छत्तीसगढ़
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में एडमिशन प्रक्रिया 2024: जानें कैसे लें प्रवेश!
रायपुर। अगर आप दुर्ग जिला स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। विश्वविद्यालय ने 2024 के शैक्षणिक सत्र के लिए एडमिशन प्रक्रिया की घोषणा कर दी है, जो छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है। चाहे आप स्नातक या स्नातकोत्तर कोर्स के लिए आवेदन कर रहे हों, इस प्रक्रिया में शामिल कुछ महत्वपूर्ण बातें आपको जाननी चाहिए।
विवि में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होती है। छात्रों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा। सबसे पहले, आपको वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद, व्यक्तिगत जानकारी और शैक्षणिक योग्यता के विवरण सही ढंग से भरने होंगे।
एडमिशन के लिए आवेदन करते समय, आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की जरूरत होगी:
· 10वीं और 12वीं की अंकसूची
· स्नातक कोर्स के लिए आवश्यक योग्यता प्रमाणपत्र
· पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि)
· पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर
विभिन्न कोर्सों के लिए योग्यता मापदंड अलग-अलग होते हैं। स्नातक कोर्स के लिए उम्मीदवार का 12वीं कक्षा में न्यूनतम 50% अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। स्नातकोत्तर कोर्स के लिए उम्मीदवार का स्नातक डिग्री होना आवश्यक है, जिसमें न्यूनतम 55% अंक होने चाहिए।
इसके अलावा, कुछ विशेष कोर्सों के लिए प्रवेश परीक्षा भी आयोजित की जाती है। ऐसे कोर्सों के लिए, आपको पहले विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित प्रवेश परीक्षा में शामिल होना होगा और अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण होना होगा। इस बात का ध्यान रखें कि अंतिम तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए, सभी उम्मीदवारों को समय पर आवेदन प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में कोर्स की फीस उचित और सुलभ होती है। विभिन्न कोर्सों की फीस संरचना आप विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर देख सकते हैं। इसके अलावा, विश्वविद्यालय विशेष रूप से मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं भी प्रदान करता है।
छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को समय पर दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे और विश्वविद्यालय की तरफ से तय किए गए मानदंडों को पूरा करना होगा। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जाता है। यहां का शिक्षण स्टाफ अनुभवी है और यहां छात्रों को विभिन्न सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने का भी अवसर मिलता है।
इस विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद, छात्रों को न सिर्फ अच्छी नौकरियों के अवसर मिलते हैं बल्कि वे अपने करियर में नई ऊंचाइयां भी हासिल कर सकते हैं। अगर आप उच्च शिक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो हेमचंद यादव विश्वविद्यालय आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यहां एडमिशन लेकर आप अपने भविष्य को एक बेहतर दिशा दे सकते हैं। जल्द ही आवेदन करें और सुनिश्चित करें कि आप सभी महत्वपूर्ण तिथियों और दस्तावेज़ों की जानकारी के साथ तैयार हैं।
पिछले सप्ताह में, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने एक नया प्रोग्राम लॉन्च किया है – बच्चों के लिए विशेष पाठ्यक्रम। यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए है जो कोरोना महामारी के कारण अध्ययन छोड़ने के बाद वापस एडमिशन लेने की कोशिश कर रहे हैं।
इस नए पाठ्यक्रम में, उन्हें महत्वपूर्ण ज्ञान और कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा जो उन्हें उनकी शिक्षा को पुनः आरंभ करने में मदद करेगा। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने इस पाठ्यक्रम को निशुल्क में प्रदान करने का भी फैसला किया है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से, एक्सपर्ट शिक्षकों द्वारा उन्हें न्यूनतम समय में इन अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा जिनमें वे परीक्षा, टेक्निकल इंटरव्यू, और भविष्य के लक्ष्य के लिए तैयार हो सकते हैं।
इस पाठ्यक्रम में सीमित सीटें हैं, इसलिए इच्छुक छात्रों को जल्दी ही आवेदन करना चाहिए। आवेदन करने के लिए, वे हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस नए पाठ्यक्रम के माध्यम से, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय छात्रों को एक नया और अद्वितीय अवसर प्रदान कर रहा है जिसमें वे अपने शैक्षिक सफर की एक नई शुरुआत कर सकते हैं।
कचरा प्रबंधन कर गांव को स्वच्छ बना रही स्वसहायता समूह की महिलाएं
बिल्हा विकासखंड के ग्राम डोड़की में स्वसहायता समूह
ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के साथ जैविक खाद भी बना रहा समूह
कचरा प्रबंधन कर गांव को स्वच्छ बना रही स्वसहायता समूह की महिलाएं
रायपुर | बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के ग्राम डोड़की में स्वसहायता समूह की महिलाएं कचरा प्रबंधन कर अपने आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने का कार्य कर रही हैं। कचरा प्रबंधन से जैविक खाद बनाने में समूह की दीदियां अहम भूमिका निभा रही हैं। शासन द्वारा दिए जा रहे सहयोग से समूह की महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुधार आया है और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों में बखूबी अपना योगदान दे रही हैं।
ग्राम पंचायत केवांछी के आश्रित ग्राम डोड़की के जय मां अम्बे समूह की महिलाओं ने बताया कि गांव में मनरेगा के तहत एसएलडब्लयूएम शेड, नाफेड एवं वर्मी टैंक का निर्माण किया गया है। इन कार्यों के लिए मनरेगा से दस लाख 29 हजार रुपए स्वीकृत हुए थे। शेड के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट के रूप में निकलने वाले कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है। समूह की महिलाएं अपने तिपहिया वाहन में घर-घर घूमकर कचरा एकत्र कर शेड में लाकर इन कचरों से खाद बना रही हैं।
डोड़की के रहवासियों ने बताया कि ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन शेड के निर्माण से गांव में अस्वच्छता संबंधी समस्याओं का निदान हुआ है। गांव में अब स्वच्छता का माहौल बना रहता है। महिलाओं द्वारा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य रोज किया जा रहा है। गांव में हर परिवार को नीले एवं हरे रंग का डस्ट-बिन दिया गया है। कचरा संग्रहण के लिए तिपहिया वाहन खरीदे गए हैं। जय मां अम्बे समूह ने गांव को रोगमुक्त रखने का भी बीड़ा उठाया है। समूह की महिलाएं जन-चौपाल लगाकर गांववालों को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक जानकारियां भी दे रही हैं। कचरा प्रबंधन, अपशिष्ट से तैयार जैविक खाद और ठोस कचरे के रूप में प्राप्त प्लास्टिक की बिक्री से समूह को सालाना 30 हजार से 40 हजार रुपए तक की आमदनी अनुमानित है।
समूह की महिलाओं ने बताया कि वे इस कार्य से बहुत खुश हैं। इससे हो रही आय से उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। गांव में पहले इधर-उधर कचरा फैले होने से गंदगी का वातावरण रहता था और बीमारियों का खतरा बना रहता था। ठोस एवं तरल कचरा खुले में जगह-जगह पड़ा रहता था। लेकिन अब समूह द्वारा कचरे का सही प्रबंधन किया जा रहा है। गांव में पेयजल की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। सरकार की मदद से स्वसहायता समूहों को रोजगार एवं आजीविका का जरिया मिला है। इससे उनकी माली हालत में सुधार आ रहा है।
स्व रोजगार से जोड़ने स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिया जाएगा ड्रोन प्रशिक्षण
रायपुर | नमो ड्रोन दीदी योजना अंतर्गत बलौदाबाजार जिले के स्व सहायता समूह की अधिक से अधिक महिलाओं को ड्रोन उडाने क़ा प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। कलेक्टर दीपक सोनी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को इस सबंध में जरुरी निर्देश दिए हैं। ड्रोन दीदी निरुपा साहू एवं ड्रोन पायलट निखिल कन्नौजे ने कलेक्टर सोनी से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा किये। कलेक्टर ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें प्रेरणा स्रोत बताया।उन्होंने उर्वरक व कीटनाशक छिड़काव में ड्रोन के उपयोग को किसानों के लिए फायदेमंद कहा और ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की बात कही।
विकासखंड बलौदाबाजार अंतर्गत ग्राम लाहौद निवासी ड्रोन दीदी निरुपा साहू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने ड्रोन से दवाई छिड़काव क़ा कार्य अप्रैल 2024 से शुरू किया है। इसके पूर्व उन्होंने ग्वालियर स्थित प्रशिक्षण संस्थान से ड्रोन उडाने का 15 दिन का प्रशिक्षण लिया। उन्होने बताया कि बिहान अंतर्गत वैभव लक्ष्मी स्व सहायता समूह से जुडी हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियो से मिली। ड्रोन दीदी ने बताया कि ड्रोन से यूरिया या कीटनाशक छिड़काव के लिए प्रति एकड 300 रुपये शुल्क लेती हैं और उन्हें अब तक करीब 25 हजार रूपये की आय हो चुकी है। ग्राम लटुआ निवासी ड्रोन पायलट निखिल कन्नौजे ने बताया कि वह इफ्को कंपनी से जुडा है और कंपनी के माध्यम से ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लिया है। उन्होंने बताया कि ड्रोन को 2 से 3 किलोमीटर की दूरी तक उड़ाया जा सकता है। विगत अप्रैल माह से करीब 88 एकड़ खेतों में दवाई का छिड़काव ड्रोन से कर चुके हैं।
ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार द्वारा नमो ड्रोन दीदी योजना की शुरुआत की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि आने वाले चार वर्षों में 15 हजार स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराया जाए। यह ड्रोन, महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इन ड्रोन्स का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में उर्वरकों का छिड़काव करने के लिए किया जाएगा।
हमारे समृद्ध अतीत और कला-संगीत की अद्भुत परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है चक्रधर समारोह : राज्यपाल रमेन डेका
चक्रधर समारोह समापन कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए
एक पेड़ माँ के नाम अभियान में पौधा लगाने की अपील
रायपुर | रायगढ़ में आयोजित चक्रधर समारोह के समापन कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह मंच न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि हमारे समृद्ध अतीत और कला-संगीत की अद्भुत परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ और असम की संस्कृति में समानता है। ब्रिटिश काल में छत्तीसगढ़ से अनेक लोग असम आए और वहाँ रच-बस गए। राज्यपाल होने के नाते मेरी प्राथमिकता है कि यहाँ की संस्कृति को बढ़ावा मिले। यहाँ की शिक्षा व्यवस्था बहुत प्राचीन है। उन्होंने अतीत में रामायण, महाभारत से संबंधित दीये की रोशनी में खेले जाने वाले नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि नैतिकता की शिक्षा के साथ नाटक भक्ति मार्ग से जोड़ते थे। भक्ति मार्ग से ही देश-प्रदेश का विकास संभव है।
राज्यपाल ने कहा कि भले ही हमारी उपासना पद्धति अलग-अलग है लेकिन हमें समाज के उत्थान के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि यहाँ आने से पूर्व हमने राजा चक्रधर सिंह के विषय में अध्ययन किया तो पाया कि वे एक महान इंसान थे। उन्होंने कथक को नई शैली के रूप में स्थापित कर पहचान दिलाई जिसे रायगढ़ घराना के नाम से जाना जाता है।
राज्यपाल ने कहा कि इस मंच से प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और कला को नई ऊंचाईयां मिलेगी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगा। हम सभी मिलकर इस धरोहर को आने वाले पीढिय़ों के लिए संरक्षित रखेंगे। उन्होंने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले समय में भी यह आयोजन जारी रहेगा। हमारी प्राथमिकता है कि रायगढ हरा-भरा रहे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करते हुए हम सभी एक पेड़ माँ के नाम पर लगाएं।
समारोह को संबोधित वित्त मंत्री एवं स्थानीय विधायक ओ.पी.चौधरी ने भी संबोधित किया कि चक्रधर समारोह के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक वैभव को नई उंचाईयां और पहचान मिली है।
इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, आईजी संजीव शुक्ला, संचालक संस्कृति विभाग विवेक आचार्य, जनप्रतिनिधि सहित जिलाप्रशासन के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
हजारों लोगों ने ली स्वच्छता एवं सुपोषण की शपथ
इस अवसर पर राज्यपाल रमन डेका सहित सभी अतिथियों ने स्वच्छता एवं सुपोषण की शपथ ली।
दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड फूड इंडिया कार्यक्रम में जशप्योर टीम करेगी नवाचारों का प्रदर्शन
आदिवासी महिला स्व सहायता समूहों को बनाया जा रहा सशक्त
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जशपुर के आदिवासी युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने कार्य कर रहे हैं। जिले में विभिन्न प्रकार के वनोपज पाए जाते हैं। जिनका उत्पाद तैयार करके दिल्ली तक भी पहुंचाया जा रहा है, ताकि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को लाभ मिल सके। कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल एवं जिला प्रशासन की विशेष पहल पर अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में जशप्योर टीम वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 में नवाचारों का प्रदर्शन करने जा रही है। जिला प्रशासन स्टॉल स्थान सुरक्षित करने, यात्रा और आवास व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने में सहायता कर रहा हैं। यह पहल स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने और आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
जशप्योर का दल प्रतिष्ठित वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 कार्यक्रम में जशपुर का प्रतिनिधित्व करेगा। टीम 19 से 22 सितंबर 2024 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होगें। जहॉ महुआ उत्पादों के साथ अपने अभूतपूर्व नवाचारों की जानकारी देगें। जिसका लक्ष्य इस पारंपरिक सामग्री को आम थाली में लाना है।
युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन ने बताया कि जशप्योर एक महत्वपूर्ण लघु वनोपज, महुआ फूलों का उपयोग करके नवीन उत्पाद विकसित करने में सबसे आगे रहा है। हमारी टीम महुआ-आधारित उत्पादों की एक श्रृंखला का प्रदर्शन करेगी जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ती है, स्थिरता और पोषण पर जोर देती है। महुआ उत्पादों के अलावा, हम अपने बाजरा-आधारित उत्पादों का भी प्रदर्शन करेंगे, जिनमें पास्ता, कुकीज़ और कोल्ड-प्रोसेस्ड, ढेकी कुटा जवाफूल चावल शामिल हैं, जो बाजरा के पोषण संबंधी लाभों और बहुमुखी प्रतिभा को उजागर करते हैं।
उन्होंने बताया कि हमारे मुख्य उददेश्य महुआ को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना है, जिससे यह दुनिया भर के घरों में मुख्य भोजन बन जाए। यह पहल न केवल महुआ के पोषण संबंधी लाभों को बढ़ावा देती है बल्कि इसके संग्रह और प्रसंस्करण में शामिल आदिवासी समुदायों की आजीविका का भी समर्थन करती है।
अनेश्वरी भगत और प्रभा साई, दो समर्पित एसएचजी सदस्य, इस कार्यक्रम में जशप्योर टीम का हिस्सा होंगे। उनकी भागीदारी आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके योगदान को प्रदर्शित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित, वर्ल्ड फूड इंडिया 2024 एक प्रमुख कार्यक्रम है जो वैश्विक खाद्य उद्योग के हितधारकों को एक साथ लाता है। इस आयोजन में खाद्य क्षेत्र में निवेश और नवाचारों को बढ़ावा देने वाली प्रदर्शनियाँ, सम्मेलन और नेटवर्किंग के अवसर शामिल हैं।
स्वच्छता को बनाए सामाजिक आंदोलन, जन-जागरूकता से ही स्वच्छ होगा प्रदेश : विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा का किया राज्य स्तरीय शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने तेलीबांधा तालाब परिसर में झाड़ू लगाकर की सफाई, दिलाई स्वच्छता की शपथ
स्वच्छता दीदियों को पीपीई किट एवं समाज सेवी संस्थाओं को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के तेलीबांधा तालाब परिसर में आयोजित कार्यक्रम में ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा का राज्य स्तरीय शुभारंभ किया। उन्होंने कार्यक्रम में नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और तेलीबांधा तालाब परिसर में झाड़ू लगाकर सफाई की। उन्होंने स्वच्छता दीदियों तथा शहर को स्वच्छ बनाने में सहभागिता देने वाले सामाजिक संस्थाओं ग्रीन आर्मी, बंच ऑफ फूल्स, कुछ फर्ज हमारा भी और एवेंजर्स ग्रुप को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा के शुभारंभ पर आयोजित स्वच्छता मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने नए स्वच्छता वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विधायक मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा और अनुज शर्मा तथा महापौर एजाज ढेबर भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ में ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता को अपनाना चाहिए। शहरों, गांवों एवं प्रदेश को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए स्वच्छता को सामाजिक आंदोलन बनाने की जरूरत है। जन-जागरूकता से ही प्रदेश स्वच्छ और सुंदर बनेगा। उन्होंने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आज उनके जन्मदिन पर बधाई और शुभकामना दीं। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को विश्वकर्मा जयंती की भी बधाई दी।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की। इसके बाद से ही घर-घर में शौचालय बनाने के लिए सहायता राशि दी गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार गरीबों और वंचितों के लिए काम कर रहे हैं। जनधन योजना के तहत देशभर में लोगों के बैंक खाते खुले। इन खातों में सरकार की विभिन्न योजनाओं की राशि बिना किसी लीकेज के हितग्राहियों तक पहुंच रही है। इन राशियों का बहुत बेहतर सदुपयोग भी हो रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मैं स्वच्छता दीदियों को शत-शत नमन करता हूं। वे घर-घर जाकर कचरे का संग्रहण कर रही हैं और स्वच्छता में महत्वपूर्ण सहभागिता निभा रही हैं। वे सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग कर रिसायक्लिंग और खाद बनाने के लिए भेज रही हैं। साय ने बताया कि उन्हें कल गुजरात में ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर्स मीट एंड एक्सपो में शामिल होने का अवसर मिला था, जिसमें वायुमंडल को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा की जानकारी देते हुए कहा कि ‘स्वभाव स्वच्छता-संस्कार स्वच्छता’ की थीम पर आज से राज्य के सभी 184 नगरीय निकायों में विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। स्वच्छता दीदियों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ ही मैराथॉन, साइक्लोथॉन, श्रमदान जैसी विविध गतिविधियां संचालित की जाएंगी। ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़ा के शुभारंभ के मौके पर रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावरे, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक कुंदन कुमार, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, एसएसपी संतोष सिंह और नगर निगम के आयुक्त अबिनाश मिश्रा भी मौजूद थे।
एनपीएस वात्सल्य योजना का शुभारंभ 18 सितंबर को... रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में कार्यक्रमों का आयोजन
रायपुर। केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण 18 सितम्बर, 2024 को नई दिल्ली में एनपीएस वात्सल्य योजना का शुभारंभ करेंगी । नई दिल्ली के साथ ही देश के लगभग 75 स्थानों पर एनपीएस वात्सल्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे । वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अन्य स्थानों के लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस आयोजन में नए नाबालिग ग्राहकों को पीआरएएन सदस्यता का वितरण किया जाएगा।
इसी कड़ी में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा नाबार्ड के सहयोग से छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में एनपीएस वात्सल्य योजना का आयोजन किया जा रहा है । यह कार्यक्रम अपराह्न 1.30 बजे से 4 बजे तक तक ब्रम्हविद ग्लोबल स्कूल, भटगांव, रायपुर, मंहत पोसुदास शासकीय हाई स्कूल, सुरपा-पाटन, जिला दुर्ग और स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल, तारबहार, बिलासपुर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चे अपने पालकों के साथ शामिल होंगे।
एनपीएस वात्सल्य माता-पिता को पेंशन खाते में निवेश करके अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत करने के साथ दीर्घकालिक धन सुनिश्चित करने की अनुमति देगा। एनपीएस वात्सल्य लचीला योगदान और निवेश का विकल्प प्रदान करता है, जिससे माता-पिता बच्चे के नाम पर सालाना 1,000 रुपये का निवेश कर सकते हैं, जिससे यह सभी आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवारों के लिए सुलभ हो जाता है। यह नई पहल बच्चों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई है, जो भारत की पेंशन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है । यह योजना पेंशन फंड विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के तहत चलाई जाएगी। एनपीएस वात्सल्य की शुरुआत भारत सरकार की सभी के लिए दीर्घकालिक वित्तीय योजना और सुरक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह भारत की भावी पीढ़ियों को अधिक वित्तीय रूप से सुरक्षित और स्वतंत्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नये नियम का दस्तावेज लेखकों व स्टाम्प विक्रेताओं ने जताया विरोध, तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं ने सरकार की नई प्रणाली के विरोध में तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। यह हड़ताल 18 से 20 सितंबर तक चलेगी। विरोध का मुख्य कारण शासन द्वारा प्रस्तावित पेपरलेस और फेसलेस रजिस्ट्री सिस्टम है, जिससे दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं के बेरोजगार होने का खतरा है।
दस्तावेज लेखक चंद्रशेखर दास का कहना है कि वे लंबे समय से समाज को अपनी सेवाएं देते हुए अपना गुजारा कर रहे हैं, लेकिन अब सरकार एक ऐप के जरिए पेपरलेस और फेसलेस रजिस्ट्री प्रणाली लागू करने की योजना बना रही है। इस नई प्रणाली से लोग घर बैठे ही अपनी रजिस्ट्री करवा सकेंगे, जिससे दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं की सेवाओं की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे हजारों लोगों का रोजगार छिनने का खतरा है और उनके परिवारों का भविष्य अनिश्चित हो सकता है।
दस्तावेज लेखकों का कहना है कि यह हड़ताल सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए की जा रही है। उन्हें आम जनता को होने वाली परेशानी का खेद है, लेकिन उनका मानना है कि यह कदम उनकी आजीविका बचाने के लिए जरूरी है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि नई प्रणाली लागू करने से पहले उनके रोजगार के मसलों पर विचार किया जाए, ताकि वे बेरोजगारी के संकट से बच सकें।
चक्रधर समारोह-2024 : पद्मश्री अनुज शर्मा ने जसगीत और सुमधुर गीतों से श्रोताओं को झुमाया
पद्मश्री देवयानी नई दिल्ली ने दी भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति
कथक नृत्यांगना माया कुलश्रेष्ठ की मोहक प्रस्तुति से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
वेदिका ने कथक कर दर्शकों को किया आनंदित, भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं ने किया रोमांचित
भूमिसूता मिश्रा ने ओडिसी नृत्य एवं पलक ने कथक नृत्य की दी प्रस्तुति
मेवाती घराना रायपुर के प्रदीप कुमार चौबे ने प्रस्तुत किया शास्त्रीय गायन
रायपुर | रायगढ़ में आयोजित दस दिवसीय चक्रधर समारोह के नौवीं संगीत संध्या में नई दिल्ली से आई पद्मश्री देवयानी के भरतनाट्यम एवं प्रख्यात कथक नृत्यांगना सुश्री माया कुलश्रेष्ठ के कथक नृत्य ने सबका मन मोह लिया। पद्मश्री से सम्मानित एवं विधायक अनुज शर्मा के छत्तीसगढ़ी लोक गायन ने देर रात तक दर्शकों को झुमाया रखा। उन्होंने गुरू वंदना से गीत आरंभ करते हुए छत्तीसगढ़ी में जसगीत गाकर श्रोताओं को अपने साथ जोड़ा और खूब वाहवाही पायी। रायपुर के प्रदीप कुमार चौबे ने शास्त्रीय गायन एवं पलक देवांगन ने कथक नृत्य पर बेहतरीन प्रस्तुति दी। बिलासपुर की वेदिका शरण ने मंच पर भावभंगिमाओं मुद्राओं के साथ कथक नृत्य पर आकर्षक प्रस्तुति दी। भूमिसूता मिश्रा ने ओडिसी नृत्य पर शानदार प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में सारंगढ़ की पलक देवांगन ने बहुत ही खूबसूरत और मनमोहक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। शिव वंदना के साथ उन्होंने कथक नृत्य किया। अगली कड़ी में रायपुर के पंडित प्रदीप कुमार चौबे ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। उन्होंने तबले की थाप और सारंगी की धुन के बीच अपने राग से शास्त्रीय गायन की अभिनव प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों एवं श्रोताओं को एक बेहतरीन गायक से गायन सुनने का अहसास कराया। कार्यक्रम के तीसरी प्रस्तुति में रायपुर की भूमिसूता मिश्रा ने ओडिसी नृत्य पर प्रस्तुति दी। उन्होंने ओडिसी नृत्य में अपनी भावभंगिमाओं से दर्शकों का दिल जीत लिया। सांस्कृतिक संध्या में बिलासपुर की वेदिका शरण ने मंच पर भावभंगिमाओं मुद्राओं के साथ आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति दी। कथक में वेदिका की सुंदर प्रस्तुति ने दर्शकों को आनंदित किया। उन्होंने संगीत की धुन में अपनी कलात्मक नृत्य की अभिनव प्रस्तुति दी। 10 साल की वेदिका शरण 6 वर्ष की आयु से कथक नृत्य में निपुण है। इनकी गुरु अंजली ठाकुर (लखनऊ घराना) है।
नई दिल्ली से आई पद्मश्री देवयानी के भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। मौके पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने उनका शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि लुईस मेले की एक डॉक्यूमेन्टरी फिल्म में भरतनाट्यम की सम्मोहक प्रस्तुति से प्रभावित, पेरिस में जन्मी पदमश्री देवयानी ने भारत आकर भरतनाट्यम की विधिवत शिक्षा, महान गुरु के.जी.इलप्पा मुदलियार और कलाईमामनी व्ही.एस.मुत्थुस्वामी पिल्लई से प्राप्त की। उन्होंने लगभग 3000 वर्ष पुरातन भरतनाट्यम नृत्य शैली की खूबसूरती, लयात्मकता और इसमें निहित आध्यात्मिक भक्ति को आत्मसात किया। देवयानी ने अपनी प्रथम प्रस्तुति किसी कलामंच पर नहीं, बल्कि 'ए गर्ल फ्रॉम अमेरिका' नामक बॉक्स आफिस हिट दक्षिण भारतीय फिल्म में दी। इस फिल्म में उन्होंने चिदम्बरम मंदिर की नर्तकी के मुख्य पात्र का अभिनय किया था। भरतनाट्यम के प्रति देवयानी की समर्पित निष्ठा और नृत्य-सौंदर्यबोध ने इस नृत्य को भारत की सीमाओं से परे ले जाते हुए, पूरे विश्व में सौहाद्र्र शांति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना दिया। इंग्लैण्ड में भारतीय नृत्य एवं संस्कृति के उन्नयन के लिये फस्र्ट ऐशियन डान्सर आर्टिस्ट एवार्ड इन रेसीडेन्सश् सम्मान से नवाजी गई देवयानी डेनमार्क की महारानी के जन्मोत्सव, संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस समारोह, जर्मनी में भारतीय गणतंत्र समारोह सहित फ्रांस, जर्मनी और ग्रीस के प्रतिष्ठापूर्ण आयोजनों और अनेक नृत्य-वर्कशाप, अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार्स का संचालन सहित भारत और विश्व के लगभग सभी प्रमुख देशों के कलामंचों को अपने भरतनाट्यम के नुपूरों से शोभित किया है। आई.एम.एम.टॉप कल्चरल एम्बेसडर एवार्ड फॉर एक्सीलेन्स और नेशनल वीमेन एक्सीलेन्स एवार्ड से सम्मानित देवयानी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा कला के क्षेत्र में भरतनाट्यम की अद्वितीय उपलब्धियों के लिये पदमश्री से अलंकृत किया गया। कल्चरल एम्बेसडर के भारत में पद्मश्री देवयानी भरतनाट्यम की कल्चरल रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनेक पुरस्कारों और सम्मान से नवाजा जा चुका है।
नई दिल्ली से चक्रधर समारोह में कार्यक्रम देने पहुंची देश की प्रख्यात कथक नृत्यांगना माया कुलश्रेष्ठ ने सबका मन मोह लिया। उन्होंने 5 वर्ष की आयु में ही अपने पैरों में कथक के घुंघरू बांध लिए थे। गुरु डॉ.मोनिका श्रीवास से प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने विधिवत शिक्षा प्राप्त की। कथक में एमए के बाद अभिनय पक्ष की पुष्टता के लिए थिएटर भी किया। सामाजिक सरोकारों से जुड़े होने के कारण इन विषयों को भी उन्होंने अपने नृत्य में स्थान दी है। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनेकों सम्मान मिल चुके हैं। माया कुलश्रेष्ठ देश-विदेश में 500 से ज्यादा कार्यक्रम दे चुकी हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठवले ने उन्हें शाल और श्रीफल देकर सम्मानित किया।
छत्तीसगढ़ सरकार की अनोखी पहल से शुरू बस्तर ओलपिंक : नक्सली हिंसा के पीड़ित और पूर्व माओवादी आएंगे एक टीम में
छत्तीसगढ़ में बस्तर ओलंपिक का आयोजन
हवा बदलने के लिए सरकार कर रही प्रयास
1 नवंबर से शुरू होंगे विभिन्न खेल
रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार एक अनोखी पहल शुरू कर रही है। 1 नवंबर से यहां बस्तर ओलंपिक का आयोजन होगा। इस आयोजन में गांवों के खेलों को सम्मिलित किया गया है। इन खेलों का मकसद नक्सल प्रभावित इलाकों में लोगों को जोड़ना और उम्मीद जगाना है। इन खेलों में नक्सली हिंसा के शिकार और आत्मसमर्पित नक्सली भी हिस्सा लेंगे। ये लोग आमने-सामने आएंगे, यही नहीं एक टीम में भी खेल सकते हैं।
साय सरकार इन खेलों का आयोजन कर रही है। ये अनोखी पहल युवाओं को प्रोत्साहित करने, खेल भावना जगाने और पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में मदद करेगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि ये आयोजन बच्चों और युवाओं के लिए है। खासकर उनके लिए जो उग्रवाद से पीड़ित हैं। शर्मा ने कहा कि यह उनके आत्मविश्वास और जीवन में आगे बढ़ने की भावना को बढ़ाएगा। जो अच्छा प्रदर्शन करेंगे, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। सरकार उन्हें उनकी रुचि के क्षेत्र तलाशने में मदद करेगी।
अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि ओलंपिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लोगों को अच्छा और सुरक्षित महसूस कराने वाला माहौल बनाएगा। ये खेल ऐसे समय में हो रहे हैं जब कड़ी सुरक्षा कार्रवाइयों ने नक्सलियों को पीछे धकेल दिया है। सरकार को विकास का स्पष्ट रास्ता दिख रहा है। दो दशकों से बंद पड़े दर्जनों स्कूल पूर्व नक्सली इलाकों में फिर से खुल रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि ओलंपिक दो दशकों से अधिक समय से युद्ध का मैदान बने इस क्षेत्र में एक सकारात्मकता का संचार करेगा।
एक अधिकारी ने बताया कि बस्तर के युवाओं को पढ़ाई और खेलों में व्यस्त रखने से उन्हें नक्सली भर्ती के प्रयासों से दूर रखा जा सकेगा। हाल ही में भाकपा माओवादी ने एक बुकलेट जारी की थी। इसमें उसने निरंतर सुरक्षा अभियानों के कारण कैडरों की भर्ती में आने वाली कठिनाइयों को स्वीकार किया था। बस्तर ओलंपिक आम तौर पर उस समय के आसपास होगा जब नक्सली गांवों में घूमते हैं। युवाओं को अपने साथ जोड़ने या उन्हें अपनी फोर्स में शामिल करने की कोशिश करते हैं।
बस्तर रेंज के खेल अधिकारी रवींद्र पटनायक ने बताया कि खेलों की शुरुआत ब्लॉक स्तर पर होगी। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि शुरुआती योजना के अनुसार, ब्लॉक स्तर के ओलंपिक का आयोजन 1 से 15 नवंबर तक होगा। इसके बाद जिला स्तर की प्रतियोगिताएं 15 से 20 नवंबर तक और संभाग स्तर का फाइनल 8 से 30 नवंबर तक जगदलपुर में होगा। विजेताओं को नकद पुरस्कार और स्मृति चिन्ह प्रदान किए जाएंगे।
ये खेल होंगे शामिल
पटनायक ने कहा कि आत्मसमर्पित कैडर और नक्सली हिंसा के शिकार केवल संभाग स्तर पर खेलेंगे। चार उप-श्रेणियां होंगी। IED विस्फोटों या नक्सली हिंसा के शिकार, आत्मसमर्पित नक्सली, जूनियर और सीनियर समूह। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिभागियों की सूची अभी तैयार नहीं की गई है। विस्तृत दिशानिर्देशों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। खेलों में हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग (केवल पुरुष) और रस्साकशी (केवल महिलाएं) शामिल हैं।
नक्सली पीड़ितों और आत्मसमर्पित कैडरों का आमने-सामने आना या आम जनता के बीच एक साथ आना सामान्य बात नहीं है। पुलिस पूर्व नक्सलियों को स्थानीय आबादी से यथासंभव दूर रखने के लिए सावधानी बरतती है। उन्हें ठंडे दिमाग से सोचने के लिए विशेष शिविरों में रखती है। बस्तर ओलंपिक दो पक्षों के मिलन का एक अभूतपूर्व मंच होगा। इनके बीच के रिश्ते में आम तौर पर भय, पीड़ा और क्षति का बोलबाला होता है।
जब पीड़ितों से खेलों के बारे में उनकी राय जानने की कोशिश की गई, तो उनमें से जो भी संपर्क में आ सके, वे बेहद सतर्क थे। उनमें से एक ने कहा कि मेरा एक पैर नहीं है। वह एक IED विस्फोट में उड़ गया था। मैं कोई खेल कैसे खेलूंगा ? वहीं एक अन्य पीड़ित ने कहा कि मुझे बहुत शर्मिंदगी होगी। मेरा एक अंग कटा हुआ है। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीण नक्सलियों के खौफ में जीते हैं। हालात इतने खराब हैं कि अगर उनके किसी परिजन की नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी जाती है तो भी परिवार वाले पुलिस को सूचित करने की हिम्मत नहीं करते हैं। अब देखना होगा कि इस बस्तर ओलंपिक से कितनी तस्वीर बदलती है।
भोपाल की धरती पर छत्तीसगढ़ महतारी का वंदन : छत्तीसगढ़ी परिधान में प्रतिभागी बने आकर्षण का केन्द्र
दाई ओ दीदी ओ पढ़ना लिखना है जरूरी गीत ने बांधा समां
उल्लास की नवाचारी गतिविधियों पर शानदार प्रस्तुति
रायपुर | भोपाल में आयोजित उल्लास के रीजनल कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ के अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने हर कार्य में बेहतर प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। जहां एक ओर नवाचारी गतिविधियों की बेहतर प्रस्तुति दी गई, जिसमें कठपुतली इत्यादि को संजोकर छत्तीसगढ की प्रदर्शनी लगाई गई। शिक्षार्थी व स्वयंसेवी शिक्षक ने चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर उपाय बताएं वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ छाया रहा।
भारत सरकार शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की संयुक्त सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी, एनसीईआरटी नई दिल्ली की एनसीएल प्रभारी प्रोफेसर उषा शर्मा राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण व राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद छत्तीसगढ़ के डायरेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा के कुशल नेतृत्व में दो दिवसीय उल्लास क्षेत्रीय सम्मेलन रीजनल कॉन्फ्रेंस NITTTR भोपाल में आयोजित किया गया। कटारा ने छत्तीसगढ़ में उल्लास कार्यक्रम की प्रगति से संयुक्त सचिव अवस्थी को अवगत कराया। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण में उल्लास कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी कार्यक्रम में प्रोजेक्टर के द्वारा छत्तीसगढ़ में उल्लास में किए गए कार्यों एवं बेस्ट प्रैक्टिसेस को बताया। प्रस्तुतिकरण में साक्षरता चौक साक्षरता रथ साक्षरता ताली स्थानीय संसाधनों से पढ़ने के नए-नए तरीके के साथ यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम चरण में 10 लाख असाक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य दिया गया है, उसमें से 75 प्रतिशत नाम उल्लास पोर्टल में दर्ज कर लिया गया है।
एससीईआरटी एससीएल प्रकोष्ठ प्रभारी डेकेश्वर प्रसाद वर्मा ने बताया कि उल्लास प्रवेशिका को छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय संदर्भ लोक संस्कृति, लोक कला को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के 16 स्थानीय भाषाओं में उल्लास गीत पुस्तक एवं ऑडियो निर्माण किए गए है।
छत्तीसगढ़ तथा अन्य प्रदेशों के सेल्फ टीचिंग लर्निंग मटेरियल स्टॉल लगाए गए थे । छत्तीसगढ़ का स्टॉल आकर्षक रहा ओर सभी अतिथियों ने किए गए कार्यों की सराहना की। छत्तीसगढ़ राज्य के लिए यह क्षेत्रीय सम्मेलन विशेष रहा है रायपुर की जिला परियोजना अधिकारी डॉ. कामिनी बावनकर के संयोजन में छत्तीसगढ़ की टीम ने सेल्फ टीचर लर्निंग मटेरियल को तैयार करके मंच पर बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया। जिसकी सभी राज्यों ने प्रशंसा की। संचालक कटारा के आतिथ्य में सांस्कृतिक संध्या के प्रतिभागियों को अंग वस्त्र एवं पौधा भेंट किया गया।
भोपाल की धरती पर छत्तीसगढ़ महतारी का वंदन गीत पर शानदार नृत्य निर्जला धीवर, स्वयंसेवी शिक्षक एवं छत्तीसगढ़ के सरगुजा नृत्य हाय रे सरगुजा नाचे... गीत के नृत्य में, हेम धर साहू एवं ग्रुप ने सभी प्रतिभागियों को झूमने पर मजबूर किया । सांस्कृतिक संध्या मेंठछत्तीसगढ़ के बैगा संस्कृति व वेशभूषा से बीएड कॉलेज के छात्र अध्यापकों ने सभी को प्रभावित किया। छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति के परिधान में साक्षरता के लिए किए गए कार्यों से लोग प्रभावित हुए और क्षेत्रीय सम्मेलन में अमिट छाप छोड़ी।
छत्तीसगढ़ के स्वयंसेवी शिक्षकों, नव साक्षर, शिक्षार्थी ने साक्षर बनाने में आ रही चुनौतियो को बताते हुएठ उल्लास में किए गए कार्यों की सफलता की कहानी बताई। स्वयंसेवी शिक्षकों की नवाचारी गतिविधियां कठपुतली के माध्यम से ‘‘दीदी ओ दाई ओ पढ़ना लिखना है जरूरी........’’ जैसे गीतों के साथ स्वयं सेवी शिक्षकों, नव साक्षर, शिक्षार्थी में आत्मविश्वास बना रहा। शिक्षक तस्कीन खान ने बताया कि वह शिक्षार्थियों को कक्षा में जोड़ने के लिए मुस्लिम होने के बावजूद रामचरितमानस सुनाकर रामायण पढ़ने की ललक जगाकर शिक्षार्थियों को पढ़ने की ओर प्रेरित किया।जन जन साक्षर... जय अक्षर का संकल्प लेते हुए छत्तीसगढ़ की टीम ने अपनी उपलब्धियां से दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया। लोगों ने कहा छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।
इस अवसर पर राज्य शिक्षा केंद्र के डायरेक्टर हरजिंदर सिंह, शिक्षा मंत्रालय की सलाहकार सुनीता चौहान बानी बोरा, राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के नियंत्रक राकेश दुबे, सिद्धांत ज्योति, किरण खलको निर्जला धीवर, श्रुति तिवारी, शालिनी, प्रतिमा शिक्षार्थी एवं नव साक्षर सुमंती तिग्गा, धनराजी तिग्गा, श्यामापति का विशेष योगदान रहा।
चक्रधर समारोह-2024 : क्लासिकल आर्ट को बनाए रखने में योगदान दें : जस्टिस संजय अग्रवाल
जस्टिस अग्रवाल ने कलाकारों का किया सम्मान
कुचिपुड़ी के नृत्यांगनाओं ने गणपति और शिव वंदना को नृत्य में पिरोया
प्रभु श्री रामलला के जीवन दर्शन और श्रीगणेश वंदना ने महफिल का मन मोहा
पौशाली चटर्जी ने राधा-कृष्ण होली, कृष्ण और सखा के माखनचोरी को मणिपुरी नृत्य से किया जीवंत
रायपुर | सुर-ताल, लय तथा छंद और घुंघरू के संगीतबद्ध 39 बरस के इस चक्रधर समारोह में आठवें दिन मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता और सतना सहित रायगढ़ घराना के कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और शास्त्रीय गायन ने रसिकजनों व दर्शकों को मत्रमुग्ध कर दिया। इन कलाकारों द्वारा शास्त्रीय संगीत से पिरोए हुए गणपति अराधना, शिववंदना, राधा-कृष्ण के रासलीला और कृष्ण व सखा के माखन चोरी की बेजोड़ एवं जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर होने पर मजबूर कर दिया। वहीं रायगढ़ घराना के कथक की शानदार प्रस्तुति ने समारोह में विशेष छटा बिखेरा।
चक्रधर समारोह में शामिल हाईकोर्ट जस्टिस संजय अग्रवाल ने कार्यक्रम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि क्लासिकल आर्ट धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। क्लासिकल आर्ट को बनाए रखने के लिए हमें योगदान देने की जरूरत है। कार्यक्रम के माध्यम से मंच देकर क्लासिकल आर्ट को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में रायगढ़वासियों का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि अनुभव और एनर्जी से कला को और आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सभी कलाकारों को शुभकामनाएं और बधाई भी दी। समारोह में हाई कोर्ट जस्टिस संजय अग्रवाल, सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार जैन, कलेक्टर कार्तिकेया गोयल, एसपी दिव्यांग पटेल ने मुंबई की भरतनाट्यम कलाकार कृष्णभद्रा नम्बूदरी, मणिपुरी नृत्यांगना पौशाली चटर्जी तथा शास्त्रीय गायक विनोद मिश्रा को सम्मानित किया।

कोलकाता की पौशाली चटर्जी ने राधा-कृष्ण होली, कृष्ण और सखा के माखनचोरी को मणिपुरी नृत्य के माध्यम से दर्शकों के सामने पेश की। वहीं मुंबई की प्रख्यात भरतनाट्यम कलाकार कृष्णभद्रा नम्बूदरी ने दक्षिण भारत के मंदिरों में प्रस्तुत गणेश वंदना को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया।
कार्यक्रम में सतना से आए विख्यात संगीतकार विनोद मिश्रा ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। इसी तरह डॉ.रघुपतरुनी श्रीकांत के नेतृत्व में गणपति और शिव वंदना, विवाह के अवसर को बहुत ही द्रुत गति से भावभंगिमाओं के साथ कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को अपनी ओर लगातार देखने को मजबूर किया। इसी तरह कथक नृत्य के साथ नृत्यांगनाओं ने भी अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से मंच पर खुशबू बिखेरी। शिव की उपासना और कृष्ण रास लीला से माहौल भक्तिमय हो गया। नन्हीं कलाकारों ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
चक्रधर समारोह के आठवें दिन रायगढ़ के कलाकारों ने मंच पर प्रथम प्रस्तुति देकर कार्यक्रम की शुरूआत की। सर्वप्रथम अनन्ता पाण्डेय और शाश्वती बनर्जी ने कथक नृत्य कर खूब तालियाँ बटोरी। शाश्वती बनर्जी ने शिव की उपासना को अपने नृत्य में प्रस्तुति दी। इसी तब्बू परवीन के नेतृत्व में उनकी शिष्याओं ने कथक को कृष्ण रासलीला के रूप में बहुत ही सुंदर रूप में मंचन किया। नन्हीं कलाकारों ने अपनी खूबसूरती से दर्शकों को अपनी ओर बांधे रखा। सभी ने इस रासलीला की प्रशंसा की। इन सभी कलाकारों का अभिनंदन राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य अतिथियों ने शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह के साथ स्वागत-सम्मान किया।
कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति में रायपुर की कथक कलाकार संगीता कापसे, गीतिका चक्रधर और राधिका शर्मा ने मंच पर रामलला के जीवन दर्शन को नृत्य में प्रस्तुत किया। वहीं कार्यक्रम की अगली प्रस्तुति में मुंबई की प्रख्यात भरतनाट्यम कलाकार कृष्णभद्रा नम्बूदरी ने दक्षिण भारत के मंदिरों में प्रस्तुत गणेश वंदना को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया। उन्होंने तकनीकी टीम के सहयोग से भाव भंगिमाओं के साथ आकर्षक भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी।
कोलकाता की पौशाली चटर्जी ने आकर्षक वेशभूषाओं में अपनी सहयोगियों के साथ मणिपुरी नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी। उन्होंने राधा-कृष्ण और गोपियों के साथ होली खेलने के भाव को जीवंत किया। पौशाली चटर्जी ने कृष्ण के बाल रूप को मंच पर माखनचोरी के दृश्य को मणिपुरी नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। चटर्जी ने अपनी सहयोगियों के साथ मृदंग वादन और हाथों की तालियों को बहुत ही लयबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने वृंदावन का वर्णन और दशावतार को नृत्य में प्रस्तुत किया। नृत्यांगना पौशाली के साथ उनकी वरिष्ठ शिष्याएँ-श्रीपर्णा सरकार, मौमिता हाजरा, अंकिता घोराई और रत्ना मजूमदार और तन्मना रॉय और सुवरा भौमिक, झिनुक रॉय चक्रवर्ती ने प्रस्तुति दी। सतना से आए विख्यात संगीतकार विनोद मिश्रा (खयाल और ठुमरी ग्वालियर घराना) ने रागमाला, शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। उन्होंने मान जाओ सैंया..आ जा बलम परदेश... जैसे गीत अपने अंदाज में प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने तन्मयता से सुना।
श्रीकाकुलम से आये कुचिपुड़ी के नृत्यांगनाओं ने संगीत के धुनों में अपने आपको आत्मसात करते हुए बहुत ही शानदार सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी। डॉ.रघुपतरुनी श्रीकांत के नेतृत्व में गणपति और शिव वंदना, विवाह के अवसर को बहुत ही द्रुत गति से भावभंगिमाओं के साथ कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को अपनी ओर लगातार देखने को मजबूर किया। शिवशक्ति उपासना का उनका यह नृत्य मनमोहक भी बना। गणतंत्र दिवस समारोह नई दिल्ली में भी कुचिपुड़ी का प्रदर्शन कर चुके कलाकारों ने दर्शकों की खूब वाहवाहियां बटोरी। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में दिल्ली से आए आलोक श्रीवास ने अपने प्रत्यंग का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए अपने मनमोहक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। इस दौरान उनके साथ पढंत में भूपेंद्र बरेठ, गायन में साहिल सिंह, तबला में देवेंद्र श्रीवास तथा सारंगी में शफीक हुसैन ने साथ दिया।
बिग ब्रेकिंगः जादू टोने के शक में पांच की हत्या... आरोपी गण गिरफ्तार
रायपुर। प्रदेश के सुकमा जिले में जादू टोने के शक में पांच लोगों की हत्या कर दी गई। आरोपियों ने गांव वालों के सामने ही पांचों को पीट-पीटकर मार डाला। मृतकों में एक ही परिवार की तीन महिलाएं और दो पुरूष शामिल है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला सुकमा जिले के कोंटा के मुरलीगुड़ा कैंप के पास इटकला गांव का है। गांव के ही कुछ लोगों को शक था कि मृतक परिवार के द्वारा जादू-टोना किया जा रहा है। जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है। इसी गुस्से में गांव के कुछ ग्रामीण मृतक के घर पहुंचे और महिलाओं और पुरूष की लाठी डंडे से पिटाई करने लगे।
आरोपियों ने पांचों को इतना पीटा की मौके पर ही सभी ने दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मृतकों के नाम मौसम कन्ना (60), मौसम बुच्चा (34), मौसम बिरी, मौसम अरजो (32), करका लच्छी (43) वर्ष शामिल है। बता दें कि चार दिन पहले ही बलौदाबाजार में इसी तरह की घटना हुई। जादू-टोने के शक में एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में एक मासूम, दो महिला व एक बालक था।
गजानन साई मंदिर गणेश पंडाल पहुंचे श्रममंत्री देवांगन... निर्माण कार्यों के लिए 5 लाख की घोषणा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला मुख्यालय में बुधवारी बाजार स्थित गजानन साईं मंदिर में महाराष्ट्र मंडल कोरबा के तत्वावधान में चल रहे गणेशोत्सव की महाआरती में प्रदेश के श्रम, उद्योग और वाणिज्य मंत्री लखन लाल देवांगन शामिल हुए। उन्होंने कहा कि समाज के इस आस्था केंद्र गजानन साईं मंदिर में मैं अनेक बार आया हूं। महाराष्ट्रीयन समाज सज्जन, मृदु भाषी और शिक्षित लोगों का समाज है । इस अवसर पर उन्होंने सामुदायिक भवन में आंतरिक बिजली फिटिंग और महिला-पुरुष शौचालय निर्माण के लिए 5 लाख राशि की घोषणा की। समाज की मांग पर उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले सत्र में विधायक निधि से बड़े कार्यो हेतु 25 लाख राशि की स्वीकृति भी होगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ में महाराष्ट्र मंडल कोरबा के अध्यक्ष हेमन्त माहुलीकर ने स्वागत उद्बोधन से किया। उन्होंने सन् 1962 से महाराष्ट्र मंडल कोरबा द्वारा मनाये जा रहे गणेशोत्सव के बारे में बताया। उन्होंने पूर्वजों द्वारा स्थापित इस गजानन साईं मंदिर में सामाजिक कार्यों के लिए कुछ निर्माण कार्य की आवश्यकता मंत्री देवांगन के सम्मुख रखी। जिसे मंत्री पूर्ण करने का आश्वासन दिया। समाज के संरक्षक सुधीर रेगे एवं वरिष्ठ सदस्य मनीष साठे के मार्गदर्शन में श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर मंत्री देवांगन का सम्मान किया। इस दौरान मंच पर गणेश सेवा समाज के अध्यक्ष राजेंद्र पागे , महाराष्ट्र भगिनी मंडल की अध्यक्षा अर्चना जोशी एवं मराठा समाज के जिला अध्यक्ष नरेंद्र वाकडे भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर भजन यामिनी का भी आयोजन किया गया था। स्वाती रेगे , हेमन्त माहुलीकर, ज्ञानेश तिलवणकर, चिंतन ओत्तलवार, श्वेता ओत्तलवार ,कु अक्षदा पाठक, कु आस्था पाठक, योगिता पाठक, सुषमा तारेकर, कु काव्या ओत्तलवार की भजन प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों ने सराहा।
मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बरगवाँ में पढ़ाई की सहुलियत बढ़ी
आकर्षक रंगरोगन, कलात्मक चित्रों से बच्चों को मिल रहा बेहतर परिवेश
रायपुर | अब जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बरगवां में बच्चों को पढ़ाई करने में सहुलियत होगी। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत यहां कुल 16.10 लाख रूपये की लागत से दो नए कमरे बनकर तैयार हो गए है। दरअसल इस स्कूल में बच्चों के लिए पढ़ने हेतु कक्षों की कमी हो रही थी।
स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें एक ही कक्ष में बैठकर पढ़ना पड़ता था, जिससे उन्हें परेशानी होती थी। तीन बने हुए कक्षों में एक कक्ष का सात साल पहले जीर्णोद्धार हुआ था। बाकी जर्जर स्थिति में थे। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के माध्यम से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अतिरिक्त कक्ष निर्माण का निर्णय लिया गया।
जांजगीर-चांपा के जनपद पंचायत अकलतरा के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बरगवाँ में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के माध्यम से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग जांजगीर के द्वारा 02 नग अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य कराया गया है। शाला में अतिरिक्त कक्ष निर्माण हो जाने से विद्यार्थियों को बैठक व्यवस्था में सुविधा होने लगी। कक्षावार विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था होेने से उनके अध्ययन कार्य और शिक्षकों के अध्यापन कार्य में सहजता हुई है। विद्यार्थियों को अब पढ़ने के लिए आरामदायक वातावरण मिल गया है, विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं। यहां 6वीं, 7वीं और 8वीं में कुल 102 बच्चे अध्ययनरत हैं। तीन कक्ष में एक ही हाल में दो नए कमरे बनने से अब कक्षों में विद्यार्थियों की कम भीड़ है, जिससे शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों, शिक्षकों ने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत कक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार जताते हुए खुशी जाहिर की है।
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ट्रॉयल के लिए निकली वन्दे भारत एक्सप्रेस पर पथराव, पार्षद के भाई सहित 5 आरोपी गिरफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ को एक और वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात मिलने वाली है। यह ट्रेन दुर्ग से विशाखापट्टनम तक पटरी पर दौड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को एक साथ 10 वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसी बीच छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से वंदे भारत ट्रेन पर पथराव की खबर सामने आई है। यहां बागबाहरा रेलवे स्टेशन पर वंदेभारत ट्रेन पर पथराव किया गया, जिसमें ट्रेन के तीन कोच के शीशे तोड़ डाले गए, सूचना मिलने पर रेलवे पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पांचों आरोपी बागबाहरा के रहने वाले है।
आरपीएफ पुलिस रेलवे एक्ट 1989 के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को आज ही रेलवे कोर्ट में पेश करेगी। RPF के अधिकारी परवीन सिंह ने बताया, ‘कल वंदे भारत ट्रेन जो 16 तारीख से चलने वाली है, उसका ट्रायल रन था। वह महासमुंद से सुबह 7.10 पर निकली, 9 बजे के करीब बागबाहरा के पास में कुछ असमाजिक तत्वों ने चलती गाड़ी पर पथराव कर दिया। ट्रेन में हमारी सपोर्टिंग पार्टी हथियार के साथ थी। उन्होंने सूचना दी, सूचना के बाद तुरंत एक टीम गई और उसने जांच की और पांच आरोपी पकड़े गए। इसमें एक आरोपी पार्षद का भाई भी है।