केंद्रीय मंत्री जी. कृष्ण रेड्डी ने कोयला खदानों के तेज परिचालन पर दिया बल
नईदिल्ली। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. कृष्ण रेड्डी ने कंपनी के अपने उपयोग (कैप्टिव) और वाणिज्यिक कोयला ब्लॉकों के प्रबंधन की समीक्षा करने के लिए कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक की। मंत्री महोदय ने राज्य सरकार तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सहित सभी हितधारकों के बीच सघन समन्वय पर जोर दिया है, ताकि मुद्दों के शीघ्र समाधान को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मुद्दों के शीघ्र समाधान से आवंटित कोयला ब्लॉकों को कम से कम समय में चालू किया जा सकेगा।
आयात को कम करने के लिए कोयले के अधिक उत्पादन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदय ने निर्देश दिया कि राज्य स्तर पर आवश्यक संस्थागत सुदृढ़ीकरण का समर्थन किया जा सकता है। सभी कोयला ब्लॉक आबंटनों को नियमित आधार पर सुविधा प्रदान की जानी चाहिए, ताकि कोयला खदानों को जल्द से जल्द चालू किया जा सके।
कोयला मंत्रालय ने अब तक 575 एमटी की शीर्ष रेटेड क्षमता वाली 161 कोयला खदानों का आबंटन/नीलामी की है। इनमें से 58 खदानों को खदान खोलने की अनुमति मिल गई है और 54 खदानें परिचालन में हैं। पिछले वर्ष इन खदानों ने कुल 147 मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन किया है, जो देश के कुल कोयला उत्पादन का 15 प्रतिशत है।
मुख्य रूप से कैप्टिव/वाणिज्यिक कोयला के खनन में संलग्न बड़े आकार के उपभोक्ता हैं, जिनमें एनटीपीसी, पश्चिम बंगाल बिजली विकास निगम लिमिटेड (डब्ल्यूबीपीडीसीएल), पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (पीएसपीसीएल), कर्नाटक विद्युत निगम लिमिटेड (के. पी. सी. एल.), वेदांता, हिंडाल्को, अडानी आदि शामिल हैं। इसलिए, इन कंपनियों द्वारा अधिक उत्पादन से सी. आई. एल. से कोयले की मांग पर दबाव कम होगा, जिसका कोयले की नीलामी की कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। कैप्टिव/वाणिज्यिक कोयला ब्लॉकों से अधिक उत्पादन के साथ, नीलामी पर प्रीमियम कम हो जाएगा। इसलिए देश के विभिन्न उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध कराया जाएगा। इससे कोयले के महंगा होने पर लगाम लगेगी, क्योंकि कोयला न केवल बिजली के लिए बल्कि इस्पात, उर्वरक, एल्यूमीनियम, सीमेंट, कागज, स्पंज आयरन आदि सहित अन्य सभी क्षेत्रों के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है।
