देश-विदेश
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी : महाराष्ट्र में सीएम फेस पर लगाएंगे मुहर
डेस्क | महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति को मिली बंपर जीत के बाद सीएम फेस के लिए चर्चा तेज है | इसी बीच सीएम फेस के लिए चल रहे नामों पर अंतिम मुहर लगानें की बड़ी जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को दी गई है | राजनाथ सिंह सीएम फेस पर मुहर लगाएंगे।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में सीएम के चहरे के लिए बिहार पैटर्न इस्तेमाल किया जाएगा | शिवसेना शिंदे गुट से सांसद नरेश म्हस्के ने यह दावा किया है कि बिहार पैटर्न के तर्ज पर महाराष्ट्र में सीएम तय होगा | बिहार में नितीश कुमार की तरह एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का सीएम बनाया जाएगा।
बता दें कि चुनाव परिणाम को आए दो दिन होने को है लेकिन प्रदेश का अगला सीएम कौन होगा, इस पर तस्वीर साफ नहीं हुई है। महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री की रेस में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे का नाम सबसे आगे है और इन दोनों के बीच में ही टक्कर है। राज्य में बीजेपी ने जिस तरह प्रदर्शन किया है और जितनी सीटें उसके पास है उससे फडणवीस का पलड़ा ज्यादा भारी नजर आ रहा है।
इधर फडणवीस कैंप वोटिंग के बाद से ही उन्हें सीएम बनवाने के लिए एक्टिव है। वहीं, दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे के समर्थकों का कहना है कि पहली पारी में शिंदे ने अच्छा काम किया है इसलिए उन्हें दूसरा मौका मिलना चाहिए।
बता दें कि महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने 89.26 फीसदी सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है। भाजपा ने 132 सीटें जीतकर अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। पार्टी अपने दम पर बहुमत से सिर्फ 13 सीटें कम है। सहयोगी शिवसेना की 57, एनसीपी (अजीत) की 41 व तीन छोटे सहयोगियों की चार सीटाें के साथ महायुति ने 288 में से 234 सीटों पर बंपर जीत हासिल की है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को झटका लगा, वह सिर्फ 50 सीटों पर सिमट गया।
प्रधानमंत्री ने एक पेड़ माँ के नाम पहल में सहयोग देने के लिए गुयाना के राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल का समर्थन करने के लिए गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली को धन्यवाद दिया। राष्ट्रपति अली ने एक्स पर पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
राष्ट्रपति अली के ट्वीट पर रिएक्ट करते हुए पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, आपके सहयोग को हमेशा संजोकर रखा जाएगा। मैंने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान इस बारे में बात की थी। उसी एपिसोड में गुयाना में भारतीय समुदाय की भी सराहना की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में गुयाना की अपनी हालिया यात्रा का एक उदाहरण साझा करते हुए कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अन्य देशों में भी फैल रहा है। उन्होंने बताया कि गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली और उनके परिवार ने भी इस कैंपेन में भाग लिया।
गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली ने एक्स पर एक पोस्ट में इस बारे में लिखा, मेरे मित्र नरेंद्र मोदी की गुयाना की हालिया यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल का समर्थन करना मेरे लिए सम्मान की बात थी।
रविवार को ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मैं अब आपके साथ देश की एक ऐसी उपलब्धि साझा करना चाहता हूं, जिसे सुनक आपको खुशी और गर्व होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, कुछ महीने पहले हमने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शुरू किया था। पूरे देश में लोगों ने इस अभियान में बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि इस अभियान ने 100 करोड़ पेड़ लगाने का महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। 100 करोड़ पेड़, वह भी सिर्फ पांच महीनों में।
पीएम मोदी ने इस उपलब्धि का श्रेय नागरिकों के अथक प्रयासों को दिया और बताया कि यह अभियान अब अन्य देशों में भी फैल रहा है।
शहीद पुलिसकर्मियों ने "देशभक्ति-जन सेवा के संदेश" ध्येय वाक्य को सचमुच जियाः मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कोरोना काल में जब इस बीमारी से अनजान बड़े-बड़े डॉक्टर्स ने अपने क्लीनिक बंद कर दिए थे, तब उन परिस्थितियों में भी पुलिस ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाला। कोरोना काल में ड्यूटी करते हुए 155 पुलिसकर्मी शहीद हुए। उन्होंने सच्चे मायने में "देशभक्ति-जन सेवा" के संदेश को जिया और कर्त्तव्य की बलिवेदी पर प्राण न्यौछावर कर दिये। मैं सैल्यूट करता हूँ, ऐसे जांबाज योद्धाओं को। पुलिस जितनी सजगता और कर्तव्य परायणता के साथ काम करती है, उससे, उनके प्रति सम्मान और आदर में ओर अधिक वृद्धि हो जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को भोपाल में अत्याधुनिक सर्व-सुविधायुक्त पुलिस चिकित्सालय 'स्वस्ति' के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैदानी पुलिसकर्मियों को अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण करने की दृष्टि से निर्मित डिजिटल एप ई-रक्षक और दिशा लर्निंग ऐप को भी लोकार्पित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लगभग साढ़े बारह करोड़ की लागत से बने इस अत्याधुनिक अस्पताल 'स्वस्ति' में सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पुलिस विभाग के वित्तीय प्रबंधन और अनुशासन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल को देखकर लगता है कि इसकी लागत और अधिक होनी चाहिए थी। कार्यक्रम के प्रारंभ में पुलिसकर्मियों की बेटियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का तिलक लगाकर स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुलिस बैंड के साथ हर्ष फायर कर सलामी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल का निरीक्षण कर विजिटर बुक में अपने विचार अंकित किए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने म.प्र. पुलिस के 40 हजार पुलिसकर्मियों को कोरोना काल में अदम्य साहस और सराहनीय कार्य के लिए कर्मवीर योद्धा पदक से सम्मानित करते हुए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांकेतिक रूप से 5 पुलिसकर्मियों को पदक एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए। कार्यवाहक निरीक्षक मुनेंद्र गौतम, उप निरीक्षक प्रियम्वदा सिंह, गुलजार सिंह मार्को, आरक्षक अजय पाल सिंह और आरक्षक निशांत छारी को पदक एवं प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना की सराहना करते हुए कहा कि विभाग का मुखिया ऐसा ही होना चाहिए है, जिस प्रकार से उन्होंने पुलिसकर्मियों के हित में स्वयं आगे होकर काम किए हैं।
पुलिस महानिदेशक ने "ई-रक्षक ऐप" के संबंध में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कॉन्फ्रेंस में अपने संबोधन में कहा था कि "इस इलेक्ट्रानिक युग में पुलिस को डंडे के बजाय डेटा से काम करने की आवश्यकता है।" उनकी मंशा अनुरूप एमपी ई-रक्षक ऐप के द्वारा पुलिसकर्मियों को आदतन अपराधियों की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाएगी। पुलिसकर्मी अपने ड्यूटी क्षेत्र में रहने वाले आदतन अपराधियों की जानकारी एक साथ देख सकेंगे। गश्त के दौरान संदिग्ध व्यक्ति के नाम को अपराधी के डेटाबेस में सर्च किया जा सकेगा। इसके साथ ही फेस रिकग्नाइजेशन मॉड्यूल के अंतर्गत आरोपी का फोटो अपलोड कर उसे संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ ही व्हीकल सर्च विंडो में जाकर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, ईंजन या चेसिस नंबर के द्वारा वाहन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। चोरी एवं जप्ती हुए वाहन की जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी। अन्य सुविधाओं से युक्त इस ऐप का भोपाल, इंदौर तथा अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से ट्रॉयल रन प्रारंभ किया गया है।
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी की नेपाल यात्रा संपन्न : यात्रा से रक्षा और द्विपक्षीय संबंध सुदृढ़ हुए
नई दिल्ली | थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी नेपाल की पांच दिवसीय सफल आधिकारिक यात्रा पूरी कर आज स्वदेश लौट आए। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग, सांस्कृतिक संबंध और परस्पर सम्मान और सुदृढ़ हुआ। यह क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और साझेदारी बढ़ाने के भारत और नेपाल की सेना की साझा प्रतिबद्धता दर्शाता है।
यात्रा के दौरान थल सेनाध्यक्ष ने नेपाल के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ व्यापक चर्चा की। नेपाल में उन्होंने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल, प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और रक्षा मंत्री मनबीर राय के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। नेपाली सेनाध्यक्ष जनरल अशोक राज सिगडेल और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ भी उनकी सार्थक चर्चा हुई। बातचीत में खुलेपन और परस्पर सम्मान का भाव रहा, जो द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बीर स्मारक पर श्रद्धांजलि: थल सेनाध्यक्ष ने एक भव्य समारोह में टुंडीखेल स्थित बीर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर नेपाल के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। बाद में नेपाली सेना मुख्यालय में उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।
नेपाली सेना के साथ रणनीतिक चर्चा: यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-नेपाल संबंधों को सुदृढ़ करना था। जनरल द्विवेदी ने नेपाल के सेनाध्यक्ष जनरल अशोक राज सिगडेल से मुलाकात की और परस्पर हित के विभिन्न पहलुओं तथा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग सुदृढ़ करने के उपायों पर चर्चा की। नेपाली सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) ने उन्हें सैन्य गतिविधियों से अवगत कराया। जनरल द्विवेदी की नेपाल के अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ भी उच्च स्तरीय चर्चा हुई। वार्ता में सैन्य संबंधों को बढ़ाने, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण सहयोग तथा क्षमता उन्नयन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे वैश्विक शांति और सुरक्षा की साझा प्रतिबद्धता को बल मिला। दोनों सेनाओं के बीच मैत्री प्रतीक के रूप में भारतीय सेना ने नेपाल की सेना को सुसज्जित अश्व तथा प्रहरी कुत्ते भेंट किए।
मानद जनरल रैंक के सम्मान से विभूषण: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी को नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने काठमांडू के शीतल निवास में नेपाली सेना के जनरल की मानद उपाधि से विभूषित किया। यह विशिष्ट परंपरा भारतीय और नेपाली सेनाओं के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती है।
सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध: थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दोनों देशों और सेनाओं के बीच विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को अनुभव किया। परस्पर संबंधों को सुदृढ़ करने के इनके महत्व को देखते हुए दोनों देशों की सेनाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भी चर्चा की गई।
सेनाध्यक्ष का शिवपुरी में आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में संबोधन: शिवपुरी में नेपाल आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में भावी सैन्य कर्मियों को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने “युद्ध के बदलते स्वरूप” पर व्याख्यान दिया। उन्होंने दोनों देशों की सेनाओं के सामर्थ्य बढ़ाने और क्षमतावर्धन के लिए आपसी जुड़ाव मजबूत और गहरा करने पर जोर दिया।
पूर्व सैनिकों के साथ संवाद: सेनाध्यक्ष जनरल द्विवेदी ने पोखरा के पेंशन भुगतान कार्यालय में पूर्व सैनिकों की एक रैली को संबोधित किया। पूर्व गोरखा सैनिकों और वीर नारियों के साथ संवाद में पूर्व गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना के बीच स्पष्ट और समृद्ध बंधन दिखा, जो सुदृढ़ संबंधों को दर्शाता है। सेनाध्यक्ष ने नागरिक समाज में पूर्व सैनिकों की भूमिका की सराहना करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान की चर्चा की। रैली के दौरान जम्मू-कश्मीर राइफल्स 18वीं बटालियन के सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन गोपाल बहादुर थापा (सेवानिवृत्त) के साथ उनकी बातचीत भावपूर्ण रही, जो उनकी अपनी इकाई के सूबेदार मेजर थे। इस संवाद से पूर्व सैनिकों के साथ उनके व्यक्तिगत और भावनात्मक संबंध परिलक्षित हुए। उनके कल्याण के प्रति भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता भी उन्होंने दोहराई, जिसमें पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के पैनलबद्ध अस्पतालों की संख्या में बढ़ोतरी के अलावा बुटाला और डुंगधी में एक-एक ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक स्थापित करने की घोषणा शामिल है। ये पहल पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति भारत सरकार और भारतीय सेना के संकल्प को दर्शाती है।
नेपाली सेनाध्यक्ष को भारत यात्रा का निमंत्रण: सेनाध्यक्ष जनरल द्विवेदी ने नेपाली सेनाध्यक्ष को भारत की यात्रा का औपचारिक निमंत्रण दिया, जिसका उद्देश्य मौजूदा यात्रा के परिणामों को और बढ़ाना है।
व्यापक चर्चा और परस्पर सम्मान से पूर्ण इस यात्रा ने भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच मजबूत साझेदारी और सुदृढ़ की है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अधिक ध्यान केन्द्रित होने के साथ सहयोग के एक नया युग आरंभ होने की संभावना है।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में अग्रणी है : गजेन्द्र सिंह शेखावत
केंद्रीय मंत्री ने विरासत के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि नागरिकों के दैनिक जीवन में न्यूनतम व्यवधान हों
राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ने अपना 14वां स्थापना दिवस मनाया
नई दिल्ली | केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस बात पर बल दिया है कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में एक अलग बढ़त प्रदान करती है, जहाँ प्रौद्योगिक, आर्थिक और रणनीतिक ताकतें अक्सर हावी रहती हैं। मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ये सांस्कृतिक शक्ति न केवल भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, बल्कि ये इसकी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान के साथ संरक्षित करने में भी सहायता करती है, जिससे राष्ट्र को एक नई पहचान मिलती है। इस प्रसंग में, उन्होंने विरासत संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया, ताकि नागरिकों के दैनिक जीवन में न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित हो सके। उन्होंने ये बात नई दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) के 14वें स्थापना दिवस समारोह में उद्घाटन भाषण देते समय कही। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक निकाय है।
शेखावत ने कहा कि पिछले 200 वर्षों से लेकर 2014 तक भारत की समृद्ध धरोहर को कमजोर करने का व्यवस्थित प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान भारतीयों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि उनकी कला, संस्कृति, वास्तुकला, विज्ञान और ज्ञान पश्चिमी परंपराओं से कमतर हैं।
मंत्री महोदय ने कहा, "पिछले 10 वर्षों में, हमारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, राष्ट्र के विकास और हमारी विरासत के संरक्षण दोनों को प्राथमिकता दी गई है। इसकी वजह से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मान्यता और सम्मान मिला है।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि राष्ट्र की प्रतिष्ठा बढ़ाने के साथ-साथ विरासत संरक्षण पर सरकार के नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के महत्व के प्रति लोगों की धारणा सकारात्मक रूप से बदल गई है।
समारोह के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री के साथ राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रोफेसर किशोर के. बासा, एनएमए के अन्य सदस्य, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इस आयोजन के दौरान, मंत्री महोदय ने एनएमए की वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 भी जारी की, जो संबंधित वर्ष के लिए प्राधिकरण की अनिवार्य गतिविधियों का व्यापक विहंगावलोकन प्रदान करती है। यह एनएमए द्वारा इस तरह का पहला प्रकाशन था। रिपोर्ट में बताया गया है कि, आज तक, एनएमए ने 55 हेरिटेज उपनियम (एचबीएल) बनाए है, जो संसद में 98 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों को कवर करता है । 57 से अधिक केंद्रीय संरक्षित स्मारकों को कवर करने वाले अतिरिक्त 53 एचबीएल को भी स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके अलावा, एनएमए केंद्रीय संरक्षित स्मारकों के आसपास निषिद्ध या विनियमित क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के लिए अनुमति दिये जाने की प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में अग्रणी रहा है।ये केंद्र सरकार की कारोबार करने में आसानी संबंधी पहल का हिस्सा है। इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति में से एक एनएमए ऑनलाइन आवेदन प्रोसेसिंग प्रणाली (एनओएपीएस) पोर्टल का कार्यान्वयन है। ये पोर्टल अपने एसएमएआरएसी मोबाइल ऐप के माध्यम से आईएसआरओ की अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को एकीकृत करता है, जो केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों के रंग-कोडित क्षेत्रीय मानचित्रों का उपयोग करता है, जो निर्माण गतिविधियों के कुशल प्रबंधन और निगरानी को सुगम बनाता है।
शेखावत ने माना कि एनएमए ने अपने चौदह वर्षों के संचालन में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्राधिकरण इन सफलताओं को और आगे बढ़ाता रहेगा, जो भारत की विरासत प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत करेगा। मंत्री महोदय ने इस बात पर जोर दिया कि एनएमए के प्रयासों ने एक मजबूत आधार तैयार किया है तथा निरंतर प्रगति करते हुए यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता : संयुक्त समिति की छठी बैठक नई दिल्ली में आयोजित
नई दिल्ली | 6वीं आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (एआईटीआईजीए) संयुक्त समिति और एआईटीआईजीए की समीक्षा पर चर्चा के लिए संबंधित बैठकें 15 से 22 नवंबर 2024 तक वाणिज्य भवन नई दिल्ली में आयोजित की गईं। एआईटीआईजीए संयुक्त समिति की 21 से 22 नवंबर 2024 तक 2 दिन की बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल और मलेशिया के निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव (व्यापार) मस्तूरा अहमद मुस्तफा ने की। सभी 10 आसियान देशों ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के प्रमुख और प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए।
एआईटीआईजीए संयुक्त समिति के अंतर्गत 8 उप-समितियाँ हैं, जो बाज़ार पहुँच, उत्पत्ति के नियम, एस पी एस उपाय, मानक और तकनीकी विनियमन, सीमा शुल्क प्रक्रिया, आर्थिक और तकनीकी सहयोग, व्यापार उपाय और कानूनी और संस्थागत प्रावधानों से संबंधित पहलुओं पर बातचीत करती हैं। वार्ता के दौरान सभी 8 उप-समितियों की बैठक हुई। इनमें से 5 उप-समितियाँ 6वीं एआईटीआईजीए संयुक्त समिति की बैठक के दौरान मौजूद रहीं।
एआईटीआईजीए समीक्षा वार्ता के इस दौर से पहले दो उच्च स्तरीय बैठकें वियनतियाने लाओस में हुई थीं। सितंबर 2024 में 21वीं आसियान-भारत आर्थिक मंत्रियों की बैठक और अक्टूबर 2024 में 21वीं आसियान-भारत शिखर बैठक । इन दोनों बैठकों के दौरान आर्थिक मंत्रियों और प्रधानमंत्रियों तथा नेताओं ने एआईटीआईजीए संयुक्त समिति से बातचीत में तेजी लाने और 2025 में समीक्षा के निष्कर्ष की दिशा में काम करने का आग्रह किया। चर्चा के दौरान उप-समितियों ने टेक्स्चूअल चर्चाओं में अच्छी प्रगति की है और टैरिफ वार्ता शुरू करने की दिशा में कुछ आधार भी शामिल किए गए हैं।
आसियान प्रतिनिधियों की नई दिल्ली यात्रा का उपयोग द्विपक्षीय व्यापार मुद्दों पर चर्चा के लिए थाईलैंड और इंडोनेशियाई टीमों के साथ द्विपक्षीय बैठकें आयोजित करके किया गया। भारतीय और आसियान मुख्य वार्ताकारों ने चर्चा के अंतर्गत मुद्दों और आगे आपसी समझ विकसित करने के लिए एक अलग बैठक भी की।
आसियान एक समूह के रूप में भारत के प्रमुख व्यापार भागीदारों में से एक है, जिसकी भारत के वैश्विक व्यापार में लगभग 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 121 अरब डॉलर था और अप्रैल-अक्टूबर 2024 के दौरान 5.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 73 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुँच गया। एआईटीआईजीए की समीक्षा आसियान क्षेत्र के साथ व्यापार को स्थायी तरीके से बढ़ाने की दिशा में एक कदम आगे होगी। एआईटीआईजीए संयुक्त समिति की अगली बैठक फरवरी 2025 में जकार्ता इंडोनेशिया में निर्धारित है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा : नेतृत्व प्राप्त करने से लेकर, भारत नेतृत्व करने की स्थिति में है
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एसीएसआईआर के 8वें दीक्षांत समारोह में चार प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया
एसीएसआईआर भारत में अपनी तरह का एकमात्र संस्थान है, जो क्रांतिकारी शैक्षणिक लचीलेपन के साथ एनईपी 2020 का उदाहरण प्रस्तुत करता है
वैश्विक सहयोग एसीएसआईआर की शैक्षणिक उत्कृष्टता और भारत की वैज्ञानिक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रमाणित करता है: डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां कहा कि नेतृत्व प्राप्त करने से लेकर, भारत आज विश्वभर में दूसरों का नेतृत्व करने की स्थिति में है और यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति, जैव प्रौद्योगिकी वैक्सीन में सफलता और सीएसआईआर बैंगनी क्रांति सहित हाल की सफलता की कहानियों से स्पष्ट होती है।
केंद्रीय मंत्री "वैज्ञानिक एवं नवीन अनुसंधान अकादमी" के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे, जो संभवतः भारत में अपनी तरह का एकमात्र आयोजन है।
इस अवसर पर, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने वैज्ञानिक और नवीन अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) के 8वें दीक्षांत समारोह के दौरान चार प्रसिद्ध वैज्ञानिकों - डॉ. रघुनाथ ए. माशेलकर, प्रो. समीर के. ब्रह्मचारी, प्रो. सुरेश भार्गव और डॉ. थिरुमालाचारी रामासामी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान को मान्यता देते हुए डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्रदान की।
पॉलीमर विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध हस्ती, डॉ. माशेलकर को उनके अग्रणी शोध और असाधारण नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया। जीनोमिक्स में अग्रणी के रूप में पहचाने जाने वाले, प्रो. ब्रह्मचारी को स्वास्थ्य और बीमारी में दोहराए जाने वाले डीएनए की भूमिका पर उनके काम के लिए सम्मानित किया गया। प्रो. भार्गव को रासायनिक विज्ञान और इंजीनियरिंग में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए यह सम्मान मिला। डॉ. रामासामी को क्रोमियम रसायन विज्ञान में उनके मौलिक शोध के लिए सराहना मिली, जिसने शैक्षणिक और औद्योगिक क्षेत्रों में नवीन उत्पादों और प्रक्रियाओं का मार्ग प्रशस्त किया है।
स्नातक करने वाले विद्वानों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतः विषयक शिक्षा को बढ़ावा देने, उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने और वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी रैंकिंग में भारत की उन्नति को बढ़ावा देने में एसीएसआईआर की भूमिका पर प्रकाश डाला। मंत्री ने संस्थान के भविष्यवादी शैक्षणिक दृष्टिकोण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत 2047" के सपने को प्राप्त करने की आधारशिला बताया।
मंत्री ने अपेक्षाकृत युवा संस्थान होने के बावजूद वैश्विक विश्वविद्यालयों में शीर्ष 3% में स्थान पाने के लिए एसीएसआईआर की सराहना की। उन्होंने इस सफलता का श्रेय इसके अभिनव मॉडल को दिया, जो इंजीनियरिंग, जैव विज्ञान और सूचना विज्ञान जैसे विविध विषयों को चिकित्सा अनुसंधान और कृषि जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ जोड़ता है।
उन्होंने कहा, "एसीएसआईआर सिर्फ एक अकादमिक संस्थान नहीं है; यह भारत में एक नई अकादमिक संस्कृति का पथप्रदर्शक है।" उन्होंने आगे कहा कि सीएसआईआर, आईसीएमआर और डीएसटी सहित 82 संस्थानों के साथ इसकी साझेदारी अनुसंधान और विकास में प्रभावी सहयोग का उदाहरण है।
मंत्री ने भारत की उभरती हुई स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने में एसीएसआईआर की भूमिका पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से इसके अभिनव एकीकृत पीएचडी (आईपीएचडी) कार्यक्रम के माध्यम से। उन्होंने कहा, "आईपीएचडी अनुसंधान यात्रा की शुरुआत से ही नवाचार, कल्पना और उद्योग को जोड़ता है, जिससे टिकाऊ स्टार्टअप सुनिश्चित होते हैं।" उन्होंने इन प्रयासों को वैश्विक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की जबरदस्त वृद्धि से जोड़ा, जो मोदी सरकार के तहत वैश्विक नवाचार सूचकांक में 81वें स्थान से 40वें स्थान पर पहुंच गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में सफलता की कहानियों पर भी प्रकाश डाला। भारत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या एकल अंक से बढ़कर 300 से अधिक हो गई है, जबकि जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अब लगभग 9,000 स्टार्टअप हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना की और सीएसआईआर की पहली महिला महानिदेशक की ऐतिहासिक नियुक्ति का उल्लेख किया। मंत्री ने कहा, "भारत की नारी शक्ति हमेशा से महान उपलब्धियों की नींव रही है, लेकिन अब इसे वह पहचान मिल रही है जिसकी यह हकदार है।"
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एसीएसआईआर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों को मूर्त रूप देता है, जो छात्रों को उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में अद्वितीय लचीलापन प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों द्वारा जैव प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र जैसे अपरंपरागत विषयों को संयोजित करने के किस्से साझा किए और इसे भारतीय शिक्षा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।
उन्होंने एसीएसआईआर के मिशन को सरकार की भविष्य की नीतियों से भी जोड़ा, जिसमें हाल ही में बायोई3 बायोटेक्नोलॉजी नीति और क्वांटम प्रौद्योगिकी में प्रगति शामिल है। उन्होंने कहा, "भारत अब वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपनाने में देरी नहीं करता; हम अब उनके विकास का नेतृत्व कर रहे हैं।"
एसीएसआईआर के पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय और एआईएसटी जापान जैसे विश्व-प्रसिद्ध संस्थानों के साथ सहयोग को इसकी अकादमिक उत्कृष्टता के मानदंड के रूप में रेखांकित किया गया। मंत्री ने कहा कि ये साझेदारियां भारतीय विज्ञान और शिक्षा की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रमाणित करती हैं।
एसीएसआईआर में दीक्षांत समारोह में भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता और ज्ञान-संचालित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई। नवाचार, उद्यमशीलता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मिलाकर, एसीएसआईआर जैसे संस्थान न केवल शिक्षा को बदल रहे हैं, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता बनने के लिए भारत के मार्ग को भी आकार दे रहे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह के संबोधन ने इस दृष्टि को रेखांकित करते हुए राष्ट्र की "विकसित भारत 2047" की महत्वाकांक्षा को मजबूती प्रदान की और स्थायी विकास और नवाचार के युग की शुरुआत करने पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद, सीएसआईआर के महानिदेशक एवं डीएसआईआर के सचिव प्रोफेसर एन. कलैसेलवी, आईसीएमआर के महानिदेशक एवं डीएचआर के सचिव प्रोफेसर राजीव बहल तथा एसीएसआईआर के कुलाधिपति प्रोफेसर पी. बलराम सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया, जिन्होंने समारोह की अध्यक्षता की।
पर्यटन मंत्रालय 26 से 29 नवंबर तक असम के काजीरंगा में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का आयोजन करेगा
नई दिल्ली | 12वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (आईटीएम) 26 से 29 नवंबर, 2024 तक काजीरंगा, असम में आयोजित किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को उजागर करना है। यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है, जो आठ पूर्वोत्तर राज्यों- असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के पर्यटन व्यवसायों और उद्यमियों को एक साथ लाता है, ताकि खरीदारों, विक्रेताओं, मीडिया, सरकारी एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग और बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके।
12वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट ऐसे क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा जो अपनी विविध स्थलाकृति, समृद्ध वनस्पतियों और जीवों, जीवंत जातीय समुदायों, प्राचीन परंपराओं, त्योहारों और प्रचुर कला और शिल्प के लिए प्रसिद्ध है। यूनेस्को स्थल, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और राजसी एक सींग वाले गैंडे का घर इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।
पर्यटन महानिदेशक मुग्धा सिन्हा ने यहां 12वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम में लगभग 400 प्रतिभागियों के भाग लेने की उम्मीद है, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू टूर ऑपरेटर, होटल व्यवसायी और होमस्टे मालिक, पर्यटन सेवा प्रदाता, भारत सरकार और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय छात्र आदि शामिल हैं।
महानिदेशक ने आगे बताया कि तीन दिवसीय मार्ट में कई तरह की गतिविधियाँ होंगी, जिनमें राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुतियाँ, बी2बी बैठकें, पैनल चर्चाएँ, खाद्य प्रदर्शन, सांस्कृतिक संध्याएँ, लाइव संगीत, उत्तर पूर्व बाज़ार और चराइदेव मोइदम (भारत का सबसे नया और 43वाँ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल), काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (राष्ट्रीय उद्यान के रूप में 50 वर्ष), हाथीकुली चाय बागान और आर्किड और जैव विविधता पार्क जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का तकनीकी दौरा शामिल है। इसमें उत्तर पूर्वी क्षेत्र में अध्ययन कर रहे अंतर्राष्ट्रीय छात्र और दुनिया भर के प्रभावशाली लोग भी शामिल होंगे, जो उन्हें क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान करेंगे।
इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि काजीरंगा अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट पर्यटन मंत्रालय की ट्रैवल फॉर लाइफ पहल के साथ जुड़कर स्थिरता के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता का उदाहरण होगा। महानिदेशक ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने, ऊर्जा-कुशल प्रथाओं को अपनाने और एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के उन्मूलन पर ध्यान केंद्रित करके किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मार्ट के दौरान परिवहन को समर्पित शटल सेवाओं के माध्यम से सुगम बनाया जाएगा, जो पर्यटन को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और एक स्थायी, सकारात्मक विरासत सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
जन कल्याण और कानून व्यवस्था की स्थिति आदर्श रहे, कलेक्टर, एसपी होंगे जिम्मेदार : मुख्यमंत्री
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में चाहे विकास का प्रश्न हो, शासन की प्राथमिकताओं के अनुसार कार्यों का क्रियान्वयन या कानून-व्यवस्था की बात हो, आदर्श स्थिति बनाए रखने का दायित्व कलेक्टर-एसपी का है। अपने जिले में सभी व्यवस्थाओं के लिए कलेक्टर्स और एसपी जिम्मेदार होंगे। जिन जिलों से अनियमितताओं की शिकायतें आएंगी, वहां बड़े अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जन-कल्याण की दृष्टि से जिलों के पुनर्गठन के लिए राज्य शासन ने आयोग गठित किया है। इसमें कलेक्टर और जन-प्रतिनिधि भी जरूरी सुझाव देकर सहयोग करें। आने वाले समय में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण, आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने जैसे निर्णय क्रियान्वित होंगे। इस दृष्टि से अनेक प्रशासनिक कार्यों का सह संबंध रहेगा। जिला स्तर पर भी जन-कल्याण के साथ प्रशासनिक सुधार प्राथमिक कार्य है। परीक्षाओं को देखते हुए निर्धारित ध्वनि से अधिक कोलाहल यंत्रों पर नियंत्रण, नशे का व्यापार करने वालों पर अंकुश, पराली जलाने पर रोक, किसानों के लिए खाद और उर्वरक के व्यवस्थित वितरण, राजस्व कार्यों के त्वरित निराकरण को मुस्तैदी से किया जाए। खाद की कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध सख्त कदम उठाए जाएं।
\मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कलेक्टर, कमिश्नर कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर्स ने जिलों में बेस्ट प्रैक्टिसेस की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि कार्य में ड्रोन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। ड्रोन के माध्यम से यूरिया के छिड़काव और खाद डालने से सामग्री की बचत भी संभव है। आवश्यकतानुसार किसानों को किराये पर ड्रोन उपलब्ध कराने, प्राकृतिक जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने, प्राकृतिक खेती विकास योजना के क्रियान्वयन और किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं।
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने आईएफएफआई 2024 में शानदार रेत कला श्रद्धांजलि का उद्घाटन किया
गोवा का मीरामार समुद्र तट सुदर्शन पटनायक की अद्भुत रेत कलाकृति का साक्षी
भारतीय सिनेमा और संगीत के दिग्गजों - अक्किनेनी नागेश्वर राव, तपन सिन्हा, मोहम्मद रफ़ी और राज कपूर को श्रद्धांजलि
खूबसूरत समुद्र तटों वाले गोवा में रेत कला प्रशिक्षण संस्थान शुरू करना चाहिए: पटनायक
नई दिल्ली | प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्म श्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने 55वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) समारोह के हिस्से के रूप में कल मीरामार बीच पर शानदार रेत कला की स्थापना की। गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने भारतीय सिनेमा और संगीत की चार महान हस्तियों अक्किनेनी नागेश्वर राव, तपन सिन्हा, मोहम्मद रफ़ी और राज कपूर को समर्पित रेत की मूर्ति का उद्घाटन किया।
डॉ. प्रमोद सावंत ने भारतीय सिनेमा के चार दिग्गजों को इतने रचनात्मक और कलात्मक तरीके से सम्मानित करने के लिए एनएफडीसी और श्री सुदर्शन पटनायक के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ. सावंत ने कहा, “यह मीरामार समुद्र तट पर बनाई गई सबसे बड़ी रेत की मूर्तियों में से एक है, और यह इन महान व्यक्तियों की विरासत का सुंदर प्रमाण है। मैं पटनायक और पूरी टीम को उनके उल्लेखनीय प्रयासों के लिए बधाई देता हूं।'' उन्होंने कहा कि मूर्तिकला अब जनता के देखने और सराहने के लिए खुली है।
मीरामार बीच की खूबसूरत पृष्ठभूमि पर बनी यह मूर्ति, सिनेमा के चार दिग्गजों के अमर योगदान को श्रद्धांजलि देती है। इनमें से प्रत्येक आइकन ने भारतीय फिल्म और संगीत उद्योग को आकार दिया, और यह रेत की मूर्ति उनके कालातीत प्रभाव के लिए हार्दिक श्रद्धांजलि है।
पटनायक ने कहा, "इस कलाकृति को पूरा करने में पूरे दो दिन लगे- एक दिन तैयारी के लिए और दूसरा जटिल नक्काशी के लिए।" पटनायक रेत कला में अपने अग्रणी योगदान के लिए विश्व स्तर पर पहचाने जाने वाले, विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने, अपने काम के माध्यम से शांति, सद्भाव और एकता को बढ़ावा देने के लिए अपनी कलात्मकता का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा, "मैंने पहले भी कान फिल्मोत्सव में अपनी रेत की मूर्ति प्रस्तुत की है लेकिन यह पहली बार है जब मुझे आईएफएफआई में आमंत्रित किया गया है।"
रेत कला के महत्व के बारे में सुदर्शन पटनायक ने रेत मूर्तिकला प्रशिक्षण का केंद्र बनने की गोवा की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "गोवा में, अपने खूबसूरत समुद्र तटों के साथ, समर्पित रेत कला प्रशिक्षण संस्थान होना चाहिए जहां स्थानीय कलाकार और छात्र रेत मूर्तिकला की जटिलताओं को सीख सकें। यह राज्य के सांस्कृतिक परिदृश्य के लिए बढ़िया अतिरिक्त आकर्षण होगा और दुनिया भर से गोवा आने वाले पर्यटकों को शामिल करने का शानदार तरीका होगा।"
गोवा और अपने गृह राज्य ओडिशा के अद्वितीय तटीय क्षेत्रों पर विचार करते हुए, पटनायक ने विभिन्न समुद्र तटों पर पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की रेत पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "हर समुद्र तट का अपना चरित्र और रेत का प्रकार होता है। लेकिन एक कलाकार के लिए, हर रेत एक जैसी होती है।"
पटनायक के काम ने उन्हें दुनिया भर में प्रशंसा दिलाई है, उन्होंने प्रतिष्ठित कान फिल्म महोत्सव सहित कई अंतरराष्ट्रीय रेत कला समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। आईएफएफआई में उनका नवीनतम काम न केवल भारतीय सिनेमा के दिग्गजों के लिए श्रद्धांजलि है, बल्कि कला और सिनेमा के मिश्रण को प्रदर्शित करते हुए त्योहार की समृद्ध सांस्कृतिक पेशकशों में उल्लेखनीय वृद्धि भी है।
मीरामार बीच पर रेत की मूर्ति अब जनता के लिए खुली है। इससे आईएफएफआई में उपस्थित लोगों और स्थानीय समुदाय को इस असाधारण कला का अनुभव और सराहना करने का मौका मिलेगा।
ग्वालियर में अत्याधुनिक संपीड़ित बायोगैस संयंत्र के साथ भारत की पहली आधुनिक, आत्मनिर्भर गौशाला
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2024 को ग्वालियर के नए 100 टीपीडी गोबर-आधारित संपीड़ित बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्र का उद्घाटन किया। यह प्रधानमंत्री के "अपशिष्ट से धन" दृष्टिकोण का उदाहरण है।
ग्वालियर के लालटिपारा में स्थित आदर्श गौशाला सीबीजी संयंत्र वाली सबसे बड़ी गौशाला है। ग्वालियर नगर निगम द्वारा संचालित इस गौशाला में 10,000 से अधिक मवेशी रहते हैं। आदर्श गौशाला अत्याधुनिक कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र वाली भारत की पहली आधुनिक, आत्मनिर्भर गौशाला है। यह मध्य प्रदेश का पहला सीबीजी संयंत्र है जिसमें घरों से मवेशियों के एकत्र किए गए गोबर तथा मंडियों में सब्जी और फलों के अपशिष्ट पदार्थों से बायोगैस तैयार की जाएगी।
जिला प्रशासन के अनुसार 5 एकड़ में फैली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के सहयोग से 31 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। गौशाला में लगाया गया यह सीबीजी संयंत्र गाय के गोबर को बायो सीएनजी (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) और जैविक खाद में बदल देता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए स्थायी विधियों को बढ़ावा मिलता है। यह संयंत्र 100 टन गोबर से रोजाना दो टन संपीड़ित बायोगैस उत्पन्न करेगा। इसके अतिरिक्त, यह रोजाना 10-15 टन सूखी जैविक खाद का उत्पादन करता है, जो जैविक खेती के लिए एक मूल्यवान उपोत्पाद है। तकनीकी रूप से उन्नत इस संयंत्र को दीर्घकालिक स्थिरता के लिए भी डिज़ाइन किया गया है। इस परियोजना में मुख्य संयंत्र के पास स्थित विंडरो कम्पोस्टिंग आगे की जैविक अपशिष्ट प्रक्रिया में मदद करेगी।
लालटिपारा गौशाला का यह सीबीजी संयंत्र समाज और सरकार के बीच सफल सहयोग का एक मॉडल और सतत विकास का विश्व स्तरीय मानदंड है। यह संयंत्र प्रतिदिन 2-3 टन बायो-सीएनजी का उत्पादन करता है, जो जीवाश्म ईंधन के लिए एक स्वच्छ, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प प्रदान करता है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है।
ऊर्जा के लिए गाय के गोबर का उपयोग कार्बन उत्सर्जन और जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम करने में मदद करता है। यह पहल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसरो और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है। यह हरित ऊर्जा और टिकाऊ विधियों में कौशल को भी बढ़ावा देती है।
स्थानीय किसानों को इस परियोजना से सीधे लाभ मिलेगा। जैविक खाद आसानी से किफायती दामों पर उपलब्ध होने के कारण, आस-पास के जिलों के किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
लालटिपारा गौशाला सीबीजी संयंत्र सिर्फ़ एक औद्योगिक सुविधा से कहीं अधिक है। यह स्थिरता के लिए एक ऐसे समग्र दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है जो पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी को आर्थिक और सामाजिक लाभों के साथ संतुलित करता है। भारत की यह पहली आत्मनिर्भर गौशाला अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल है।
महाराष्ट्र में महायुति बड़ी जीत की ओर
डेस्क | महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है | विधानसभा चुनाव के परिणामों के रुझानों में बीजेपी नीत महायुति 222 सीटों पर आगे हैं | वहीं महाविकास अघाड़ी 54 सीटों पर ही है | दूसरी ओर अन्य 10 सीटों पर आगे हैं।
महायुति में बीजेपी को 127, शिंदे सेना 56 और अजित पवार की एनसीपी 38 सीटों पर आगे है | दूसरी ओर एमवीए में कांग्रेस 18, शिवसेना यूबीटी 18 सीटों पर आगे थी।
ताजा रुझानो में मुबंई की 36 में से 21 पर महायुति, 15 पर एमवीए, पश्चिम महाराष्ट्र की 58 सीट में से 39 पर महायुति, 14 पर एमवीए आगे है।
ताजा रुझानों में मुबंई की उत्तर पश्चिमी महाराष्ट्र में 47 में से 34 सीटों पर महायुति, 08 पर कांग्रेस और अन्य 05 सीटों पर आगे है।
ठाणे-कोंकण की 39 सीटों की बात करें तो ठाणे-कोंकण में 26 सीटों पर महायुति, 09 सीटों पर मविआ और अन्य 04 सीटों पर आगे है।
मराठवाडा की 46 सीटों की बात करें तो यहां 34 पर महायुति, 09 पर कांग्रेस और अन्य 02 सीटों पर आगे है.
विदर्भ की 62 सीटों में 46 सीटों पर महायुति, 14 सीटों पर कांग्रेस और अन्य 02 सीटों से आगे है।
बता दें कि मतगणना की प्रक्रिया सुरक्षा ओं के बीच हो रही है. इस दौरान किसी भी राजनीतिक पार्टी को जुलुस निकालने या किसी भी तरह के प्रचार-प्रसार करने की अनुमति नहीं है।
अखिल भारतीय तटीय रक्षा अभ्यास - 'सी विजिल 24' का समापन
नई दिल्ली | पैन-इंडिया कोस्टल डिफेंस एक्सरसाइज सी विजिल 24 का चौथा संस्करण 21 नवंबर 2024 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 36 घंटों तक चले इस अभ्यास ने अपनी समुद्री सुरक्षा और तटीय रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। भारत की 11,098 किमी लंबी तटरेखा और 2.4 मिलियन वर्ग किमी के विशेष आर्थिक क्षेत्र में फैले सी विजिल 24 में छह मंत्रालयों की 21 से अधिक एजेंसियों की भागीदारी देखी गई। इनमें भारतीय नौसेना, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक, राज्य समुद्री पुलिस, सीमा शुल्क, बीएसएफ, सीआईएसएफ, बंदरगाह प्राधिकरण और मत्स्य पालन विभाग सहित अन्य शामिल थे।
दो दिनों के इस अभ्यास में विभिन्न समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की 550 से अधिक सर्फेस असेट्स की व्यापक तैनाती देखी गई और देश की संपूर्ण तटरेखा पर करीब 200 घंटे की उड़ान के साथ 60 हवाई उड़ानें भरी गईं।
सामरिक चरण की शुरुआत से पहले, सात दिनों की अवधि के लिए आयोजित, अभ्यास के तटीय रक्षा और सुरक्षा तैयारी मूल्यांकन (सीडीएसआरई) चरण में 950 से अधिक महत्वपूर्ण तटीय स्थानों का व्यापक ऑडिट देखा गया। ऑडिट में फिशिंग लैंडिंग सेंटर, लाइटहाउस, प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाह, तटीय पुलिस स्टेशन, अपतटीय संपत्ति, तटीय वीए/वीपी और अन्य शामिल थे। खासकर, पहली बार, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधिकारियों ने गुजरात और पश्चिम बंगाल में सीडीएसआरई गतिविधियों में भाग लिया।
सी विजिल 24 का उद्देश्य देश की तटीय रक्षा को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित है। ऑयल रिग्स, सिंगल पॉइंट मूरिंग्स (एसपीएम), केबल लैंडिंग स्टेशन, गैर-प्रमुख बंदरगाहों तथा तट के साथ परमाणु प्रतिष्ठानों जैसी महत्वपूर्ण समुद्री संपत्तियों की सुरक्षा बढ़ाना इस अभ्यास के दौरान प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक रहा है और इसी दिशा में कई पहल की गईं हैं। भारतीय वायु सेना ने अपतटीय बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए अपतटीय प्लेटफार्मों/ऑयल रिग्स पर वायु रक्षा प्रणालियों को तैनात किया है। व्यापारी जहाजों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया गया, जिसके तहत नकली अपहरण, नौसैनिक सहयोग और नौवहन के लिए मार्गदर्शन और भारतीय व्यापारी जहाजों के मार्ग में परिवर्तन किया गया। सभी राज्यों के मछली पकड़ने वाले समुदायों ने भी अभ्यास में सक्रिय रूप से भाग लिया और समुद्री बलों के साथ विभिन्न कर्तव्यों में उत्साहपूर्वक शामिल हुए।
इस अभ्यास में एक विस्तारित सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रम भी शामिल किया गया, जिसका मकसद युवाओं, खास तौर पर एनसीसी कैडेट, भारत स्काउट्स और गाइड्स और तटीय क्षेत्रों के छात्रों में समुद्री सुरक्षा के बारे में जमीनी स्तर पर जागरूकता को बढ़ावा देना था। नौसेना द्वारा एक मजबूत सुरक्षा-सचेत तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए यह पहल आयोजित की गई थी, जो देशों की तटीय रक्षा को मजबूत करेगी।
भारत की तटीय रक्षा स्थापत्य के एक प्रमुख घटक के रूप में, सी विजिल 24 ने अंतर-एजेंसी समन्वय का मूल्यांकन करने और भारत के तटीय सुरक्षा बुनियादी ढांचे में कमियों की पहचान करने के लिए एक अहम मंच के रूप में कार्य किया। इसमें भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच निर्बाध सहयोग ने उभरते समुद्री खतरों का मुकाबला करने के लिए उनकी तत्परता को साफ दर्शाया।
2018 में अपनी स्थापना के बाद से, सी विजिल ने भारत की तटीय रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वास्तविक समय के परिदृश्यों का अनुकरण करके, यह अभ्यास देश की समुद्री रक्षा क्षमताओं में मूल्यवान जानकारी प्रदान करता है। अभ्यास से सीखे गए सबक, तटीय रक्षा संरचना को मौजूदा स्थिति के लिए अधिक मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
सी विजिल 24 का सफल समापन, अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारत के दृढ़ संकल्प और 'समग्र समुद्री सुरक्षा' की अपनी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अंतर-एजेंसी सहयोग में वृद्धि, मजबूत तैयारियों और सक्रिय सामुदायिक जुड़ाव के साथ, यह अभ्यास उभरती सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ देश की तटीय रक्षा स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।
82 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया
नई दिल्ली | वर्ष 2022 और 2023 के असाधारण विजेताओं को सम्मानित करने के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार समारोह का उद्घाटन संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुणीश चावला; उमा नंदूरी, संयुक्त सचिव, संस्कृति मंत्रालय; संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष जोरावर सिंह जादव; संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा और संगीत नाटक अकादमी के सचिव राजू दास ने किया।
डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में 82 युवा कलाकारों को वर्ष 2022 और 2023 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुणीश चावला ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "यह देखकर खुशी हो रही है कि इस वर्ष के पुरस्कार विजेता भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो देश के हर कोने, हर क्षेत्र, हर राज्य और हर समुदाय की अनूठी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस पुरस्कार के माध्यम से, संगीत नाटक अकादमी और भारत सरकार ने प्रदर्शन कला में उनके असाधारण योगदान को मान्यता दी है।"
पुरस्कार समारोह के बारे में बोलते हुए, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने कहा, “यह देखना वास्तव में खुशी की बात है कि आज के युवा नर्तक किस तरह अपनी कला के प्रति इतनी लगन से समर्पित हो गए हैं। विकल्पों की प्रचुरता, वैश्वीकरण के प्रभाव और आधुनिक दुनिया की विकर्षणों के बावजूद, इन युवाओं ने आत्मविश्वास से अपना रास्ता चुना है। वे अपनी कला में महारत हासिल करने के लिए अथक प्रयास करते हैं और वह भावना आज यहां पुरस्कार विजेताओं में स्पष्ट झलकती है।"
पुरस्कार समारोह के बाद, 22 से 26 नवंबर, 2024 तक तीन अलग-अलग स्थानों - मेघदूत थिएटर कॉम्प्लेक्स, रवींद्र भवन, कोपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली; अभिमंच थिएटर, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, भावलपुर हाउस, नई दिल्ली और विवेकानंद ऑडिटोरियम, कथक केंद्र, चाणक्यपुरी में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के विजेताओं की प्रस्तुति के लिए प्रदर्शन कला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
संगीत नाटक अकादमी ने 40 वर्ष की आयु तक के युवा प्रदर्शन कला साधकों के लिए वर्ष 2006 में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के नाम पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार (यूबीकेयूपी) की स्थापना की। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार हर साल संगीत, नृत्य, नाटक, लोक और आदिवासी कला और कठपुतली के क्षेत्र में उत्कृष्ट युवा कलाकारों को दिल्ली और दिल्ली के बाहर आयोजित एक विशेष समारोह में दिया जाता है। युवा पुरस्कार के तहत 25,000/- रुपये (केवल पच्चीस हजार रुपये) की राशि, एक पट्टिका और एक अंगवस्त्रम प्रदान किया जाता है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार को शुरू करने के पीछे का उद्देश्य देश के संगीत, नृत्य, नाटक, लोक और आदिवासी कला रूपों और अन्य संबद्ध प्रदर्शन कला रूपों के क्षेत्र में युवा कलाकारों को प्रोत्साहित और प्रेरित करना था।
सिंहस्थ के पहले उज्जैन में बनकर तैयार होगा मेडिसिटी एवं चिकित्सा महाविद्यालय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के उज्जैन को मेडिसिटी एवं चिकित्सा महाविद्यालय की सौगात दी है। इसका गुरुवार को भूमिपूजन किया गया। सिंहस्थ के पहले यह महत्वाकांक्षी प्राजेक्ट तैयार हो जायेगा। इस नवीन व्यवस्था से महाकाल की निगरानी में अब हर मर्ज का ईलाज होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उज्जैन की मेडिसिटी दुनियाभर में जानी जायेगी। उज्जैन में हाईटेक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल डिवाईस पार्क भी विकसित होगा। एक ही परिसर में सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाईराईज बिल्डिंग बनाई जाएगी तथा एक-एक इंच भूमि का उपयोग किया जायेगा। परिसर में ही चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ आदि के लिए आवासीय व्यवस्था रहेगी।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश गठन के बाद वर्ष 2003-04 तक प्रदेश में कुल 05 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में 30 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनमें 17 सरकारी हैं और 13 निजी क्षेत्र के हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज सहकार के साथ व्यवस्थाएं बनाएंगे। अगले वर्ष 12 मेडिकल कॉलेज और तैयार हो रहे हैं। जिन चिकित्सालयों की क्षमता अधिक है वहां चिकित्सा शिक्षा की व्यवस्था करने की भी योजना है। प्रदेश में पहले चिकित्सा शिक्षा एवं लोक स्वास्थ्य अलग-अलग विभाग होते थे, जिन्हें अब एक कर दिया गया है। सरकार एक-एक पैसे का सदुपयोग कर आम जनता को सुविधाएं दे रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को उज्जैन में 592.30 करोड़ रूपये लागत से निर्मित होने वाली मेडिसिटी एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का भूमि-पूजन कर संबोधित कर रहे थे। भूमि-पूजन के दौरान वेदपाठी बाहृणों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेडिसिटी एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सिंहस्थ-2028 के पहले प्रारंभ होगा। उज्जैन में प्रायवेट सेक्टर के साथ मिलकर मेडिकल टूरिज्म की स्थापना भी की जाएगी। उज्जैन में प्रदेश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले सभी मरीजों का उपचार किया जायेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत निरामय योजना शुरू करने के बाद राज्य सरकार ने भी तीन महीने में ही गंभीर मरीजों को एयर लिफ्ट कर बड़े चिकित्सालयों में उपचार कराने की सुविधा शुरू की है। जिन स्थानों पर एयरपोर्ट या हवाई पट्टी नहीं है वहां हेलीकॉप्टर से एयर लिफ्ट कर मरीजों को उपचार की सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 5000 विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा प्रदान की जा रही है, जो आने वाले समय में 10 हजार हो जायेगी। साथ ही प्रदेश में आयुर्वेद के 5 मेडिकल कॉलेज शुरू कर रहे हैं। उज्जैन के आयुर्वेदिक धनवंतरी महाविद्यालय को सर्वसुविधायुक्त एम्स की तरह बनाया जायेगा, इसकी प्रक्रिया चल रही है। साथ ही उज्जैन में हौम्योपैथी महाविद्यालय भी शुरू कर रहे हैं।
योजना के परिणामों का मैदानी स्तर पर हो मूल्यांकन- राज्यपाल पटेल
डेस्क। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि व्यक्तिगत और सामुदायिक योजना के परिणामों का मूल्यांकन मैदानी स्तर पर किया जाए। वंचित और छूट रहें व्यक्तियों और क्षेत्रों तक विकास की योजनाओं की पहुँच को सफलता का पैमाना माना जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजना को पहुँचाने के प्रयास किए जाने चाहिए। मॉनिटरिंग का भी यही लक्ष्य होना चाहिए।
राज्यपाल श्री पटेल आज जनजातीय प्रकोष्ठ के द्वारा संयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन दो सत्रों में किया गया था। प्रथम सत्र में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और आयुष विभाग की समीक्षा की गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार मौजूद थे। द्वितीय सत्र में जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं पर चर्चा की गई।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि स्क्रीनिंग के दौरान सिकल सेल प्रभावितों की अधिक संख्या वाले चिन्हित क्षेत्रों और 20 से 30 वर्ष की आयु समूह की स्क्रीनिंग के कार्य को व्यापकता प्रदान की जाए। जांच का कार्य तेज गति से किया जाए। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व और प्रसव के 72 घन्टों के भीतर जांच हो। इस संबंध में विभाग द्वारा कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। चिन्हित वाहक और रोगियों को प्राथमिकता के साथ जेनेटिक कार्ड उपलब्ध हो। रोगी और वाहक को तत्काल उचित औषधि उपलब्ध हो। वाहक और रोगी नियमित रूप से औषधि लें। इसकी मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। मॉनिटरिंग के लिए सामुदायिक जन जागृति के प्रयास आवश्यक हैं। जरूरी है कि घर-घर जाकर इस संबंध में सीधा संपर्क और संवाद कायम किया जाए। उन्होंने मैदानी अमले का संवेदीकरण कर, उनके माध्यम से जन जागरण के प्रयासों के लिए निर्देश दिए है।
राज्यपाल श्री पटेल ने आयुष विभाग की चर्चा के दौरान कहा कि सिकल सेल रोग प्रबंधन और उपचार में होम्योपैथी, आयुर्वेद और योग की भूमिका के संबंध में विभाग द्वारा किए जा रहे अनुसंधान का तुलनात्मक परीक्षण भी कराया जाए। पॉयलट जिलों की सभी तहसील के वाहक और रोगी अध्ययन में सम्मलित हो। इसकी सुनिश्चितता की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों को व्यापकता प्रदान करने में आयुर्वेद की संभावनाएं बहुत प्रबल हैं। इस दिशा में विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
‘हिंदू एकता यात्रा’ पर निकले बाबा बागेश्वर, 9 दिन में पहुंचेगी ओरछा
डेस्क। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने लाखों अनुयायियों के साथ बागेश्वर धाम के बालाजी मंदिर में दर्शन के बाद 9 दिन की’हिंदू एकता यात्रा’ का शुभारंभ किया।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री यानी बाबा बागेश्वर का कहना है कि वह हिंदुओं को एकजुट करने के मकसद से यह यात्रा निकाल रहे हैं। उनका कहना है कि हिंदुओं के बीच-बीच मौजूद जाति भेदभाव, छुआछूत, अगड़े और पिछड़े का फर्क मिटाने का संदेश इस यात्रा से दिया जाएगा। वह 9 दिन तक पैदल चलते हुए लोगों के साथ ओरछा तक पहुंचेंगे। ओरछा धाम में 29 नवंबर को यात्रा संपन्न होगी।
यात्रा मध्य प्रदेश के अलावा यूपी के मऊरानीपुर जिले भी गुजरेगी। बागेश्वर धाम की ओर से बताया गया है कि यात्रा में देश-विदेश से लाखों लोग शामिल हो रहे हैं। हाथी, घोड़े और भव्य झांकी के साथ लाखों लोग यात्रा के साथ ओरछा तक पैदल यात्रा करेंगे।