का दल 2 घंटे तक घूमता रहा.... दहशत में रहे गांववाले
रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की बंगुरसिया बस्ती में शनिवार रात को हाथियों का एक झुंड घुस आया, जिससे वहां के निवासियों में खौफ का माहौल बन गया. हाथियों का झुड़ बस्ती में दो घंटे घूमता रहा। जिससे लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की सलाह दी है।
छत्तीसगढ़ में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष का लंबा इतिहास है। यहां के जंगलों में हाथियों की गतिविधियों और उनके व्यवहार पर नजर रखने के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। 2018 में शुरू हुई छत्तीसगढ़ हाथी परियोजना का उद्देश्य मानव-हाथी संघर्ष को कम करना और इसके स्थायी समाधान खोजना है। इस परियोजना के तहत हाथियों को रेडियो कॉलर लगाकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है और गांव वालों को हाथियों के बारे में जागरूक किया जाता है।
छत्तीसगढ़ के जंगलों में पानी की कमी और खाद्य संसाधनों की अनुपलब्धता के कारण हाथी गांवों की ओर रुख करते हैं. गर्मियों के मौसम में जल स्रोतों की कमी के कारण हाथी पानी की तलाश में गांवों के पास आ जाते हैं. इसके अलावा, जंगलों में मानव अतिक्रमण और कृषि विस्तार के कारण हाथियों के पारंपरिक मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे वे बस्तियों में घुसने को मजबूर हो जाते हैं।
वन विभाग ने हाथियों के हमलों को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं. जंगल के आसपास के क्षेत्रों में जल स्रोतों का निर्माण, फसलों के चारों ओर खाई खोदना, और सर्चलाइट्स का उपयोग जैसे उपाय शामिल हैं। इसके अलावा, गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को हाथियों से निपटने के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
स्थानीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा का महत्व... व्यावसायिक शिक्षा पर सीएम ने दिया जोर
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का शुभारंभ राजधानी रायपुर के बजाय राज्य के सुदूर सीमावर्ती जशपुर जिले के आदिवासी बहुल गांव बगिया से करके न सिर्फ वर्षो से चली आ रही परंपरा को बदला है बल्कि इसके माध्यम से उन्होंने राज्य के सुदूर कोने तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर बगिया और बंदरचुआ के स्कूल को मॉडल स्कूल बनाने तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक आवासीय विद्यालय बनाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने जशपुर सरकारी स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब्स में से एक में रोबोटिक्स मॉडल विकसित करने वाले छात्र से बातचीत की। उन्होंने इस सुदूरवर्ती जिले में किये गये व्यावसायिक शिक्षा कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी के लिए कौशल और व्यावसायिक शिक्षा जरूरी है। इस मौके पर वह स्वयं छात्रों के साथ मिट्टी के बर्तन बनाकर यह संदेश भी दिया कि बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति की परिकल्पना के अनुसार स्थानीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस क्षेत्र में बोली जाने वाली सदरी बोली भाषा में भी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने की बात कहीं। छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में अब तक 18 स्थानीय भाषाओं-बोलियों में स्कूली बच्चों पुस्तकें तैयार की गई है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को नई शिक्षा नीति के अनुरूप मेगा पीटीएम आयोजित करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने समर कैंप के दौरान छात्रों द्वारा किए गए कार्य को देखकर प्रसन्नता जताई और सरकारी स्कूलों में हर साल ग्रीष्मकालीन शिविर आयोजित किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए राज्य सरकार इस साल से दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित होंगी। उन्होंने कहा कि पीएमश्री के तहत राज्य में प्रथम चरण में 211 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने भी बच्चों को शिक्षा-दीक्षा में माता-पिता की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के लिए कई उपयोगी टिप्स दिए और कहा कि बच्चों को मोबाइल का उपयोग सिर्फ शिक्षा, ज्ञान और जीवनोपयोगी जानकारी हासिल करने के लिए करना चाहिए।
हाईकोर्ट ने 168 सहायक प्रोफेसरों को मिली राहत... अब मिलेगा इतना ग्रेड-पे-वेतन
रायपुर। 168 सहायक प्राध्यापकों के ग्रेड-पे-वेतन भुगतान के संबंध में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को एक माह के भीतर एक समिति गठित करने और तीन माह के भीतर इन सहायक प्राध्यापकों के वेतनमान का निर्धारण करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश उन 168 सहायक प्राध्यापकों की याचिका पर आया है, जिनकी नियुक्ति 2012 में हुई थी, लेकिन उन्हें अकादमिक ग्रेड-पे नहीं दिया जा रहा था। प्राध्यापकों ने इस संबंध में 17 अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को आदेशित किया कि याचिकाकर्ताओं के मामले में यदि समिति का गठन नहीं किया गया है तो एक माह के भीतर कमेटी बनाएं। यह कमेटी ग्रेड-पे के लिए व्यक्तिगत रूप से याचिकाकताओं की पात्रता मानदंड का पता लगाएगा।
याचिकाकर्ताओं का सेवाकाल और शैक्षणिक अहर्ता ग्रेड-पे के अनुदान के लिए पात्र पाए जाते हैं तो उन्हे तय तारीख से भुगतान किया जाएगा जिस तारीख से वे पात्रता रखते हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेशित किया कि कार्यवाही तीन माह के भीतर पूर्ण कर ग्रेड-पे का निर्धारण किया जाए।
तीस नग हीरा पत्थर के साथ तीन गिरफ्तार, खपाने की फिराक में तलाश रहे थे ग्राहक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला पुलिस ने तीस नग हीरा पत्थर के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीनों हीरा पत्थर खपाने के फिराक में ग्राहक की तलाश कर रहे थे। आरोपियों से जब्त किए गए हीरा पत्थर की कीमत 1 लाख 30 हजार रुपये के आसपास आंकी गई है।
गरियाबंद पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार गरियाबंद एसपी अमित तुकाराम कांबले के निर्देश पर जिले में अवैध तस्करी पर नकेल कसने जिला पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में छुरा थाना प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग हीरा पत्थर बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहे है। सूचना पर थाना प्रभारी ने एएसपी जितेंद्र चंद्राकर, एसडीओपी निशा सिन्हा से मार्गदर्शन लेकर मुखबिर के बताए लोकेशन में गए।
पुलिस ने मुखबिर के बताए लोकेशन ग्राम पटपरपाली से चरौदा मार्ग के बीच संदिग्ध आरोपियों को घर दबोचा। आरोपियों के पास से 30 नग छोटे-बड़े चमकीले बहुमूल्य खनिज पदार्थ हीरा मिला। जिसे पुलिस ने जब्त किया। आरोपियों ने अपना नाथ चंद्रशेखर ठाकुर ग्राम मोंगरा, आनंद मरकाम ग्राम घोटपानी और सदाराम ओटी ग्राम घोटपानी बताया। आरोपियों का खिलाफ माइनिंग एक्ट के तरह कार्रवाई कर सभी को जेल भेज दिया गया।
विद्यार्थियों की उपलब्धियां, कठिन परिश्रम, समर्पण, शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण: राज्यपाल
रायपुर। राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर के छठवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में विभिन्न शैक्षणिक सत्रों की परीक्षाओं में छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, पत्रोपाधि के लिए उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इस मौके पर राम प्रताप सिंह एवं सुरभा देश पांडे को विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि दी गई। समारोह में कुलाधिपति द्वारा पीएचडी छात्रों को उपाधि प्रदान की गई एवं इस उपाधि के आचार एवं गौरव की रक्षा करने का संदेश दिया गया। अतिथियों ने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों को उज्जवल भविष्य के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन ने समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि मुझे छठवें दीक्षांत समारोह में शामिल होते हुए बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी और उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों के परिवारजनों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके सहयोग, त्याग एवं मार्गदर्शन में आपने ये महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा मुझे प्रसन्नता है कि हमारे छत्तीसगढ़ राज्य का एकमात्र यह मुक्त विश्वविद्यालय अपने अकादमिक और शैक्षणिक गतिविधियों के साथ नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। दूरस्थ अंचलों में बसे ऐसे शिक्षार्थियों के लिए जो किसी कारणवश उच्च शिक्षा से वंचित रह गए हैं या नौकरी पेशा वर्ग के ऐसे विद्यार्थी जो अपने भावी सपनों को साकार करना चाहते हैं, उनके लिए यह विश्वविद्यालय शिक्षा के अवसर प्रदान करने का प्रमुख केंद्र बन गया है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा पूरे मनोयोग से विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। रामचरितमानस के पाठ्यक्रम संचालित कर यहां पर आध्यात्म से जुड़ी शिक्षा दी जा रही।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने दीक्षांत समारोह में अपना उद्बोधन देते हुए स्वर्ण पदक, उपाधि प्राप्तकर्ताओं एवं स्वर्ण पदक पाने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा व्यक्ति के लिए शिक्षा एवं संस्कार महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है।
सिरपुर हेरिटेज वॉकः उत्सुक आगंतुकों को आकर्षित करती है सिरपुर की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत
रायपुर। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ने भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय के छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय रायपुर के सहयोग से 6 जुलाई 2024 को सिरपुर में एक आकर्षक हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लगभग 50 लोगों ने महत्वपूर्ण भागीदारी की, जिसमें सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिरपुर के युवा पर्यटन क्लब के उत्साही सदस्य भी शामिल थे। इस पहल ने न केवल स्थानीय हितधारकों को शामिल किया, बल्कि सिरपुर की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने के लिए उत्सुक आगंतुकों की भी रुचि को आकर्षित किया।
सिरपुर साडा के सीईओ वाई. राजेंद्र राव ने स्कूली छात्रों पर हेरिटेज वॉक और शैक्षिक पर्यटन के गहन प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये अनुभव हमारे देश की विविध सांस्कृतिक टेपेस्ट्री और ऐतिहासिक विरासत के बारे में अमूल्य प्रत्यक्ष अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, जो पारंपरिक शिक्षण विधियों से परे है।
हेरिटेज वॉक का नेतृत्व हेरिटेजवाला के संस्थापक शिवम त्रिवेदी ने किया, जिन्होंने प्रतिभागियों को सिरपुर के गौरवशाली अतीत से परिचित कराया, इसके वास्तुशिल्प आकर्षणों और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। भारत पर्यटन, रायपुर के प्रबंधक मयंक दुबे ने उपस्थित लोगों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की, उन्हें आस-पास के पर्यटक आकर्षणों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर डाला। दुबे ने ट्रैवल फॉर लाइफ़ शपथ भी दिलाई, जिसमें प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिरता को बनाए रखने वाली जिम्मेदार यात्रा प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिरपुर के प्राचार्य ज्योतिष चौधरी ने युवा पर्यटन क्लब के सदस्यों के लिए हेरिटेज वॉक के आयोजन में सिरपुर साडा और पर्यटन मंत्रालय द्वारा की गई पहल की सराहना की। उन्होंने छात्रों को समृद्ध अनुभव प्रदान करने के प्रयास की सराहना की, जिससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के बारे में उनकी समझ गहरी होगी।
प्रतिभागियों, विशेष रूप से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिरपुर के छात्रों में उत्साह स्पष्ट था क्योंकि उन्होंने इस तरह के और अधिक ज्ञानवर्धक अनुभवों की तीव्र इच्छा व्यक्त की। आगंतुकों ने भी समान रूप से आकर्षित होकर भविष्य की विरासत यात्राओं में गहरी रुचि दिखाई, जो छत्तीसगढ़ के कम-ज्ञात ऐतिहासिक खजानों पर प्रकाश डालती हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए बढ़ती जागरूकता और प्रशंसा का संकेत है।
यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रशंसा के प्रतीक के रूप में भारत पर्यटन चिन्हित नोटबुक्स एवं कैप्स और पौष्टिक जलपान प्रदान करके समाप्त हुआ। यह एक शानदार सफलता थी, जिसने उपस्थित सभी लोगों के बीच सिरपुर की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी प्रशंसा और समझ को बढ़ावा दिया। सिरपुर साडा और पर्यटन मंत्रालय विरासत जागरूकता, सांस्कृतिक प्रशंसा और जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देने वाले ऐसे ही कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राजधानी को 11 सहित प्रदेश को मिले 41 सिविल जज... हाईकोर्ट ने जारी किया पोस्टिंग आदेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 41 नए सिविल जजों की पदस्थापना का आदेश जारी कर दिया है। इनका हाल ही में सीजी पीएससी के जरिये चयन हुआ था। सभी को 12 जुलाई तक अपना पदभार संभालना होगा।
नए सिविल जजों की दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि रहेगी। बिलासपुर में 4 व रायपुर में 11 सिविल जज नियुक्त किए गए हैं। अन्य जिलों में शेष की नियुक्ति की गई है। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर सूची जारी की गई है।



‘एक पेड़ मां के नाम’... माँ के सम्मान में मुख्यमंत्री साय ने रोपा रुद्राक्ष का पौधा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत अपनी जन्मभूमि बगिया में अपनी माताजी के सम्मान में पौधरोपण किया। उन्होंने शासकीय हाईस्कूल बगिया परिसर में रुद्राक्ष का पौधा रोपा। उन्होंने कहा कि इस अभियान अंतर्गत लगे पौधे जननी और जन्मभूमि के रिश्ते को एक नई पहचान देंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में शामिल होने यहां पहुंचे थे। इस अवसर पर उनकी पत्नी कौशल्या देवी साय ने भी रुद्राक्ष का पौधा लगाया। वहीं प्रदेश के वित्त मंत्री और जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने आंवले का पौधा लगाया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मां के साथ रिश्ता अनमोल होता है। जिस प्रकार मां हमे जीवन देती है, हमारा पालन पोषण करती है, वैसे ही प्रकृति भी हमारे लिए जीवनदायिनी है। इसकी सुरक्षा और संवर्धन हमारी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस मुहिम से हम सभी को जुड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान जरूर देना चाहिए। इस दौरान उन्होंने सभी से "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पेड़ लगाने आग्रह किया। साथ ही सभी से पौधों का संरक्षण हेतु संकल्प लेने कहा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस मानसून में ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करें। अपने घर, आसपास के परिवेश, गांव और शहरों और जंगलों को खूब हरा-भरा बनाएं। इस अवसर पर रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद राधेश्याम राठिया, विधायक जशपुर रायमुनी भगत, विधायक पत्थलगांव गोमती साय, विधायक आरंग गुरु खुशवंत साहेब सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कवर्धा में डायरिया का प्रकोप... एक ही गांव में 32 लोग बीमार... गांव में लगा स्वास्थ्य कैंप
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के गोपालभावना गांव में ग्रामीण डायरिया का शिकार हो गए। गांव में दूषित पानी पीने के चलते तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ रही है। गांव के कुल 32 लोग डायरिया से संक्रमित हैं। लगातार आ रहे डायरिया की शिकायत को देखते हुए पीएचपी विभाग ने पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है।
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के इलाज के लिए गोपालभावना गांव में ही स्वास्थ्य कैंप लगाया है। मरीजों को कैंप में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है, कुछ मरीजों को पिपरिया CHC में भर्ती कराया गया है। वहीं एक मरीज को जिला अस्पताल रिफर किया गया है।
बता दें PHE विभाग की लापरवाही के चलते गांव में पीने के लिए साफ पानी की समस्या है। ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। 2 महीने के अंतराल में अलग-अलग गांव में डायरिया (उल्टी दस्त) फैलने की यह चौथी घटना है।
जहरीली गैस से पांच की मौत.... कुएं में उतरे युवक को बचाने बारी-बारी उतरे थे 4 लोग
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा थाना अंतर्गत ग्राम किकिरदा में जहरीली गैस की वजह से पांच लोगों की जान चली गई। घटना से हड़कंप मच गया है और पूरे गांव में मातम का माहौल है।
बता दें कि सुबह किकिरदा निवासी रामचरण जायसवाल ने कुएं में गिरी लकड़ी को निकालने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि लंबे समय से कुएं का उपयोग नहीं हो रहा था और उसे ढंक दिया गया था। जब रामचरण लकड़ी निकालने के लिए कुएं में उतरे तो जहरीली गैस के चलते उनका दम घुट गया और उनकी मौत हो गई।
रामचरण को बचाने के प्रयास में पड़ोसी रमेश पटेल भी कुएं में उतरे, लेकिन वह भी जहरीली गैस का शिकार हो गया। जब रमेश पटेल का दम घुटने लगा तो उनके बेटे राजेंद्र और जितेंद्र पटेल उन्हें बचाने के लिए कुएं में उतरे। दुर्भाग्यवश, दोनों बेटों का भी दम घुट गया और वे भी डूब गए।
इसके बाद एक अन्य पड़ोसी टिकेश चंद्रा ने अपने दोस्तों को बचाने का प्रयास किया और कुएं में उतरे, लेकिन वे भी जहरीली गैस से प्रभावित हुए और उनकी भी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में हाहाकार मच गया। ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई और पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने तुरंत एसडीआरएफ की टीम को बुलाया ताकि शवों को बाहर निकाला जा सके. इस हादसे में तीन परिवारों के पांच लोगों की मृत्यु हुई है, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
केंद्रीय विद्यालय के बच्चों और CISF के जवानों से रोपे पौधे... लिया सुरक्षा का संकल्प
रायपुर। केंद्रीय विद्यालय और सीआईएसएफ भिलाई के जवानों ने तीसरी वाहिनी भिलाई गुरुवार, 4 जुलाई को वृहद स्तर पर पौधारोपण कर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय विद्यालय, सीआईएसएफ, युवा पर्यटन क्लब, स्काउड-गाइड और इको क्लब ने मिलकर किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तीसरी वाहिनी सीआईएसएफ भिलाई के वरिष्ठ कमांडेट सनी कुमार भट्ट थे। पौधरोपण के दौरान केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य भुबनेश्वरी भी मौजूद थीं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तृतीय आरक्षित वाहिनी सीआईएसफ भिलाई का लक्ष्य 4000 पौधों का रोपण करना हैl उन्होंने पौधारोपण के विषय पर कहा कि पेड़ों की तेजी से हो रही कटाई को रोकने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाना होगा। लेकिन ऐसा लगता है कि हममें से लोग वास्तव में यह नहीं समझते कि यह कितना महत्त्वपूर्ण है। वनों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और लोगों का सावधान न रहना पर्यावरण के लिए बहुत बड़ी समस्या पैदा कर रहा है। यह एक बड़े बदलाव का समय है।
प्राचार्य ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम इसके बारे में कुछ करें। हमें पृथ्वी की देखभाल करने की ज़रूरत है, जैसे वह हमारी देखभाल करती रही है। ऐसा करने का एक तरीका यह है कि हम अपने ग्रह को फिर से हरा-भरा और सुंदर बनाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। पेड़ पृथ्वी पर जीवन की रीढ़ की हड्डी की तरह हैंl ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ पेड़ सुपरहीरो की तरह हैं क्योंकि वे हवा से कार्बन लेते हैं।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के हिंदी शिक्षक अनिल कुमार शर्मा ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के क्रीड़ा शिक्षक डॉ पंकज शुक्ला, सोमा सील गुहा , सुनीता गावंडे , रीना साहू, डीए गिरिया, पूनम टोप्पो, माधुरी व विद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी गण उपस्थित थे।
सिलेंडरों से भरा ट्रक पलटा, सड़क पर बिखरे गैस सिलेंडर, बड़ा हादसा टला
रायपुर। न्यायधानी में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सिलेंडरों से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन पलटते ही सड़क पर भरे सिलेंडर बिखर गए। हादसे में ट्रक ड्राइवर को मामूली चोट आई है। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्थित करने में जुट गई।
बताया जा रहा है कि रायपुर से बिलासपुर गैस गोदाम जा रहा सिलेंडर से भरा ट्रक सिविल लाइन थाना क्षेत्र के जेपी वर्मा कॉलेज के सामने पलट गया। यह घटना सुबह करीब 5 बजे की है। जैसे ही ट्रक कॉलेज के पास पहुंचा, अचानक डिवाइडर से टकराकर पलट गया और भरे हुए सिलेंडर बाहर फेंका गए। लेकिन अच्छी बात यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और क्रेन की मदद से गाड़ी को हटाया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ में महिलाओं की सुरक्षा के लिए खुलेंगे महिला पिंक थाने: डिप्टी सीएम शर्मा
मिशन मोड में कार्य कर छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाना है : महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
अधिकारियों को आंगनबाड़ी की सतत निरीक्षण करने के दिए निर्देश
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली समीक्षा बैठक
रायपुर | महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज मंत्रालय महानदी भवन में महिला बाल विकास विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। राजवाड़े ने अधिकारियों को प्रत्येक आंगनबाड़ी की सतत औचक निरीक्षण करने के निर्देशित की। उन्होंने हितग्राहियों को दिए जा रहे पोषण-आहार एवं अन्य सुविधाओं की नियमित जांच कर उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए विभागीय कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दी। बैठक में विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, संचालक तूलिका प्रजापति सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने एकीकृत बाल विकास सेवाओं को धरातल में कारगर ढ़ंग से सुलभ कराने के निर्देश देते हुए कहा कि शासन की अन्य कल्याणकारी योजनाओं से भी क्षेत्र की महिलाओं को योजनाबद्ध तरीके से लाभ पहुंचाया जाना सुनिश्चित करें। इस दिशा में सेवाओं को परिणामदायी बनाने हेतु जनजागरूकता लाने सहित सेवाओं की गुणवत्ता एवं सेवाओं के विस्तार के लिए प्रभावी पहल किया जाए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिला बाल विकास विभाग की महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना, रेडी-टू-ईट, नोनी सुरक्षा योजना, शुचिता योजना, बाल सन्दर्भ योजना का लाभ सभी हितग्राहियों को मिले। उन्होंने महतारी वंदन योजना की सभी पात्र हितग्राहियों के बैंक खाते को आधार कार्ड के लिंक्ड कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती, शिशुवती माताओं, बच्चों और किशोरी बालिकाओं का नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और वजन लेने कहा। वहीं स्कूल पूर्व प्रारंभिक शिक्षा, पूरक पोषण आहार तथा पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा को परिणाममूलक बनाने के लिए संवेदनशीलता के साथ दायित्व निर्वहन किये जाने के निर्देश दिए। श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में सही लाभार्थी को लाभ मिले इस बात की पारदर्शिता रखें। आवेदन प्राप्त कर अधिकारी उसका सत्यापन करें ताकि वास्तविक व्यक्ति को लाभ मिले।
पोषण पुनर्वास केन्द्रों में कुपोषित बच्चों को भर्ती करने रोस्टर तैयार करने के निर्देश
मंत्री महिला एवं बाल विकास ने पोषण पुनर्वास केन्द्रों पर कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए नियमित रूप से शत-प्रतिशत बिस्तरों के अनुरूप भर्ती करने कहा। इस हेतु प्रत्येक 15 दिवस में भर्ती करने के लिए कुपोषित बच्चों का रोस्टर तैयार कर लाभान्वित किये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजनांतर्गत निर्धन जरूरतमन्द महिलाओं को लाभान्वित कर योजना के उद्देश्य की सार्थकता साबित करने कहा। वहीं मिशन वात्सल्य के अंतर्गत बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत बच्चों को नियमित स्कूल या ओपन स्कूल के माध्यम से शिक्षा प्रदान करने एवं उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण देने के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत किये जाने के निर्देश दिए। बैठक में बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर भर्ती, आंगनबाड़ी केन्द्र भवन निर्माण की स्वीकृति, संचालित एवं प्रगतिरत भवनों की समीक्षा भी की।
छत्तीसगढ़ के इस स्कूल में पहुंचा मगरमच्छ का बच्चा, छात्रों में मची हड़कंप
रायपुर। न्यायधानी बिलासपुर जिले के रतनपुर के कर्रा में सोमवार की सुबह मगरमच्छ का बच्चा अचानक स्कूल परिसर में पहुंच गया। जिसे देखकर ग्रामीण दहशत में आ गए। आनन -फानन में 112 नंबर पर काल कर सूचना दी गई। पुलिस से वन विभाग को जानकारी गई। इसके बाद वन अमला मौके पर पहुंचा और मगरमच्छ को रेस्क्यू कर वापस खूंटाघाट जलाशय में छोड़ा गया।
15 दिनों में मगरमच्छ गांव में आने की यह दूसरी घटना है। यही कारण है कि ग्रामीण दहशत में हैं। खासकर अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। कर्रा रतनपुर खूंटाघाट के नजदीक है। पिछले साल में ऐसा हो चुका है। विडंबना की बात है कि लगातार इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
इसके बाद भी वन विभाग के पास कोई ठोस प्लान नहीं है। हर बार सूचना मिलने के बाद मगरमच्छ को पकड़कर डेम में छोड़ दिया जाता है। सोमवार को भी यही हुआ। वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ के बच्चे को पकड़कर खूंटाघाट डेम में छोड़ दिया और चले गए। अब ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि वन विभाग इसे लेकर ठोस उपाय करें। अभी तो केवल गांव में नजर आ रहे हैं।
यदि मगरमच्छ घर में घुसते हैं तो उस स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जितना खतरा ग्रामीणों को हैं, उतना ही मगरमच्छ को भी है। बचाव के लिए कभी भी ग्रामीणों की भीड़ मगरमच्छ को नुकसान पहुंचा सकती है। कम से कम सुरक्षा के लिहाज से उपाय किया जाए। मगरमच्छ को रेस्क्यू करने वाली टीम में वन विभाग के माल्स जोशी, उदय श्रीवास्तव , मानस दुबे लखेराम धुर्वे एवं धीरज दुबे शामिल रहे।