रायपुर
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका-राज्यपाल रमेन डेका
रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका से आज छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने लोक भवन में सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल ने सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। वन अधिकारियों के पास कानून, संसाधन और अधिकार उपलब्ध हैं, जिनका प्रभावी उपयोग कर वे पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप भूकंप, बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता है। इसलिए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना सतत विकास का आधार है। राज्यपाल ने रेत के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आधारभूत संरचना निर्माण के लिए आवश्यक खनिज है। उन्होंने अधिकारियों से इस दिशा में शोध और नवाचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे उपाय विकसित किए जाएं जिससे नदियों में जल प्रवाह सतत बना रहे, उनकी क्षमता बढ़े, पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और आवश्यक मात्रा में रेत भी प्राप्त होती रहे। राज्यपाल ने वन अधिकारियों से कहा कि वे जंगलों के प्रति लगाव उत्पन्न करें, इससे उन्हें जंगलों को समझने में आसानी होगी और वे अपने दायित्वों का निर्वाह अच्छे से कर सकेंगे।
राज्यपाल ने वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट का घेरा बना दिया जाता है, जिससे उनके विकास में बाधा आती है तथा वर्षा जल का भू-जल स्तर में समुचित पुनर्भरण नहीं हो पाता। ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वन अधिकारियों का कार्य कार्यालय में बैठना नहीं है बल्कि जंगलों में भ्रमण कर वनवासियों की समस्याओं को समझना और वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नवाचारपूर्ण उपाय करना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे जीवन में कोई ऐसा भी काम करें जो सेवा से जुड़ा हुआ हो चाहे वह पर्यावरण सुरक्षा, स्वच्छता, मानव सेवा जैसे कार्य हो सकते हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन सेवा 2023 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ते कदम, नैनो उर्वरकों से सुधरी फसल की गुणवत्ता
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं। किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। संतुलित पोषण, कम लागत और बेहतर कृषि उत्पादकता की दिशा में यह पहल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।
कोरबा जिले के ग्राम खैरभवना निवासी कृषक रमेश सिंह कंवर इसकी सफलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े कंवर अपनी लगभग डेढ़ एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करते हैं। खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत वे आज सहकारी समिति कनबेरी पहुंचे, जहां उन्होंने अन्य कृषि आदान सामग्री के साथ नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया भी प्राप्त किया।
कंवर बताते हैं कि वे पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। प्रारंभ में उन्होंने परीक्षण के तौर पर इसका प्रयोग किया था, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब वे प्रत्येक वर्ष नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है, हरियाली बढ़ी है तथा उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है। इसके साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से उनकी लागत में कमी आई है और आर्थिक लाभ भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त होते हैं, जिससे फसल का समुचित विकास होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है तथा पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कंवर ने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा कि केवल पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों को अपनाएं। इससे फसलों को बेहतर पोषण मिलता है, उत्पादन में वृद्धि होती है तथा खेती की लागत कम होकर किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलती है।
विशेष लेख : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: स्वस्थ जीवन और विकसित भारत का आधार बनेगा योग
रायपुर : भारत में प्राचीन काल से ही योग हमारी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। ऋषि-मुनियों, योगियों और संतों ने योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, शांत मन और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। भारतीय ज्ञान परंपरा की यह अमूल्य धरोहर आज विश्वभर में स्वास्थ्य और कल्याण का पर्याय बन चुकी है। इसी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की, जो आज विश्वव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) रखी गई है। यह थीम योग के माध्यम से जीवन के प्रत्येक चरण में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का संदेश देती है। योग न केवल रोगों से बचाव का प्रभावी माध्यम है, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की आधारशिला भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में योग आज विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। योग व्यक्ति को स्वस्थ बनाकर परिवार समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का माध्यम बनता है इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर का मुख्य आयोजन कोलकाता में आयोजित किया जा रहा है जहां प्रधानमंत्री स्वयं योगाभ्यास का नेतृत्व करेंगे।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह अंबिकापुर में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं योगाभ्यास में सहभागिता करेंगे और प्रदेशवासियों को नियमित योग अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देंगे। राज्य सरकार द्वारा योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय का मानना है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता अभियानों में योग को विशेष महत्व दे रही है।
प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में योग का संदेश लोगों के जीवन से सहज रूप से जुड़ता है। प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली योग के मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय संस्थानों में नियमित योग गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। नियमित योगाभ्यास शरीर को निरोग, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाता है। यह व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि योग को केवल एक दिवस का आयोजन न मानकर दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग को अपनाना समय की आवश्यकता है। आइए, योग के माध्यम से स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित भारत और समृद्ध विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।
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मुख्यमंत्री साय से महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था, किसानों के हित में संचालित योजनाओं, कृषि क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और यहां की बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला एवं संस्कृति के प्रतीक बस्तर आर्ट का स्मृति-चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ कृषि निवेश में सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष में लगभग 141 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है, जो देश में धान खरीदी के सबसे बड़े अभियानों में से एक है। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए प्रदेशभर में लगभग 2700 धान उपार्जन केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित तरीके से धान की खरीदी की जाती है। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए संग्रहण केंद्रों और गोदामों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है।
चर्चा के दौरान महाराष्ट्र के विधायक प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के चार जिलों में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था, किसानों को मिलने वाला समर्थन और प्रशासनिक प्रबंधन अत्यंत प्रभावी एवं अनुकरणीय है। राज्य में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने तथा खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए गए प्रयास सराहनीय हैं।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि छत्तीसगढ़ का धान खरीदी मॉडल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का सफल उदाहरण है। उन्होंने इस मॉडल के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र के धान उत्पादक क्षेत्रों में भी ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, महाराष्ट्र के विधायक डॉ. परिणय फुके, विनोद अग्रवाल, राजू कारेमोरे एवं संजय पुराम, छत्तीसगढ़ मार्कफेड के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने संजय अग्रवाल को छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली परंपरा का अभिन्न अंग है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रदेश में योग को जन-जन तक पहुंचाने तथा युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को योग से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुलाकात के दौरान योग के संवर्धन तथा प्रदेश में योग संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री अग्रवाल के नेतृत्व में प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।
राष्ट्रपति मुर्मु ने ओंकारेश्वर तीर्थ और ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर किया अभिषेक
भोपाल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को मध्य प्रदेश की यात्रा के पहले दिन तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर तीर्थ और द्वादश ज्योतिर्लिंग ममलेश्वर के दर्शन कर अभिषेक भी किया। उन्होंने ममलेश्वर और ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की।
राष्ट्रपति मुर्मु ने 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ममलेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश से पहले नंदी प्रतिमा पर बेलपत्र अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में मुख्य पुजारियों द्वारा वैदिक रीति-रिवाज और विशेष मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने देशवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। ओंकारेश्वर तीर्थ के दर्शन के पहले राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।
ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने स्मृति चिह्न भेंट किया। क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने भी राष्ट्रपति मुर्मु को स्मृति चिन्ह के रूप में नर्मदेश्वर शिवलिंग, शंख और भगवान ओंकारेश्वर तीर्थ का छायाचित्र भेंट किया। इस अवसर पर जनजाति कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह, क्षेत्रीय विधायक नारायण पटेल, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, आईजी अनुराग सिंह व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सीएम साय की अचानक हुई बैठक.... मंत्री कार्यक्रम छोड़ रातों-रात पहुंचे रायपुर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार रात अचानक सभी मंत्रियों को सीएम हाउस तलब किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। देर रात बुलाई गई इस अहम बैठक में कई मंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रम छोड़कर रायपुर पहुंचे। शुरुआत में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें लगाई गईं, लेकिन इसे राजनीतिक कयास बताया गया।
बैठक में सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की समीक्षा की गई और आगामी ढाई साल की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न विभागों के कामकाज पर सुझाव लिए गए, साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी मंथन किया गया।
जानकारी के मुताबिक, कुछ मंत्री दिनभर अपने प्रभार वाले जिलों और सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त थे, लेकिन निर्देश मिलते ही तत्काल रायपुर रवाना हो गए। सरगुजा से मंत्री राजेश अग्रवाल और एमसीबी जिले के कार्यक्रम में मौजूद मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी कार्यक्रम बीच में छोड़कर बैठक में शामिल होने पहुंचे। बैठक के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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जशपुर में किसानों को खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, प्रशासन की कड़ी निगरानी से कालाबाजारी पर रोक
रायपुर। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जशपुर जिले में खाद, बीज एवं कृषि ऋण की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कृषि एवं सहकारिता विभाग के समन्वित प्रयासों से जिले की आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों में कृषि आदानों का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और उर्वरकों के अवैध विक्रय पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है।
उप संचालक कृषि एमआर भगत ने बताया कि किसानों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। विभागीय अमला गांव-गांव पहुंचकर किसानों को वैज्ञानिक खेती और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दे रहा है।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में सहकारी समितियों की संख्या 24 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है। इससे किसानों को खाद एवं बीज प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है और समय तथा परिवहन व्यय दोनों में कमी आई है।
वर्तमान में जिले की 44 सहकारी समितियों में 9,285 मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 3,681 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार 6,836 क्विंटल धान बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें से 1,872 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाया जा चुका है। आगामी मांग को देखते हुए खाद एवं बीज का भंडारण लगातार बढ़ाया जा रहा है।
कृषि ऋण वितरण के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 10,187 किसानों को कुल 37 करोड़ 79 लाख 12 हजार रुपये का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसमें 31 करोड़ 33 लाख 08 हजार रुपये नगद तथा 6 करोड़ 46 लाख 04 हजार रुपये वस्तु ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं। इस सहायता से किसानों को समय पर कृषि निवेश करने और खेती की लागत वहन करने में मदद मिल रही है।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को खाद, बीज एवं कृषि ऋण की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सभी सहकारी समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लगातार निरीक्षण कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने, हरी खाद एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है, ताकि आवश्यक कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके।
हाउसिंग बोर्ड की करोड़ों की जमीन पर निजी बिल्डर का कब्जा, चला बुलडोजर!
रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रायपुर के सेजबहार फेस-1 कॉलोनी में बड़ी कार्रवाई करते हुए हाउसिंग बोर्ड की भूमि को अतिक्रमणमुक्त करा लिया है। यहां एक निजी बिल्डर द्वारा बिना अनुमति के अवैध रूप से सड़क का निर्माण कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे मंडल की टीम ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले रसूखदार बिल्डरों को बख्शा नहीं जाएगा। मंडल द्वारा मुक्त कराई गई इस भूमि पर भविष्य में नई आवासीय परियोजना विकसित की जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों और मध्यम वर्ग के परिवारों को किफायती दरों पर आवास मिलने का रास्ता साफ होगा।
यह मामला वर्ष 2006 से जुड़ा है, जब दीनदयाल आवास योजना के तहत कलेक्टर रायपुर के आदेश पर ग्राम सेजबहार और ग्राम दतरेंगा की कुल 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) भूमि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को आवंटित की गई थी। इस जमीन पर कुल 1435 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप) आवास बनाए जाने थे, जिनमें से 1366 आवासों का निर्माण तो हो गया, लेकिन भूमि विवाद के कारण 79 आवासों का निर्माण रुक गया था।
हाल ही में जब राजस्व अभिलेखों के आधार पर मंडल ने अपनी करीब 18 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कराया, तो पता चला कि एक निजी बिल्डर इस विवादित हिस्से पर अवैध कब्जा कर सड़क बना रहा है। इसके बाद कार्यपालन अभियंता श्री नितेश कश्यप और संपदा अधिकारी श्री अमृत लाल बरमन के नेतृत्व में पहुंची अधिकारियों की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को हटा दिया।
कुल आवंटित भूमि: ग्राम सेजबहार और दतरेंगा की 21.538 हेक्टेयर (लगभग 53.19 एकड़) जमीन।
प्रस्तावित आवास: योजना के तहत कुल 1435 एलआईजी मकानों का निर्माण होना था।
निर्मित आवास: स्वीकृत ले-आउट के तहत कुल 1366 आवासों का निर्माण पूरा किया गया।
लंबित आवास: भूमि विवाद के चलते 79 आवासों का निर्माण नहीं हो सका था, जिस पर बिल्डर की नजर थी।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अधिकारियों के मुताबिक, मुक्त कराई गई यह भूमि मंडल की अत्यंत महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही विभाग अब इस पूरी पॉकेट पर एक नई आवासीय परियोजना की रूपरेखा तैयार कर रहा है, ताकि क्षेत्र का व्यवस्थित विकास हो सके।
डॉ. रमन सिंह द्वारा छत्तीसगढ़ की जैन विरासत का उल्लेख समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षणः जैन इंटरनेशनल फोरम
रायपुर। ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विशाल सामाजिक एवं धार्मिक गरिमा से संपन्न कार्यक्रम में जैन आचार्य, उपाध्याय, साधु-साध्वी भगवंतों की पावन उपस्थिति के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रीगण, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, अनेक प्रदेश मंत्री, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। ऐसे पवित्र, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के मंच से पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष माननीय डॉ. रमन सिंह ने सिरपुर, आरंग, मल्हार सहित छत्तीसगढ़ की प्राचीन जैन विरासत एवं पुरातात्विक धरोहरों का हजारों समाजबंधुओं के समक्ष सम्मानपूर्वक उल्लेख किया जाना जैन समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक क्षण है।
जैन इंटरनेशनल फोरम के महासचिव और यूनेस्को वोलंटीएर प्रवीण प्रकाशचंद जैन ने बताया कि डॉ. रमन सिंह जी का यह उद्बोधन केवल जैन समाज का सम्मान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बहुआयामी सभ्यतागत विरासत का अभिनंदन है। सिरपुर, आरंग और मल्हार जैसे स्थलों में जैन धर्म की प्राचीन, शांतिपूर्ण और गौरवशाली उपस्थिति रही है। इन धरोहरों को इस ऐतिहासिक अवसर पर, इतने बड़े सार्वजनिक एवं राष्ट्रीय महत्व के मंच से प्रतिध्वनित किया जाना आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और पुरातात्विक विरासत से जोड़ने वाला प्रेरणादायी प्रयास है। डा सिंह के प्रति आभार इसलिए भी जरुरी है की उन्होंने उपस्तिथि युवाओं और समाजजनों का अवहां किया की इन स्थलों के संरक्षण, शोध, दस्तावेजीकरण, जन-जागरण और पर्यटन-परिपथ से जोड़ने की दिशा में समाज, शासन, पुरातत्व विशेषज्ञों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों को मिलकर कार्य करना चाहिए। जैन इंटरनेशनल फोरम की ओर से कार्यक्रम में CA विकास जैन, चंद्रकांत लुंकड, हर्ष बैद, उत्तम संख्लेचा, अमित बरडिया, ने भी उपथित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल और लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर किया उन्हें नमन
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के लोकभवन आगमन पर उनका आत्मीय स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और ओम बिड़ला ने लोकभवन में वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
लोक भवन में उपस्थित विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना एवं लोक भवन के अन्य अधिकारियों कर्मचारियों ने भी रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धांजलि दी।
मानसून का माहौल बनने वाला है छत्तीसगढ़ में, अगले 5 दिनों तक बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार पंजाब से हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक समुद्र तल पर एक मौसमी द्रोणिका बनी हुई है। इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश से पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी विदर्भ और तेलंगाना होते हुए दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश तक समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक एक द्रोणिका सक्रिय है। वहीं पूर्वी विदर्भ और उससे लगे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं: रमेन डेका
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।