देश-विदेश
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के दूसरे पर्वतारोहण अभियान ‘विजय’ के सफलतापूर्वक लौटने पर नई दिल्ली में स्वागत किया
केन्द्रीय गृह मंत्री ने आपदा प्रबंधन उपकरण और फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया, प्रदर्शनी में NDRF कर्मियों द्वारा अभियानों में प्रयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों को दर्शाया गया है
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अब आपदा प्रबंधन के लिए राहत-केन्द्रित अप्रोच नहीं बल्कि ज़ीरो कैजुअल्टी अप्रोच को अपनाया जा रहा है
डायल 112 हो, मौसम, दामिनी, मेघदूत इस तरह की मोबाइल एप्लीकेशन हो या अर्ली वार्निंग का सिस्टम हो... मोदी सरकार हर तरह से NDRF को वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करवा रही है
विजय की आदत ही व्यक्ति और बल दोनों को महान बनाती है
देश ही नहीं बल्कि दुनिया में कहीं भी कोई आपदा आती है तो सभी लोग NDRF की तरफ देखते हैं
कितनी भी विपरीत परिस्थिति हो NDRF की ड्रेस में अगर जवान वहाँ पर खड़ा है तो, आपदा में फँसे लोगों का हौंसला अनेक गुना बढ़ा जाता है
नई दिल्ली | केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने NDRF के दूसरे पर्वतारोहण अभियान ‘विजय’ के 21625 फुट ऊंचे माउंट मणिरंग पर सफल पर्वतारोहण से लौटने पर आज नई दिल्ली में स्वागत किया।
गृह मंत्री ने आपदा प्रबंधन उपकरण और फोटो प्रदर्शनी का भ्रमण भी किया। इस प्रदर्शनी में NDRF कर्मियों द्वारा अभियानों में प्रयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकों को दर्शाया गया है। भारत और तुर्की में आपदा प्रबंधन अभियानों में शामिल रहे बचाव दलों के लीडर्स द्वारा गृह मंत्री को प्रदर्शनी के बारे में बताया गया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने बाढ़ के दौरान बचाव अभियान, भूस्खलन, ढांचों के मलबे में खोज एंव बचाव अभियान, कैमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल न्यूक्लियर रिस्पॉंस मैकेनिज़्म (CBRN), पर्वत बचाव अभियान, बोरवैल बचाव अभियान और तूफान प्रतिक्रिया आदि के बारे में विस्तार से जाना। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव और एनडीआरएफ के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
21625 फुट ऊँचे माउंट मणिरंग पर सफल अभियान के लिए NDRF के जवानों की सरहना करते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि इतनी ऊंचाई पर जाने के लिए अदम्य साहस दिखाने का फैसला करने वाले हमारे जवानों के ऐसे कठिन अभियानों से व्यक्ति और बल दोनों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कठिन अभियानों से लक्ष्य को सिद्ध करने, विजय प्राप्त करने और अकल्पनीय कठिनाइयों को पार कर लक्ष्य तक पहुंचने की आदत पड़ती है। शाह ने कहा कि विजय की आदत ही व्यक्ति और बल को महान बनाती है और ये व्यक्ति के जीवन में सत्मार्ग पर चलने, विजयी बनने और विश्वास में वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत होती है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज इस अभियान में कुछ जवानों ने सफलता प्राप्त की है लेकिन सही मायनों में यह पूरे NDRF की सफलता है। उन्होंने कहा कि इन जवानों ने सिर्फ मणिरंग पर्वत की ऊंचाई पर विजय प्राप्त नहीं की है, बल्कि पूरे बल के हौंसले को बढ़ाने का काम किया है। गृह मंत्री ने कहा कि पर्वतारोहण सिर्फ एक स्किल नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला है और इस कला को सिद्धहस्त करना पूरे जीवन के लिए एक शिक्षा बनता है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने अभियान ‘विजय’ में सफलता प्राप्त करने वाले 35 जवानों और NDRF के महानिदेशक को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी। शाह ने कहा कि इन जवानों द्वारा 21600 फुट से अधिक की ऊंचाई पर तिरंगा फहराना पूरे बल के लिए बहुत बड़ी सिद्धि का परिचायक रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हमें सफलता के शिखर पर पहुंचना है तो जीवनभर सातत्यपूर्ण लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करना होता है, तभी सफलता मिलती है।
अमित शाह ने कहा कि एक ज़माने में भारत में आपदा को लेकर हमारा दृष्टिकोण सिर्फ राहत-केन्द्रित था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अब आपदा प्रबंधन के लिए राहत-केन्द्रित अप्रोच नहीं बल्कि ज़ीरो कैजुअल्टी अप्रोच को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने से संबंधित अप्रोच के मामले में ये हमारी बहुत बड़ी यात्रा रही है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 10 साल के कार्यकाल में आपदा से निपटने के लिए दुनियाभर की बेस्ट प्रैक्टिसिस को हमने भारत में ज़मीन पर उतारा है। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग, बल का हौंसला बढ़ाने, बल का गठन करने, बल की पर्याप्त संख्या, इतने बड़े देश में हर जगह बल के जवानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपदा के आंकलन के लिए अग्रिम सूचना के माध्यम से NDRF और NDMA का एक विजयी गठजोड़ बनाने का काम मोदी सरकार के इन 10 साल में हुआ है। उन्होंने कहा कि आज देश या दुनिया में कहीं भी कोई आपदा आती है तो सभी लोग NDRF की तरफ देखते हैं। शाह ने कहा कि एनडीआरएफ के जवानों को देखकर आपदा में फंसे लोगों का हौंसला कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस पर्वतारोहण अभियान में सफलता प्राप्त करने के लिए हमारे 35 जवानों ने पल-पल जागरूकता के साथ अपने आप को लक्ष्य के साथ जोड़ा है, उसी प्रकार हमारे बल को ज़ीरो कैजुअल्टी के लक्ष्य के साथ स्वयं को जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपलब्धि कभी संतुष्टि का कारण नहीं बनना चाहिए, बल्कि इसे और कठिन लक्ष्य तय करने का कारण बनना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि तुर्की हो या सीरिया, बिपॉरजॉय हो या मिचुआंग, रोपवे की घटना हो या पर्वतारोहियों को बचाना, सुरंग की घटना हो या जापान का ट्रिपल डिज़ास्टर या फिर नेपाल का भूकंप, जहां भी NDRF कर्मी गए हैं वहां एक अच्छी शुरूआत करके वापस लौटे हैं और ये पूरे देश के लिए बहुत ही गर्व की बात है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भविष्य़ में जलवायु परिवर्तन के कारण सभी जगह हिमस्खलन, भूस्खलन, बाढ़ और तूफान जैसे खतरे बढ़ने वाले हैं औऱ इसे ध्यान में रखते हुए हमें विज्ञान का सहारा लेकर ज़ीरो कैज़ुअल्टी के लक्ष्य की ओर दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अभी भी जंगल में लगने वाली आग जैसे कई क्षेत्रों में अपनी कार्यकुशलता को बढ़ाने के साथ ही परिणाम भी लाने हैं। गृह मंत्री ने कहा कि जंगल की आग के समय सिर्फ मानव जीवन बचाना हमारा एकमात्र उद्देश्य नहीं है, बल्कि जंगलों का बचाव कैसे हो और हम ऐसा क्या कर सकते हैं कि आग लगे ही नहीं, इसके लिए दुनियाभर में होने वाले प्रयोगों को ज़मीन पर उतारना पड़ेगा। शाह ने यह भी कहा कि बादल फटने से आने वाली बाढ़ के लिए हमें अपने आप को और अधिक तैयार करने की ज़रूरत है।
लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में टैंक अभ्यास के दौरान 5 जवान शहीद
लद्दाख में न्योमा-चुशुल क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास शनिवार तड़के एक टी-72 टैंक में नदी पार करते समय सेना के 5 जवान नदी में बह गए। नदी में डूबने से 5 जवान बलिदान हुए।
टैंक अभ्यास के दौरान 5 जवान शहीद, नदी पार करते समय अचानक बढ़ा जलस्तर..
डेस्क | लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में टैंक अभ्यास के दौरान 5 जवान शहीद हो गए। यह दुर्घटना शनिवार की सुबह करीब 1 बजे की है। दरअसल, यहा टैंक अभ्यास के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। जिसमें सेना के जवान फंस गए। इस हादसे में सेना के 5 जवान शहीद हो गए।
रक्षा अधिकारी ने बताया कि, लद्दाख में न्योमा-चुशुल क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास शनिवार तड़के एक टी-72 टैंक में नदी पार करते समय सेना के 5 जवान नदी में बह गए। नदी में डूबने से 5 जवान बलिदान हुए। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना मंदिर मोड़ के पास देर रात करीब 1 बजे अभ्यास के दौरान हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि टी-72 टैंक, जिसमें कई सैनिक सवार थे। जब वे नदी पार कर रहे थे तो अचानक आई बाढ़ के कारण डूब गए। जेसीओ सहित पांच जवानों की मौत हो गई। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। पांचों जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं। जो जवान बलिदान हुए हैं, उनकी पहचान कर ली गई है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लद्दाख हादसे पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि दुख के इस घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर लिखा, 'लद्दाख में नदी पार कराते समय हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में हमारे पांच बहादुर भारतीय सेना के जवानों की जान जाने से मुझे गहरा दुख हुआ है...शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है। दुख की इस घड़ी में राष्ट्र उनके साथ खड़ा है।'
आज से शुरू हुई : पवित्र अमरनाथ यात्रा
सनातन धर्म में अमरनाथ यात्रा पवित्र तीर्थस्थल है | इस यात्रा का समापन सावन पूर्णिमा को होता है | यात्रा में अधिक संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं |
नई दिल्ली | आज यानी 29 जून 2024 से अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हो गई है। सनातन धर्म में अमरनाथ यात्रा का बेहद खास महत्व बताया गया है। यह तीर्थ स्थान सबसे पवित्र माना जाता है। इस यात्रा में शिव भक्त अधिक संख्या में शामिल होते हैं। खराब मौसम होने के बाद भी श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिलता है।
धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति अमरनाथ गुफा में बने शिवलिंग के दर्शन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस यात्रा को करने से 23 तीर्थों का पुण्य की प्राप्ति होती है। पुराणों में जिक्र किया गया है कि काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य तीर्थ से हजार गुना अधिक पुण्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करने से मिलता है। यह भी मान्यता है कि यात्रा को करने से जातक को सभी रोगों और पापों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसलिए कठिन रास्तों के बाद शिव भक्त अमरनाथ यात्रा में शामिल होते हैं। यात्रा करने से श्रद्धालुओं को महादेव की कृपा प्राप्त होती है।
सभी जरूरी डॉक्यूमेंट अपने पास जरूर रखें। इस तरह होता है शिवलिंग का निर्माणसमुद्र तल से 3978 मीटर की ऊंचाई पर अमरनाथ गुफा में शिव जी की शिवलिंग स्थित है। पवित्र गुफा 90 फीट लंबी और 150 फीट ऊंची है। ऐसी मान्यता है कि गुफा में जल की बूंद टपकती है, जिसकी वजह से शिवलिंग बनता है। चंद्रमा के घटने बढ़ने के साथ बर्फ से बने शिवलिंग के आकार में परिवर्तन होता है और अमावस्या तक शिवलिंग धीरे-धीरे छोटा होता जाता है।
हर साल अमरनाथ की यात्रा की शुरुआत आषाढ़ माह से होती है, जिसका समापन रक्षाबंधन पर होती है। ऐसे में इस साल अमरनाथ यात्रा का आरंभ आज यानी 29 जून से हो गया है और 19 अगस्त को समाप्त होगी।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दश, ऋषि कश्यप और उनके पुत्र का वास कश्मीर घाटी में था। मान्यता है कि एक बार कश्मीर घाटी पूरी तरह से जलमग्न हो गई। इससे झील का रूप ले लिया। इसके पश्चात इसके पानी को ऋषि कश्यप ने कई नदियों के द्वारा बहा दिया। उस दौरान भृगु ऋषि हिमालय पर्वत की यात्रा के लिए वहां से निकले, तो घाटी में जल स्तर कम हुआ और उन्होंने सबसे पहले अमरनाथ यात्रा की पवित्र गुफा में विराजमान बर्फ के शिवलिंग को देखा। तभी से यह पवित्र जगह शिव जी की पूजा और यात्रा का देवस्थान बन गया। मान्यता है कि यहां पर देवों के देव महादेव ने तपस्या की थी।
'रद्द उड़ानों का पूरा रिफंड सुनिश्चित करने अथवा वैकल्पिक मार्ग का टिकट उपलब्ध कराने के लिए 24/7 वॉर रूम स्थापित किया जाएगा'
भारतीय नौसेना ने यूएच-3एच हेलीकॉप्टर को विदाई दी
सेवा जीवन के अंत में, एक यूएच-3एच को ‘भाग्य के शहर’, विशाखापत्तनम में प्रमुख स्थान पर स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जायेगा
नई दिल्ली | भारतीय नौसेना ने आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम में आयोजित एक डी-इंडक्शन समारोह के दौरान 17 वर्ष की शानदार सेवा के बाद यूएच-3एच हेलीकॉप्टर को विदाई दी। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्वी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने की। यूएच-3एच स्क्वाड्रन के अनुभवी अधिकारी और नाविक अपने परिवारों के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुये और हेलीकॉप्टर की महान सेवा को याद किया। यूएच-3एच हेलीकॉप्टर को ऑपरेशनल पावर और क्षमता को जारी रखने और इसे प्रदान करने के लिये आईएनएएस 350 में सी किंग 42सी हेलीकॉप्टर द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा।
यूएच-3एच हेलीकॉप्टर का डी-इंडक्शन समारोह एक उल्लेखनीय युग का अंत दर्शाता है, जिसने विशेष संचालन और खोज और बचाव (एसएआर) मिशनों में अभिनव क्षमताओं को पेश किया। लगातार विकसित और गतिशील समुद्री वातावरण में यूएच-3एच की परिचालन भूमिका भारतीय नौसेना विमानन के इतिहास में हमेशा अंकित रहेगी।
वर्ष 2007 में आईएनएच जलाश्व के साथ भारतीय तटों पर लाये गये यूएच-3एच हेलीकॉप्टर को 24 मार्च, 2009 को आईएनएच डेगा, विशाखापत्तनम में ‘सारस’ नाम से आईएनएएस 350 में शामिल किया गया था। इस प्रतिभाशाली हेलीकॉप्टर ने मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) संचालन, अपतटीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और विशेष अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इसकी उन्नत खोज और बचाव (एसएआर) क्षमताएं और रसद सहायता प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बहुत अहम थीं, जो प्राय: निराशा और राहत के बीच अंतर करती थीं और अनगिनत लोगों की जान बचाती थीं। शक्तिशाली ‘सारस’ स्क्वाड्रन के शिखर को ‘शक्ति, वीरता और दृढ़ता’ के आदर्श वाक्य के रूप में सुशोभित करता है। हेलीकॉप्टर ने अपनी प्रतिबद्धता को पूरी लगन से निभाया, सतर्क निगरानी बनाये रखी और अटूट समर्पण के साथ हमारे देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की।
सेवा जीवन के अंत में, एक यूएच-3एच को ‘भाग्य के शहर’, विशाखापत्तनम में प्रमुख स्थान पर स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जायेगा, जो भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। इस मौके पर चीफ ऑफ स्टाफ, पूर्वी नौसेना कमान समीर सक्सेना ने राज्य सरकार को एक स्मारक पट्टिका सौंपी। विमान के हस्तांतरण को चिह्नित करने के लिये पट्टिका को विशाखापत्तनम के संयुक्त कलेक्टर के. मयूर अशोक विशाखापत्तनम ने प्राप्त किया।
कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था के प्रति किसानों का विश्वास बरकरार रहे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में तुअर के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए। कोदो-कुटकी के रकबे को बढ़ाने से पानी-बिजली का उपयोग संतुलित होगा तथा फसल चक्र में भी सुधार होगा। अतः किसानों को कोदो-कुटकी की फसल लेने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। फसल चक्र पर ग्रीष्मकालीन फसल लेने के नकारात्मक प्रभाव से भी कृषकों को अवगत कराना जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक हितग्राही मूलक योजनाओं सहित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा कृषि विविधीकरण के लिए किया जा रहे प्रयासों पर मंत्रालय में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी मंडियों के तौल-काँटे, वित्तीय लेन-देन तथा अन्य व्यवस्था का आकस्मिक निरीक्षण करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों के हितों से कहीं भी खिलवाड़ ना हो और मंडी व्यवस्था के प्रति किसानों का विश्वास बरकरार रहे। कलेक्टर कृषि उपज मंडी के संचालन पर भी निगरानी रखें। कहीं पर भी कृषि उपज मंडी में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित सचिव जिम्मेदार होंगे, उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने वेयरहाउस निर्माण व उपयोग के प्रावधानों में किसानों के हितों को सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश, जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी और फसलों के विविध पैटर्न के साथ संपन्न है। हमारे किसान भाईयों की अथक मेहनत से प्रदेश कृषि विकास में सर्वोपरि है। हमारा प्रदेश दलहन व तिलहन के क्षेत्र तथा उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। किसानों की आय में वृद्धि करने तथा कृषि को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में हम निरंतर प्रयासरत हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक सीमांत, लघु कृषकों को लाभ मिले यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जाएं। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पौष्टिक श्रीअन्न का उत्पादन बढ़ाने और इसकी पैदावार करने वाले कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।
प्रधानमंत्री मोदी ने जनशक्ति पार्टी के सांसदों से मुलाकात की : चिराग पासवान के लिए कही ये बड़ी बात
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को NDA के प्रमुख घटक दल लोक जनशक्ति पार्टी के सांसदों से मुलाकात की। इस मौके पर पीएम ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने खुद को योग्य साबित किया है और वह अपने पिता के सपनों को पूरा कर रहे हैं। बता दें कि चिराग पासवान जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे हैं। समाजवादी नेता रामविलास पासवान ने जनशक्ति पार्टी का गठन किया था और उनके निधन के बाद पार्टी 2 धड़ों में विभाजित हो गई थी।
लोक जनशक्ति पार्टी के एक धड़े का नेतृत्व पूर्व केंद्रीय मंत्री व रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस कर रहे हैं, जबकि दूसरे धड़े का नेतृत्व चिराग पासवान के हाथों में है। दोनों ही धड़े NDA के सदस्य हैं। लोकसभा चुनाव के लिये सीट के बंटवारे को लेकर हुए समझौते के तहत BJP ने जनशक्ति पार्टी को 5 सीटें दी थीं, जबकि पशुपति पारस नीत पार्टी को एक भी सीट नहीं दिया था। बीजेपी पर अपनी पार्टी को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए पारस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
प्रधानमंत्री ने मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए ‘X’ पर लिखा, ‘रामविलास पासवान जी मेरे बहुत प्रिय मित्र थे, जिनकी बहुमूल्य अंतर्दृष्टि मुझे बहुत याद आती है। मुझे खुशी है कि चिराग पासवान ने खुद को योग्य साबित किया है और रामविलास जी के सपनों को पूरा कर रहे हैं। हमारी पार्टियां सार्वजनिक सेवा के लिए मजबूती से एक साथ हैं।’ संसद का सत्र शुरु होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगातार गठबंधन के सहयोगी दलों के सांसदों से मुलाकात कर रहे हैं। इससे पहले, गुरुवार को जनशक्ति पार्टी के सांसदों से मोदी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना की थी।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने दिल्ली एयर्पोर्ट के दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया
नई दिल्ली | दिल्ली एयर्पोर्ट के टर्मिनल 1 पर भारी बारिश के बीच छत का एक हिस्सा गिरने से इसमें एक कैब ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 8 घायल हैं | वही केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू ने जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, घायल हुए लोगों को 3-3 लाख रुपये देने की भी घोषणा की है |
केंद्रीय मंत्री ने कहा, हम इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं.नायडू ने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जिस इमारत का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया वह दूसरी तरफ है | जिसकी छत ढही वह पुरानी इमारत है, ये 2009 में खोली गई थी | उन्होंने कहा, भारी बारिश के कारण हवाई अड्डे के बाहर की छत का एक हिस्सा ढह गया है | हम इस दुखद घटना में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं, चार लोग घायल भी हुए हैं. हम उनकी देखभाल कर रहे हैं |
मंत्री ने कहा, “हमने तुरंत आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम, अग्नि सुरक्षा टीम और सीआईएसएफ और एनडीआरएफ टीमों को भेजा | हर कोई साइट पर उपलब्ध था और उन्होंने गहन निरीक्षण किया ताकि कोई अन्य हताहत न हो | फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है | टर्मिनल बिल्डिंग के बाकी हिस्से को बंद कर दिया गया है और हर चीज का गहनता से निरीक्षण किया जा रहा है ताकि यहां आगे कोई अप्रिय घटना न हो |
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अखिल भारतीय विद्युत सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया
इस वर्ष विद्युत सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का विषय था " सुरक्षा स्कूल से आरंभ होती है"।
छात्रों के लिए विद्युत सुरक्षा पुस्तिका" का विमोचन
नई दिल्ली | केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), विद्युत मंत्रालय ने नेशनल फेडरेशन ऑफ इंजीनियर्स फॉर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी (एनएफईईएस) के सहयोग से और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के समर्थन से विशेष रूप से स्कूली छात्रों के लिए डिजाइन किए गए अखिल भारतीय विद्युत सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसे “विद्युत सुरक्षा दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
उत्तरवर्ती सप्ताह को राष्ट्रीय विद्युत सुरक्षा सप्ताह (एनईएसडब्ल्यू) के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष विद्युत सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का विषय था " सुरक्षा स्कूल से आरंभ होती है"।
इस आयोजित कार्यक्रम में बिजली सीपीएसयू, जिला प्रशासन, एनपीटीआई, तेल विनिर्माण कंपनियों, टीपीडीडीएल, सीपीडब्ल्यूडी और अन्य हितधारकों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ-साथ दिल्ली के विभिन्न स्कूलों के 50 से अधिक छात्रों ने प्रतिभागिता की। अखिल भारतीय विद्युत सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम जनता के बीच सुरक्षा और जागरूकता की संस्कृति को प्रोत्साहन देने में अर्थपूर्ण है। साथ ही, हमारी युवा पीढ़ी को भी विद्युत अग्नि सुरक्षा के बारे में जागरूक करता है।
अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने कहा कि यह कार्यक्रम काफी समय से प्रतीक्षित था और आम जनता, विशेषकर छात्रों के बीच विद्युत सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण था। स्कूलों में विद्युत सुरक्षा ज्ञान और कार्यप्रणालियों की एक मजबूत आधारशिला रखते हुए, हम अपने युवाओं को निर्णय लेने और घर, स्कूल और उसके बाहर सुरक्षित वातावरण में योगदान हेतु सशक्त बनाते हैं।
इस आयोजित कार्यक्रम में, गणमान्य वरिष्ठ अधिकारी, सदस्य (योजना), सीईए, ए बालन, सदस्य (विद्युत प्रणाली), ए के राजपूत, प्रधान मुख्य अभियंता, सीईए, महिपाल सिंह, महानिदेशक, एनपीटीआई, डॉ. तृप्ता ठाकुर, सीईआई, सीईए, ऋषिका शरण, बीआईएस, ईटीडी प्रमुख, ए. के. महाराणा और सलाहकार-एनएफई और पूर्व सीईओ, एनएबीसीबी अनिल जौहरी, ने भी प्रतिभागियों को विद्युत सुरक्षा के महत्व पर संबोधित किया।
इस आयोजित कार्यक्रम में सीईए के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद के द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में “विद्युत सुरक्षा पुस्तिका” शीर्षक से पुस्तिका का विमोचन किया गया, जिसे नेशनल फेडरेशन ऑफ इंजीनियर्स फॉर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी (एनएफईईएस) द्वारा तैयार किया गया है। यह छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में कार्य कर सकती है। आधारभूत विद्युत सिद्धांतों को समझने से संभावित खतरों को जानने और उनके रोकथाम के लिए सर्वोत्तम कार्यशैलियों को कार्यरूप में लाने में, यह पुस्तिका सुलभ और सरल रूप से आवश्यक विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करती है।
किसी भी प्रकार की सुरक्षा स्कूल से आरंभ होती है | स्कूलों में विद्युत सुरक्षा ज्ञान और कार्यप्रणालियों की एक मजबूत आधारशिला रखते हुए खास कर बरसात के मौसम में, हम अपने युवाओं को निर्णय लेने और घर, स्कूल और उसके बाहर सुरक्षित वातावरण में योगदान हेतु सशक्त बनाते हैं।
सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने भारतीय सेना के डी5 मोटर साइकिल अभियान दल को झंडी दिखाई
यह अभियान भारतीय सेना द्वारा 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है
नई दिल्ली | सेना प्रमुख (सी. ओ. ए. एस.) जनरल मनोज पांडे ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से भारतीय सेना के डी5 मोटरसाइकिल अभियान दल को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान भारतीय सेना द्वारा 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। फ्लैग ऑफ कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सेना के उप प्रमुख, वरिष्ठ सेवारत अधिकारी, कारगिल युद्ध से जुड़े पूर्व अधिकारी, वीर नारियां और पूर्व सैनिक शामिल हुए। झंडी दिखाने से पहले, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने अभियान दल के सदस्यों के साथ परस्पर बातचीत की और टीम लीडर को मोटरसाइकिल अभियान का झंडा सौंपा। आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (एडब्ल्यूडब्ल्यूए) की अध्यक्ष अर्चना पांडे ने कार्यक्रम के दौरान वीर नारियों को सम्मानित किया।
यह अखिल भारतीय अभियान 12 जून, 2024 को देश के तीन कोनों-पूर्व में दिनजन, पश्चिम में द्वारका और दक्षिण में धनुषकोडी से आरंभ हुआ था। आठ मोटरसाइकिल सवार तीन टीमों ने दिल्ली पहुंचने से पहले विविध क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण मार्गों से गुजरते हुए यात्रा की। पूर्व सी. ओ. ए. एस. जनरल दीपक कपूर (सेवानिवृत्त) ने 26 जून, 2024 को दिल्ली कैंट में टीमों को झंडी दिखाई थी। जनरल दीपक कपूर ने कारगिल युद्ध के दिग्गजों की उनकी बहादुरी के लिए सराहना की, अभियान टीमों की प्रशंसा की और प्रायोजकों द्वारा दिए गए समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में सेवारत अधिकारियों, कारगिल युद्ध के दिग्गजों, वीर नारियों और परिवारों सहित लगभग 500 व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
दिल्ली के बाद अब टीमें द्रास के लिए दो अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ रही हैं। एक टीम अंबाला, अमृतसर, जम्मू, उधमपुर और श्रीनगर से होकर 1,085 किलोमीटर की दूरी तय करेगी है जबकि दूसरी टीम चंडीमंदिर, मनाली, सरचू, न्योमा, तांगत्से और लेह से होकर 1,509 किलोमीटर की दूरी तय करेगी है। इस अभियान का समापन द्रास के गन हिल पर होगा, जो कारगिल युद्ध के दौरान अपने सामरिक महत्व के लिए इतिहास में दर्ज है। अभियान दल के सदस्य अपने रूट के दौरान रास्ते में रहने वाले कारगिल युद्ध के नायकों, दिग्गजों और वीर नारियों से संपर्क करेंगे, युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, जागरूकता बढ़ाएंगे और युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
अभियान का नेतृत्व तोपखाना रेजिमेंट कर रही है जिसने ऑपरेशन विजय में सफलता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभियान दल के सदस्य जब द्रास में अपने गंतव्य की ओर पहुंच रहे होंगे, उनके साथ साहस, त्याग और देशभक्ति की कहानियां भी जुड़ चुकी होंगी।
यह अभियान दल कारगिल युद्ध नायकों की बहादुरी और बलिदान के प्रति एक श्रद्धांजलि है और भारतीय सेना की स्थायी भावना का प्रतीक भी है। इस कार्यक्रम को हीरो मोटोकॉर्प, एचपीसीएल, अपोलो हॉस्पिटल्स, इफको और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा कारगिल युद्ध के नायकों को श्रद्धांजलि देने के रूप में प्रायोजित किया जा रहा है।
‘निर्णय लेने के लिए डेटा उपयोग’ विषय के साथ 29 जून 2024 को “सांख्यिकी दिवस” मनाया जाएगा
नई दिल्ली | सांख्यिकी और आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में प्रोफेसर (दिवंगत) प्रशांत चंद्र महालनोबिस के उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में, भारत सरकार ने प्रत्येक वर्ष 29 जून को उनकी जयंती के अवसर पर इसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले विशेष दिवसों की श्रेणी में रखते हुए "सांख्यिकी दिवस" के रूप में नामित किया है। सांख्यिकी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य देश के विकास के लिए सामाजिक-आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण में सांख्यिकी की भूमिका और महत्व के संदर्भ में विशेष रूप से युवा पीढ़ी के बीच जन जागरूकता जगाना है।
2007 से, हर वर्ष समकालीन राष्ट्रीय महत्व के विषय के साथ सांख्यिकी दिवस का आयोजन किया जाता है। इस बार के सांख्यिकी दिवस, 2024 का विषय "निर्णय लेने के लिए डेटा का उपयोग" है। डेटा संचालित निर्णय लेने की अवधारणा किसी भी क्षेत्र में सूचित निर्णय लेने के लिए महत्वपूर्ण है और यह आधिकारिक सांख्यिकी से निकलने वाली सांख्यिकीय जानकारी की बेहतर समझ और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की सुविधा के लिए पूर्व-आवश्यकताओं में से एक है।
सांख्यिकी दिवस, 2024 का मुख्य कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली कैंट के मानेकशॉ सेंटर और नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष प्रो. राजीव लक्ष्मण करंदीकर और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग भी कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों आदि जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम को मंत्रालय के सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से वेब-कास्ट/लाइव स्ट्रीम भी किया जाएगा।
इस अवसर पर स्नातकोत्तर छात्रों के लिए 'ऑन द स्पॉट निबंध लेखन प्रतियोगिता, 2024' के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के दौरान सतत विकास लक्ष्य-राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा प्रगति रिपोर्ट, 2024 भी जारी की जाएगी। रिपोर्ट के साथ ही सतत विकास लक्ष्य-राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा, 2024 और सतत विकास लक्ष्य-राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा, 2024 पर डेटा स्नैपशॉट भी जारी किया जाएगा।
उपयोगकर्ताओं तक आधिकारिक सांख्यिकी के प्रभावी और कुशल प्रसार की आवश्यकता पर ध्यान देते हुए, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय आधिकारिक सांख्यिकी के लिए ई-सांख्यिकी नामक एक डेटा पोर्टल विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है, इसमें महत्वपूर्ण सूक्ष्म संकेतकों के समय श्रृंखला डेटा और मंत्रालय की डेटा परिसंपत्तियों की सूची भी होगी। इस कार्यक्रम के दौरान ई-सांख्यिकी पोर्टल और सेंट्रल डेटा रिपॉजिटरी का भी शुभारंभ किया जाएगा।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र के दौरान विशेषज्ञ/वक्ता विषय पर संक्षिप्त प्रस्तुतिकरण/संभाषण देंगे।
दिल्ली में बारिश ने सर्द लहजे के साथ दस्तक दी : तोड़ा 88 साल का रिकॉर्ड, सड़कें जलमग्न, कई जगहों पर टूटे पेड़ और डूबीं गाड़ियां
पिछले 24 घंटों में सफदरजंग बेस स्टेशन पर 228.1 मिमी बारिश दर्ज की गई
स्पाइसजेट और इंडिगो ने खराब मौसम का हवाला देते हुए उड़ानों के लिए सलाह जारी की
दिल्ली | चिलचिलाती गर्मी और गर्म हवाओं के मौसम के बाद जब बारिश ने सर्द लहजे के साथ दस्तक दी तो हर किसी के चेहरा खिल उठा। लेकिन शुक्रवार की सुबह से बरस रहे बादल राजधानी दिल्ली की व्यवस्थाओं के लिए हर बार की तरह आफत बनते दिख रहे हैं। शहर की सड़कों पर बहता पानी और रुकी हुई गाड़ियों ने सरकारी इंतिज़ाम की पोल खोल कर रख दी है। इतनी बारिश कि रिकॉर्ड तक कायम हो गया।
जानकारी ऐसी है कि 88 साल बाद जून के महीने ने इतनी बारिश देखी है। जब सुबह बारिश शुरू हुई तो खबर आई कि आईजीआई एयरपोर्ट पर छत का एक हिस्सा गिर गया। जिससे एक शख्स की मौत भी हो गई। आम लोगों को हो रही ऐसी दिक्कतों से जुड़ी खबरें कई और जगह से भी सामने आ रही हैं।
दिल्ली में कई जगह लंबा ट्रैफिक जाम है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में सफदरजंग बेस स्टेशन पर 228.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। सुबह 2.30 बजे से 5.30 बजे तक सफदरजंग स्टेशन पर 148.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
भारी बारिश के कारण दिल्ली में कई जगह जलभराव हो गया, कई रिहायशी कॉलोनियों में बिजली गुल हो गई है और इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। मेट्रो की गति भी काफी धीमी है।
स्पाइसजेट और इंडिगो ने खराब मौसम का हवाला देते हुए उड़ानों के लिए सलाह जारी की है। स्पाइसजेट ने एक्स पर एक पोस्ट में घोषणा की, “दिल्ली (डीईएल) में खराब मौसम के कारण सभी प्रस्थान/आगमन और उनकी परिणामी उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं।” नोएडा और गुरुग्राम के भी कई इलाकों में पानी भर गया है। इससे लोगों को सुबह ऑफिस जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा है। राजीव चौक इलाके में पानी भरने से कई गाड़ियां फंस गईं हैं।
छात्रवृत्ति से संबंधित लंबित प्रकरणों का तत्काल निराकरण करें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति से संबंधित विगत वर्ष के लंबित प्रकरणों का कार्य योजना बनाकर तत्काल निराकरण किया जाए। विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए छात्रवृत्ति में आवेदन के सत्यपान, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और छात्रवृत्ति वितरण की समय सीमा निर्धारित की जाए। जिला शिक्षा अधिकारी, जिला लोक सेवा प्रबंधक और लीड बैंक मैनेजर आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर जिला स्तर पर अभियान चलाए जिससे छात्रों को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने में समस्या न हो। इसके साथ ही छात्रवृत्ति प्राप्त कर रहे अपात्र विद्यार्थियों का परीक्षण शिक्षण संस्थावार किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाविद्यालय और शाला स्तर पर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरण की समीक्षा कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण आवश्यक है। अन्य राज्यों में जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए बनाई जा रही प्रक्रिया का अध्ययन कर सामान्य प्रशासन विभाग अन्य संबंधित विभागों की टॉस्क फोर्स बनाकर कर प्रकिया के सरलीकरण के लिए तत्काल कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी व्यवसायिक व प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुसूचित जाति जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी उपलब्धियाँ अर्जित करें, इस उद्देश्य से प्रभावी कार्य योजना बनाई बनाई जाए।
बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति के युवाओं की होमगार्ड तथा पुलिस में भर्ती को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। शिक्षा पोर्टल से 6 विभागों की 20 प्रकार की छात्रवृत्ति की स्वीकृति प्रदान की जाकर वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023-24 में 64 लाख विद्यार्थियों को लगभग 330 करोड़ की छात्रवृत्ति का वितरण किया गया। वर्ष 2024-25 में अब तक 92 लाख नामंकन हो चुके हैं।
रॉयल सऊदी नौसेना बल के प्रशिक्षु, प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) में शामिल हुए
नई दिल्ली | रॉयल सऊदी नेवल फोर्सेज (आरएसएनएफ) के किंग फहद नेवल अकादमी के 76 प्रशिक्षु 24 जून 2024 को दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन, (1टीएस) में शामिल हुए। यह प्रशिक्षुओं का दूसरा बैच है, जो प्रशिक्षु प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के साथ प्रशिक्षण लेगा। पहला बैच मई-जून 2023 में इसी तरह का प्रशिक्षण ले चुका है।
इस अवसर पर, प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के वरिष्ठ अधिकारी, कैप्टन अंशुल किशोर ने प्रशिक्षुओं का स्वागत किया और चार सप्ताह तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में मूलभूत नाविक गतिविधियों से लेकर बंदरगाह चरण के दौरान सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण तक शामिल है, जबकि समुद्री चरण-समुद्र में जीवन की बारीकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन पर केंद्रित है।
प्रशिक्षुओं को प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के पाल प्रशिक्षण जहाज पर पाल प्रशिक्षण से भी परिचित कराया जाएगा।
रॉयल सऊदी नेवल फोर्सेज (आरएसएनएफ) प्रशिक्षुओं का प्रशिक्षण 107 एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (आईओटीसी) के भारतीय नौसेना प्रशिक्षुओं के साथ आयोजित किया जा रहा है। इससे दोनों समुद्री देशों के प्रशिक्षुओं के बीच सौहार्द और आपसी समझ को बढ़ावा मिलता है। आरएसएनएफ के चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल फहद अब्दुल्ला एस.अल-घोफैली ने 24 जनवरी को भारत की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान दक्षिणी नौसेना कमान का दौरा किया था। दोनों नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय प्रशिक्षण सहयोग भारत और सऊदी अरब के बीच दीर्घकालिक मित्रता और साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
आसन पर फिर ओम बिरला : ध्वनिमत से लोकसभा स्पीकर चुने गए
नई दिल्ली | ओम बिरला दूसरी बार फिर से लोकसभा स्पीकर चुने गए हैं | बिरला को ध्वनिमत से 18वीं लोकसभा का नया स्पीकर चुना गया | जिसके बाद पीएम मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी उन्हें आसन तक लेकर पहुंचे |
ओम बिरला का ताल्लुक राजस्थान के कोटा से है | उन्होंने कोटा बूंदी लोकसभा सीट से तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीता है | बीजेपी से बागी होकर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजन को 41974 वोटों से शिकस्त देकर वह लगातार तीसरी बार संसद पहुंचे हैं | RSS का गढ़ माने जाने वाले कोटा के चुनावी मैदान में बीजेपी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर फिर से भरोसा जताया था | जो उन्होंने भी टूटने नहीं दिया | वह कोटा के इतिहास में वैद्य दाऊदयाल जोशी जी के बाद लगातार तीन बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले पहले नेता हैं |
ओम बिरला 2003 से अब तक कोई भी चुनाव हारे नहीं हैं | साल 2003 में उन्होंने कोटा से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी | साल 2008 में उन्होंने कोटा दक्षिण सीट से कांग्रेस नेता शांति धारीवाल को शिकस्त दी थी | साल 2013 में उन्होंने तीसरी बार कोटा दक्षिण सीट से चुनाव जीता था | लोकसभा चुनाव उन्होंने पहली बार साल 2014 में लड़ा और विजयी भी हुए | तब से लेकर अब तक यानी कि 2019 और 2024 में उन्होंने जीत का ही स्वाद चखा है हमेशा | साल 2019 में बीजेपी ने जब उनको स्पीकर बनाया, तो हर कोई हैरान रह गया | लंबा संसदीय अनुभव न होने के बाद भी ओम बिरला ने जिस तरह से सदन को चलाया, वह तारीफ-ए-काबिल रहा |
ओम बिरला का जन्म 23 नवंबर 1962 को राजस्थान के कोटा शहर में हुआ था | उनके पिता का नाम श्रीकृष्ण बिरला और माता का नाम शकुन्तला देवी था | 11 मार्च 1991 को उन्होंने डॉक्टर अमिता बिरला से शादी की | आकांक्षा और अंजलि बिरला नाम की उनकी दो बेटियां हैं उनकी | ओम बिरला की पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने साल 1986 में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से एम.कॉम. की डिग्री हासिल की थी |
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने एसबीएम-यू 2.0 के तहत ‘सफाई अपनाओ बीमारी भगाओ’ पहल शुरू की
इस पहल का उद्देश्य मानसून के मौसम के दौरान स्वच्छता और बीमारियों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए शहरी स्थानीय निकायों की तैयारी को बढ़ाना है
नई दिल्ली | मानसून आते ही साफ-सफाई और स्वच्छता संबंधी चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही जलजनित और वेक्टर जनित बीमारियां भी फैल जाती हैं। मानसून से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए सक्रिय उपायों के महत्व को पहचानते हुए, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के तहत सफाई अपनाओ, बीमारी भगाओ (एसएबीबी) 1 जुलाई से 31 अगस्त, 2024 तक चलने वाली पहल की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों की तैयारियों को बढ़ाना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे जून से अगस्त के महीनों के दौरान भारी बारिश के कारण स्वास्थ्य जोखिमों से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार रहें।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 'डायरिया रोको अभियान'- 'डायरिया की रोकथाम, सफ़ाई और ओआरएस से रखें अपना ध्यान' के अनुरूप इस पहल का उद्देश्य मानसून के मौसम में सफ़ाई और बीमारियों से जुड़ी बहुआयामी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच सहयोगात्मक प्रयास और अंतर-क्षेत्रीय तालमेल स्थापित करना है। यह समय की मांग है कि शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में सफ़ाई और स्वच्छता के बारे में विभिन्न पहलों के माध्यम से एक व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जाए।
सफाई अपनाओ, बीमारी भगाओ पहल में स्वच्छता, हिमायत और अंतर-विभागीय तालमेल पर ध्यान केंद्रित करने वाले व्यापक उपायों की आवश्यकता है, जिन्हें सभी शहरी स्थानीय निकायों द्वारा लागू किया जाना है। इस अभियान के प्रमुख तत्वों में विशेष सफाई अभियान, कचरे का संग्रह, परिवहन, सभी सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई, बच्चों के लिए स्वच्छता और साफ सफाई सुविधाएं, पानी की गुणवत्ता का पर्याप्त नमूनाकरण, सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति, जल कार्यों का रखरखाव, आईईसी और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने की योजना बनाना शामिल हैं। इस पहल में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने के लिए तेजी से आकलन करना, सुरक्षा रोकथाम उपचार रणनीति (पीपीटीएस) को अपनाना और समन्वय व निगरानी करना भी शामिल हैं।
आठ सप्ताह तक चलने वाली मानसून-पूर्व और मानसून के दौरान तैयारियों की गतिविधियों में डायरिया प्रबंधन पर विभिन्न कार्यक्रम शुरू करना, बेहतर स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए अभियान, स्थानीय समुदायों, संगठनों और सरकारी अधिकारियों को जल प्रबंधन, स्वच्छता और सफाई, जागरूकता के बारे में प्रशिक्षण, सभी स्वच्छता कर्मियों को सुविधाओं प्रदान करना तथा स्थानीय गैर सरकारी संगठनों, सामुदायिक समूहों और निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी करना शामिल होगा। सामुदायिक भागीदारी और जन जागरूकता, सामुदायिक जुड़ाव और शिक्षा, वर्षा जल संचयन, मानसून के बाद रखरखाव योजना और एकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
"अगले 5 वर्षों में भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग 70 प्रतिशत बढ़ जाएगी": केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
7.48 गीगावाट की स्थापित क्षमता 2029 तक 13.08 गीगावाट हो जाएगी: डॉ. सिंह
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए"
नई दिल्ली | केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां परमाणु ऊर्जा विभाग की 100 दिवसीय कार्य योजना की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक में कहा “भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता अगले पांच वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ जाएगी।”
यह केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग, डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा मोदी सरकार 3.0 में मंत्री के रूप में पुनः कार्यभार संभालने के बाद आयोजित पहली परमाणु ऊर्जा से संबंधित बैठक है।
ऊर्जा परिदृश्य में परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "7.48 गीगावॉट की स्थापित क्षमता 2029 तक 13.08 गीगावॉट हो जाएगी, जो 7 नए रिएक्टरों के जुड़ने से 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने पहले से चल रही परियोजनाओं का भी जायजा लिया और आगामी योजनाओं के लिए दिशा-निर्देश दिए।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विभाग को क्षमता निर्माण और ज्ञान, संसाधनों और विशेषज्ञता को साझा करके पूर्ण क्षमता का दोहन करने के लिए एकीकृत सहयोग करने का निर्देश दिया। मंत्री ने प्रौद्योगिकी के स्वदेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।" उन्होंने याद दिलाया कि इस सरकार ने, सहयोग के माध्यम से बजट में वृद्धि करके, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों का उपयोग और सहयोग में वृद्धि करके सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ संयुक्त उपक्रमों की अनुमति दी है। अनुसंधान में आसानी और गतिविधियों को बढ़ाने पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम आसान विज्ञान को बढ़ावा देने और परमाणु प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग द्वारा नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए एकल बिंदु अनुमोदन दे रहे हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि विभाग कैप्टिव परमाणु ऊर्जा उत्पादन में भारत लघु रिएक्टर (बीएसआर) का उपयोग करने के लिए 220 मेगावाट दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) को डिजाइन कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि डीएई कैलेंड्रिया को प्रेशर वेसल द्वारा प्रतिस्थापित करके हल्के जल-आधारित रिएक्टरों का उपयोग करने के लिए भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) 220 मेगावाट पर भी काम कर रहा है।
डॉ. जीतेंद्र सिंह के अनुसार, भाविनी सार्वजनिक क्षेत्र का एक उपक्रम प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की प्रारंभिक ईंधन लोडिंग को पूरा करने का काम प्रगति पर है और आने वाले महीनों में इसकी पहली क्रिटिकैलिटी की ओर बढ़ने की उम्मीद है। यह पहला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है जो अपनी खपत से ज़्यादा ईंधन का उत्पादन करता है।