शिक्षा-कैरियर-लाइफ स्टाइल
NTPC Recruitment 2024: शानदार सैलरी पैकेज की नौकरी, निकली एग्जीक्यूटिव के पद पर भर्ती
डेस्क। नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) लिमिटेड ने एक नोटिफिकेशन जारी कर एग्जीक्यूटिव के पद पर भर्ती निकाली है। जिनके लिए अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार भर्ती के लिए NTPC की आधिकारिक वेबसाइट ntpc.co.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भर्ती के अभियान के लिए रजिस्ट्रेशन करने की अंतिम तारीख 10 जून 2024 तय की गई है।
इस भर्ती अभियान के जरिए नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) में एग्जीक्यूटिव के 3 पद भरे जाएंगे। जिनके लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को इंजीनियरिंग पास होना जरूरी है।आइए जानते हैं कौन इस अभियान के लिए आवेदन कर सकता है।
आवश्यक योग्यता
आवेदक के पास बीई/ बीटेक की डिग्री किसी भी विषय में कम से कम 65 फीसदी नंबरों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से और एमबीए/पीजीडीएम (फाइनेंस/मार्केटिंग)। 65% अंकों के साथ बीई/बीटेक किए हुए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। वहीं भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (ICSI) के सदस्य/एसोसिएट, जिनके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से लॉ में डिग्री हो वे आवेदन कर सकेंगे। आवेदक के पास 2 से लेकर 4 साल का अनुभव भी होना चाहिए।
आयु सीमा
नोटिफिकेशन के अनुसार इस भर्ती अभियान (NTPC Recruitment 2024) के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 35 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
इतनी मिलेगी सैलरी
चयनित होने पर उम्मीदवारों को 90 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से वेतन मिलेगा।
आवेदन शुल्क
के पदों के लिए आवेदन करने वाले सामान्य, ओबीसी, EWS कैंडिडेट्स को 300 रुपये का शुल्क देना होगा। जबकि रिजर्व्ड कैटेगरी के उम्मीदवारों को शुल्क भुगतान से छूट दी गई है। अधिक जानकारी हासिल करने के लिए उम्मीदवार आधिकारिक साइट की मदद ले सकते हैं।
ऐसे करें आवेदन
चरण 1: आधिकारिक साइट https://careers.ntpc.co.in/recruitment/ पर जाएं।
चरण 2: होमपेज पर सम्बंधित लिंक पर क्लिक करें।
चरण 3 रजिस्ट्रेशन करें।
चरण 4: आवेदन पत्र भरें।
चरण 5: डाक्यूमेंट्स अपलोड करें।
चरण 6: आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
चरण 7: आवेदन फॉर्म सबमिट कर दें।
चरण 8: भरे हुए आवेदन पत्र को डाउनलोड करें।
चरण 9: लास्ट में आवेदन पत्र का प्रिंट निकाल लें।
गंभीर बीमारियो से बचना है तो : खड़े होकर पानी न पिये
शरीर और आपका हर अंग सुचारु रूप से काम करे इसलिए प्रतिदिन लगभग 2 से 3 लीटर पानी पीना ज़रूर पीना चाहिए।
खड़े होकर पानी पीना पड़ सकता है भारी, हो सकती है कई गंभीर बीमारियां |
डेस्क | मानव शरीर भी लगभग 70 प्रतिशत पानी से बना हुआ है। ज़िंदा रहने के लिए हम पूरी तरह से पानी पर ही निर्भर रहते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर लोग डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं। शरीर और आपका हर अंग सुचारु रूप से काम करे इसलिए प्रतिदिन लगभग 2 से 3 लीटर पानी पीना आवश्यक है | पानी पीने का भी एक सही तरीका होता है। जानकारी के अभाव में कई लोग खड़े ही खड़े गटागट पानी पीने लेते हैं। खड़े होकर पानी पीने से कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आया जा सकता हैं।
खड़े होकर पानी पीने से किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप किडनी के मरीज हैं तो खड़े होकर पानी बिल्कुल भी न पिएं।
अर्थराइटिस के मरीजों को खड़े होकर पानी बिलकुल नहीं पीना चाहिए ऐसा करने से जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है। खड़े होकर पानी पीने से शरीर में फ्लूइड की मात्रा बढ़ती है जिससे जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है।
खड़े होकर पानी पीने से शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम होने लगता है। इसकी वजह से फेफड़ों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
खड़े होकर पानी पीने से लोगों की पाचन क्रिया पर भी बुरा असर पड़ता है। खड़े होकर पानी पीने से पानी पेट में तेजी से जाता है जिस वजह से निचले हिस्से में चोट लगती है।
पानी हमेशा आराम से बैठकर ही पीना चाहिए। पानी को एक साथ पीने की बजाय थोड़ा थोड़ा लेकर पीना चाहिए। धीरे धीरे पानी पीने से शरीर का इलेक्ट्रोलाइल बैलेंस सही रहता है और शरीर को सभी जरूरी मिनरल्स मिलते हैं।
पेंशनभोगियों द्वारा अपने घरों से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की एक पूरी तरह से नई प्रक्रिया शुरू हुई : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
नई दिल्ली | कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में 78 लाख से अधिक पेंशनभोगी हैं, जिन्हें पेंशन पाते रहने के लिए हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है। पहले उन्हें भौतिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए बैंकों में जाना पड़ता था, जिसमें कई तरह की परेशानियां होती थीं।
ईपीएफओ ने 2015 में अपने पेंशनभोगियों का जीवन आसान बनाने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) को अपनाया। ईपीएफओ ईपीएस पेंशनभोगियों से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के आधार पर डीएलसी स्वीकार करता है। बायोमेट्रिक आधारित डीएलसी जमा करने के लिए पेंशनभोगी को किसी भी बैंक, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर या ईपीएफओ कार्यालय की शाखा में जाना पड़ता है क्योंकि वहां फिंगरप्रिंट/आँखों की पुतली पहचान की मशीन उपलब्ध है।
बुजुर्गों को बैंक/डाकघर आदि में शारीरिक रूप से जाने में होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए, एमईआईटीवाई और यूडीएआई ने फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (एफएटी) विकसित की है, जिसके तहत चेहरा पहचान तकनीक का इस्तेमाल जीवन प्रमाण पत्र के सबूत के लिए किया जा सकता है। ईपीएफओ ने जुलाई, 2022 में इस तकनीक को अपनाया। इससे पेंशनभोगियों द्वारा अपने घरों से डीएलसी जमा करने की एक पूरी तरह से नई प्रक्रिया शुरू हुई, और उनके लिए यह प्रक्रिया आसान और सस्ती हो गई। इससे बुजुर्ग किसी भी एंड्रॉइड आधारित स्मार्टफोन का उपयोग कर प्रक्रिया को पूरी कर सकते हैं और बुढ़ापे में बैंक, डाकघर आदि जाने की परेशानी से बच सकते हैं।
इस पद्धति से पेंशनभोगी की पहचान उनके घर बैठे ही स्मार्टफोन कैमरे का उपयोग करके चेहरे के स्कैन द्वारा की जा सकती है। यह प्रमाणीकरण के यूडीएआई फेस रेकग्निश्न ऐप का उपयोग करके यूडीएआई के आधार डेटाबेस से किया जाता है।
ईपीएफओ में इसकी शुरुआत के बाद से, 2022-23 में 2.1 लाख पेंशनभोगियों द्वारा फेशियल ऑथेंटिकेशन तकनीक आधारित डीएलसी जमा किए गए हैं, जो 2023-24 में बढ़कर 6.6 लाख हो गए, जो इस तकनीक के उपयोग में साल-दर-साल 200% की वृद्धि को दर्शाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि 2023-24 में 6.6 लाख एफएटी आधारित डीएलसी वर्ष के दौरान प्राप्त कुल डीएलसी का लगभग 10% है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान पेंशनभोगियों से कुल मिलाकर लगभग 60 लाख डीएलसी प्राप्त हुए थे।
चेहरे से पहचान की विधि के उपयोग के लिए अपने स्मार्टफोन में दो एप्लीकेशन, अर्थात "आधार फेस आरडी" और "जीवन प्रमाण" इंस्टॉल करने की आवश्यकता होती है। इन एप्लीकेशन के लिए ऑपरेटर प्रमाणीकरण आधार से जुड़े मोबाइल नंबरों के माध्यम से किया जाता है। सफल फेस स्कैन सुनिश्चित करने के लिए ऐप्स में विस्तृत दिशानिर्देश दिए गए हैं। स्कैन पूरा होने के बाद, जीवन प्रमाण आईडी और पीपीओ नंबर के साथ मोबाइल स्क्रीन पर डीएलसी सबमिशन की पुष्टि हो जाती है, जिससे घर बैठे ही यह प्रक्रिया सुविधाजनक तरीके से पूरी हो जाती है।
ईपीएस पेंशनभोगियों के डीएलसी के लिए इस अभिनव और सुविधाजनक तकनीक का उपयोग जुलाई, 2022 में ईपीएफओ के सॉफ्टवेयर में जोड़ा गया था। यह सुनिश्चित करने के लिए कि नई पद्धति अधिक से अधिक पेंशनभोगियों के बीच लोकप्रिय हो, सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को विस्तृत निर्देश जारी किए गए थे। इस प्रक्रिया को न केवल क्षेत्रीय कार्यालयों में, बल्कि जनवरी, 2023 से पूरे भारत के सभी जिलों में आयोजित किए जा रहे ‘निधि आपके निकट’ कार्यक्रम के दौरान भी पेंशनभोगियों को नियमित रूप से समझाया जाता है। इस तकनीक के उपयोग पर एक विस्तृत वीडियो ईपीएफओ के आधिकारिक यूट्यूब हैंडल @SOCIALEPFO पर उपलब्ध है।
ईपीएफओ को विश्वास है कि इस विधि की सुविधा से अधिक से अधिक पेंशनभोगियों का जीवन आसान हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने गुरुवार को सभी सरकारी स्कूलों में पालक - शिक्षक बैठक के लिए आवश्यक आदेश जारी किये
रायपुर | छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने गुरुवार को सभी सरकारी स्कूलों में पालक - शिक्षक बैठक के लिए आवश्यक आदेश जारी किये है। आगामी शिक्षा सत्र 2024 - 2025 में पहली बैठक संकुल स्तर पर 9 सितंबर 2024 को होगी। इसके बाद दूसरी बैठक विद्यालय स्तर पर तिमाही परीक्षा के 10 दिनो के अंदर ही की जाएगी। वहीं तीसरी बैठक स्कूल स्तर पर छहमाही परीक्षा के 10 दिनो के अंदर ही आयोजित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने इससे पहले भी पालक -शिक्षक बैठक के लिए आदेश जारी किये थे, लेकिन किसी कारन आदेश का पालन नहीं हो सका। अब फिर एक बार विभाग ने कलेक्टरों और संभागीय संयुक्त शिक्षा संचालकों को आदेश जारी किया है। अब देखने वाली बात ये होगी कि इस बार इस आदेश का पालन होता है या नहीं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' : अभियान का शुभारंभ किया
विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में पीपल का पेड़ लगाया
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का शुभारंभ किया। मोदी ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में एक पीपल का पेड़ लगाया। उन्होंने सभी देशवासियों से हमारे ग्रह को बेहतर बनाने में योगदान देने का भी अनुरोध किया है और कहा कि पिछले दशक में भारत ने कई सामूहिक प्रयास किए हैं, जिनसे पूरे देश के वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है। मोदी ने कहा कि सतत विकास की दिशा में हमारे प्रयासों के लिए यह बहुत अच्छा है।
"आज विश्व पर्यावरण दिवस पर, मुझे एक_पेड़_माँ_के_नाम, अभियान शुरू करने पर बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं देशवासियों के साथ ही दुनिया भर के लोगों से यह आग्रह करता हूं कि वे आने वाले दिनों में अपनी मां को श्रद्धांजलि अर्पित करने के रूप में एक पेड़ जरूर लगाएं और एक_पेड़_माँ_के_नाम का उपयोग करते हुए अपनी एक तस्वीर साझा करें।"
"आज प्रात:, मैंने प्रकृति मां की रक्षा करने और सतत जीवनशैली अपनाने की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप एक पेड़ लगाया। मैं आप सभी से यह आग्रह करता हूं कि आप भी हमारे ग्रह को बेहतर बनाने में योगदान दें।
“आप सभी को यह जानकर बहुत खुशी होगी कि पिछले दशक में भारत ने कई सामूहिक प्रयास किए हैं, जिनके कारण पूरे देश में वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है। यह सतत विकास की दिशा में हमारे प्रयास के लिए बहुत अच्छा है। यह भी सराहनीय है कि स्थानीय समुदायों ने इस अवसर पर आगे आकर इसमें अग्रणी भूमिका निभाई है।”
एनसीसी का दो दिवसीय ‘वार्षिक नीति संवाद शिविर’ नई दिल्ली में आयोजित
नई दिल्ली | राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का दो दिवसीय ‘वार्षिक नीति संवाद शिविर’ 04-05 जून, 2024 को नई दिल्ली में हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार के निर्देशों के अनुसार एनसीसी की चल रही विस्तार योजना की प्रगति की समीक्षा करना था। एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल गुरबीरपाल सिंह ने सम्मेलन का उद्घाटन किया और इसमें देश भर के एनसीसी निदेशालयों के अतिरिक्त महानिदेशक और उप महानिदेशक शामिल हुए।
सम्मेलन नई दिल्ली में करिअप्पा परेड ग्राउंड में डीजी एनसीसी कैंप के नव-पुनर्निर्मित प्रताप कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया था। हॉल का नाम 10वीं पंजाब बटालियन एनसीसी, गुरदासपुर के कैडेट सर्जेंट प्रताप सिंह के नाम पर रखा गया है। युद्ध के दौरान 13 सितंबर, 1965 को गुरदासपुर रेलवे स्टेशन पर अग्निशमन अभियानों के दौरान उनकी वीरता और निस्वार्थ कर्तव्य के लिए उन्हें अशोक चक्र क्लास-III से सम्मानित किया गया था।
भीषण गर्मी के बीच : आज विश्व पर्यावरण दिवस, आने वाली पीढ़ी को हम क्या देकर जायेंगे
डेस्क | पर्यावरण का अर्थ संपूर्ण प्रकृति से है जिसमें हम रहते हैं। इसमें हमारे चारों ओर के सभी जीवित और निर्जीव तत्व शामिल हैं, जैसे कि हवा, पानी, मिट्टी, जानवर, पेड़-पौधे और अन्य जीव-जंतु। हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। ये दिन इसलिए मनाया जाता है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को प्रकृति से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। साथ ही प्रकृति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी कोई ठोस कदम उठाया जा सके।
विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का फैसला 5 जून आज ही के दिन साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉकहोम सम्मेलन में लिया गया था। इस सम्मेलन का थीम पर्यावरण संरक्षण रखा गया था। इस दिन के बाद से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। पहली बार इस खास दिन को दिन 5 जून, 1974 को मनाया गया था। उस समय विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘एक पृथ्वी’ थी।
भारत सहित पूरी दुनिया प्रदूषण व गर्मी से जूझ रही है। चाहे वो वायु प्रदूषण, वायुमंडलीय प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण हो या फिर ई-वेस्ट से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण हो। हमारी पृथ्वी पर प्रदूषण से निपटने की सारी कोशिशें बेकार नजर आते जा रही हैं। इस वजह से हमारी पृथ्वी को काफी नुकसान हो रहा है। पृथ्वी को प्रदूषण से बचाने के लिए पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक किया जाता है और प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
इस बार विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम “Land Restoration, Desertification And Drought Resilience” रखी गई है। इस दिन को वन महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है।
सुख - दुख, धूप और छांव की तरह है : निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज
डेस्क | मनुष्य के जीवन में सुख और दुख धूप और छांव की तरह होते कोई संसार में सर्वथा दुखी नहीं होता और ना ही सुखी होता है | यह संसार एक जुआरी के समान है, वह जिंदगी भर सुखी नहीं रह सकता, अमीर नहीं रह सकता, एक न एक दिन फकीर जरूर होता है | इसी तरह व्यक्ति के जीवन में एक न एक दिन अशुभ कर्म का उदय आता ही है | लाख उपाय करने के बाद भी उसे रोका नहीं जा सकता, हम गलत नहीं करना चाहते किंतु हो जाता है | हम गलत नहीं बोलना चाहते परन्तु बोल देते हैं कोई व्यक्ति पूर्णता निर्दोष नहीं रह सकता |
संसार काजल की कोठीरी है कालीमा तो लगेगी ही। संसार की कालीमा को हटाना कोयला की कालीमा को हटाने जैसा ही है | कोयला को जितना भी धो दोगे वह उतना ही गंदा होता जाता है इसी तरह संसार को जितना साफ करो वह उतना ही गंदा होता जाता है | एक धर्मात्मा बनाने में अनेक अधर्मी पैदा हो जाते संसार में अच्छे पेड़ कम है, बुरे पेड़ ज्यादा है | साधना मार्ग से सीधे मोक्ष चले जाते वस्त्र पहनने की जरूरत नहीं होती | दिगंबर जन्म लेते और सीधे ही दिगंबर ही मोक्ष चले जाते कुंदकुंद भगवान ने 11 साल में दीक्षा ली, जबकि जिनसेन आचार्य ने 9 साल में दीक्षा ली उन्होंने जन्म से ही कपड़े नहीं पहने बच्चा जन्म से कपड़ा नहीं पहनता | उसे हम जबरदस्ती पहनाते हैं, जहां कपड़ा है, वह गंदा होगा | उसे साफ करने के लिए साबुन की जरूरत होगी | मन गंदा होने पर उसे पूजा पाठ अभिषेक के साथ, भक्ति की क्रिया करके साफ करने का प्रयास किया जाता है | जहां परिग्रह हुआ, वहां पाप प्रारंभ हो जाता है, उसके प्रक्षालन के लिए भक्तिवाद जरूरी है |
उपरोक्त विचार निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने दमोह में दिगंबर जैन धर्मशाला में चल रही अपनी प्रातः कालीन भक्तांबर की क्लास में अभिव्यक्त किये | इस मौके पर पद प्रक्षालन का सौभाग्य संतोष सिद्धार्थ सौरव सेठ परिवार को तथा शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य ताराचंद सचिन संदीप परिवार को प्राप्त हुआ | शिविर आयोजन समिति के द्वारा तहसीलदार मोहित जैन आर आई अभिषेक जैन एवं अन्य सहयोगियों का सम्मान किया गया।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव 12 से 14 जून तक आयोजित
आम की 150 से अधिक किस्मों एवं 56 व्यंजनों का प्रदर्शन किया जाएगा
रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, छत्तीसगढ़ शासन तथा प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 12, 13 एवं 14 जून को कृषि महाविद्यालय परिसर रायपुर में राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम की 150 से अधिक किस्मों एवं आम से बने 56 व्यंजनों का प्रदर्शन किया जायेगा। इस कार्यक्रम में आम की विभिन्न किस्मों की प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है जिसमें छत्तीसगढ़ एवं देश के विभिन्न राज्यों के आम उत्पादक शामिल होंगे। इस अवसर पर आम से बने विभिन्न व्यंजनों की प्रतियोगिता भी आयोजित होगी। इसके अतिरिक्त आम की सजावट प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है जिसमें विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थी, महिलाएं तथा अन्य सामान्यजन भी पंजीयन कर भागीदारी कर सकते है। इस प्रतियोगिता में पंजीयन एवं प्रवेश पूर्णतया निःशुल्क रहेगा। राष्ट्रीय आम महोत्सव में संस्थागत एवं व्यक्तिगत प्रतियोगी भी सहभागी हो सकते हैं।
आयोजन के प्रथम दिवस 12 जून को प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक प्रविष्टियों का पंजीयन किया जाएगा। इसके पश्चात सामान्यजनों के लिए प्रदर्शनी अवलोकनार्थ सायः 9 बजे तक खुली रहेगी। इस प्रदर्शनी में आम की विभिन्न किस्मों के फल, आम के विभिन्न उत्पाद एवं आम के पौधे भी सामान्यजनों हेतु विक्रय के लिए उपलब्ध रहेंगे। आयोजन के द्वितीय दिवस आम उगाने वाले कृषकों एवं जिज्ञासुओं के लिए 13 जून को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक तकनीकी मार्गदर्शन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ में उच्च गुणवत्ता के आम की विभिन्न किस्मों का उत्पादन, आम के विभिन्न उत्पाद एवं उनके विपणन के साथ ही आम उत्पादन हेतु छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की भी जानकारी प्रदान की जायेगी, जिससे नयी पीढ़ी के लोग आम उत्पादन की ओर बढ़ सके। आम उत्पादन को पर्यावरण के संरक्षण के साथ एक स्वास्थ्यवर्धक व्यवसाय के रूप में अपनाने की जानकारी आम लोगों को प्रदान की जा जाएगी।
राष्ट्रीय आम महोत्सव के अंतिम दिन प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ ही प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह का आयोजन भी किया जायेगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय फल ‘‘आम’’ जो कि आम जनता का प्रिय फल है उसकी समस्त सामान्य एवं खास किस्मों, विशिष्ट उत्पादों एवं भविष्य में अधिक उत्पादन के लिए रोजगार के साधनों की जानकारी सामान्य नागरिकों, महिलाओ, विद्यर्थियों, नव उद्यमियों एवं कृषकों को प्रदान करना है। राष्ट्रीय आम महोत्सव के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभागी न्यूनतम 10 आम प्रति किस्म के साथ भाग ले सकते हैं। इस अवसर पर आयोजित आम से बने विभिन्न व्यंजनों की प्रतियोगिता सामान्य जन न्यूनतम 250 ग्राम आम के उत्पाद को पंजीयन कर इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। इस आयोजन में पंजीयन एवं प्रवेश निशुल्क है अतः इस अवसर का लाभ प्राप्त करने हेतु सहभागी बन सकते है।
स्वास्थ्य विभाग ने 30 अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की है : आयुष्मान योजना में गड़बड़ी पर
रायपुर । स्वास्थ्य विभाग की नोडल एजेंसी ने प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना में अनियमितता बरतने पर प्रदेश के 30 अस्पतालों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। योजना में पंजीकृत दो अस्पतालों पर अर्थदंड और तीन माह के निलंबन की कार्रवाई भी की गई है।
प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को अस्पतालों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों के अलावा 553 निजी चिकित्सालय इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं। नोडल एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज के लिए भर्ती मरीजों से 104 आरोग्य सेवा के माध्यम से फीडबैक भी लिया जा रहा है।
मरीजों से अतिरिक्त राशि लिए जाने, इलाज में कोई शिकायत, अस्पताल में साफ-सफाई के साथ चिकित्सक तथा कर्मचारियों के व्यवहार आदि, की भी जानकारी मरीजों से ली जा रही है। फीडबैक में सामने आया है कि कुछ अस्पतालों ने मरीज को जनरल वार्ड में भर्ती कर आइसीयू के पैकेज रेट के अनुसार राशि ली है। ऐसे अस्पतालों पर जुर्माना तथा निलंबन की कार्रवाई हुई है।
राजनांदगांव, रायपुर, बिलासपुर, कोंडागांव, बिलाईगढ़, गरियाबंद, महासमुंद व दुर्ग के अस्पतालो पर कार्यवाही हुई है |
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने पीएटी, पीपीटी, प्री बीएबीएड और प्री बीएससी बीएड के एडमिट कार्ड जारी किये
रायपुर | छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने पीएटी, पीपीटी, प्री बीएबीएड और प्री बीएससी बीएड के एडमिट कार्ड जारी कर दिए है | प्रवेश परीक्षाएं 9 जून को आयोजित होनी है | सुबह की पाली में पीएटी और पीवीपीटी तथा दूसरी पाली में प्रीबीए बीएड और बीएससी बीएड के परीक्षाएं होंगी |
परीक्षार्थी प्रवेश पत्र व्यापमं की वेबसाइट से प्राप्त या डाउनलोड किया जा सकता हैं | छात्र-छात्राओं को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए लिंक भी भेजा जाएगा | परीक्षा में बैठने वालों छात्र-छात्राओं को कोई भी आईडी प्रूफ दिखाना अनिवार्य होगा |
परीक्षा हाल में फोटोयुक्त आईडी प्रूफ जैसे मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, पेन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड, विद्यालय का फोटोयुक्त परिचय पत्र ले जाना अनिवार्य है | इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले परीक्षार्थी व्यापमं की आधिकारी वेब साइट https://vyapam.cgstate.gov.in पर जा कर प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते है |
श्री महाकालेश्वर मंदिर भस्म आरती के लिए अब बुकिंग की नई व्यवस्था
भोपाल। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती की बुकिंग व्यवस्था को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया गया है, जिसके तहत नई व्यवस्था आज से लागू हो रही है। जानकारी के अनुसार नई व्यवस्था के तहत ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार श्री महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट पर एक जुलाई से 31 जुलाई तक के लिए नौ हजार 153 श्रद्धालुओं की भस्म आरती का आवेदन स्वीकृत किया गया है।
अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह की बुकिंग भी ओपन रहेगी। नई व्यवस्था के तहत अब श्रद्धालु पहले से ही अपनी भस्म आरती प्लान सकेंगे। जिसमें हर माह की एक तारीख को अगले माह की भस्म आरती की बुकिंग जारी कर दी जाएगी। उदाहरण के लिए एक जून को अगले जुलाई माह की बुकिंग जारी की गई है। साथ ही उसके आगामी 3 माह के लिए भस्म आरती की बुकिंग खुली रहेगी।
श्रद्धालुओं को अपनी भस्म आरती बुकिंग की जानकारी उनके द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर भेजी जायेगी, जिसके बाद उन्हें 24 घंटे के अंदर निर्धारित शुल्क जमा कर अपने पास जनरेट करने होंगे। 24 घंटे के अंदर पास नहीं जनरेट करने पर श्रद्धालु की रिक्वेस्ट कैंसल कर दी जाएगी और वेटिंग लिस्ट की मैरिट के आधार पर श्रद्धालु की रिक्वेस्ट स्वीकार की जाएगी।
श्रद्धालु अपनी भस्म आरती की बुकिंग के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट श्रीमहाकालेश्वर डॉट कॉम पर जाकर भस्म आरती के एडवांस बुकिंग के ऑप्शन पर क्लिक कर अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह के लिए अपनी भस्म आरती बुक कर सकते हैं। भस्म आरती की बुकिंग की पुरानी व्यवस्था, जिसमें 15 दिन पहले भस्म आरती बुक की जाती थी, इसे 15 जून तक पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा। इसके पहले पोर्टल खोलते ही 10 से 15 मिनट के अंतराल में भस्म आरती बुकिंग फुल हो जाती थी, जिससे श्रद्धालुओं को काफी असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालु अब अपनी भस्म आरती प्लान कर सकेंगे।
Health : सतर्क रहिये, ग्लूकोमा के लक्षण शुरुआती अवस्था में नजर नहीं आते.
डेस्क। ग्लूकोमा यानि कांच बिंदु देश में अंधत्व का सबसे बड़ा कारण है। यदि किसी व्यक्ति कि देखने की क्षमता कम हो रही है, आंखों में दर्द, सिरदर्द होना, कार्निया के आगे सफेद या धुंधलापन हो, आंखों की रोशनी कम होती जा रही है तो सावधान हो जाइए। यह ग्लूकोमा लक्षण हो सकते हैं। इस बीमारी में आंखों पर प्रेशर बढ़ जाता है।
प्रतिदिन स्वस्थ आंखों में एक द्रव्य बनता है जो बाहर निकलता जाता है। आंखों का प्रेशर बढ़ जाने से यह द्रव्य को सामान्य गति से बाहर निकलने में रुकावट होती है, जिससे आंखों पर दबाव बढ़ता है। खास बात यह है कि इस बीमारी के लक्षण शुरुआती अवस्था में सामने नहीं आते हैं। यही कारण है कि आंखों की नियमित जांच न कराने वाले व्यक्ति तब चिकित्सक के पास पहुंचते हैं जब ग्लूकोमा का खतरा बढ़ चुका होता है।
डॉक्टरों द्वारा सलाह दी जाती है कि, 40 वर्ष से अधिक आयु के लोग, लंबे समय तक स्टेराइड लेने वाले, शुगर से पीड़ित मरीज, व जिनकी आंख में चोट लगी हो उन्हें समय-समय पर आंखों की जांच कराना चाहिए। आँखों की बीमारी से पीड़ित लोगो को जागरूक होना चाहिए। ग्लूकोमा की गंभीर स्थिति में आंखों की रोशनी पूरी तरह जाने का खतरा रहता है। आमतौर पर 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनो को इस बीमारी का खतरा रहता है, वही किसी भी उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में ले सकता है। ग्लूकोमा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
शिक्षा मंत्रालय ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 2024 पर तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों के लिए कार्यान्वयन मैनुअल लॉन्च किया
नई दिल्ली | विश्व तंबाकू निषेध दिवस (डब्ल्यूएनटीडी) 2024 के अवसर पर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल), शिक्षा मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में सोसियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसायटी (सीड्स/एसईईडीएस) के सहयोग से तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों (टीओएफईआई) के लिए कार्यान्वयन मैनुअल को लॉन्च किया। इस वर्ष डब्ल्यूएनटीडी का विषय "बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना" है। हाल ही में लॉन्च किए गए मैनुअल को इस विषय वस्तु के अनुरूप तैयार किया गया है।
इस मैनुअल का उद्देश्य स्कूलों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए टीओएफईआई दिशा-निर्देशों का पालन करने में सहायता करना है, जिससे छात्रों के लिए एक स्वस्थ, तंबाकू मुक्त वातावरण तैयार हो सके। यह पहल सभी हितधारकों को उन दिशा-निर्देशों को अपनाने और लागू करने के लिहाज से सशक्त बनाएगी जो छात्रों को तंबाकू के खतरों से बचाते हैं।
कार्यक्रम से पहले, डीओएसईएल के सचिव संजय कुमार ने अपने संदेश में आग्रह किया कि सभी शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू के उपयोग को हतोत्साहित करने और शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त क्षेत्र बनाकर बच्चों को तंबाकू के उपयोग की लत से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

मैनुअल का अनावरण करते हुए डीओएसईएल, शिक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव आनंदराव वी. पाटिल ने न केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि नैतिक दायित्व के रूप में भी बच्चों को तंबाकू से बचाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक माहौल बनाने के साथ ही यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि तंबाकू का छात्रों पर हानिकारक प्रभाव न पड़े। उन्होंने तंबाकू के हानिकारक सेवन के कारण होने वाली मृत्यु दर पर प्रकाश डाला और हितधारकों को टीओएफईआई के लिए कार्यान्वयन मैनुअल को सक्रिय रूप से लागू किए जाने के लिए प्रोत्साहित किया।
डीओएसईएल की संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल ने इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों का स्वागत किया और छात्रों के बीच तंबाकू के उपयोग से निपटने के लिए सभी हितधारकों द्वारा सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (जीवाईटीएस), 2019 के अनुसार, 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5 प्रतिशत छात्र तंबाकू का सेवन करते हैं।
अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी गणमान्य व्यक्तियों ने तंबाकू के सेवन के खिलाफ शपथ ली, जो एक प्रकार से देश के युवाओं के लिए एक स्वस्थ, तंबाकू मुक्त भविष्य बनाने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय, स्वायत्त निकायों और राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस अवसर पर सीड्स के डॉ. राणा जे सिंह और दीपक मिश्रा भी मौजूद थे।
कार्यक्रम का समापन डीओएसईएल के निदेशक यू. पी. सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने टीओएफईआई के लिए कार्यान्वयन मैनुअल के सफल लॉन्च के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों, भागीदारों और प्रतिभागियों के समर्थन और योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान को 2024 का नेल्सन मंडेला पुरस्कार मिला
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने निमहांस को बधाई देते हुए कहा- "यह समावेशी स्वास्थ्य सेवा में भारत के प्रयासों को मान्यता है"
डब्ल्यूएचओ द्वारा 2019 में स्थापित नेल्सन मंडेला पुरस्कार स्वास्थ्य सेवाओं के प्रोत्साहन में सराहनीय योगदान करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों और/या सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों को मान्यता देता है
यह पुरस्कार मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण प्रोत्साहन के लिए निमहांस के समर्पण और उत्कृष्ट योगदान का प्रमाण है
निमहांस मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, अनुसंधान, शिक्षा व रोगी देखभाल के लिए अभिनव दृष्टिकोणों का समर्थन करता रहा है
नई दिल्ली | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय महत्व की संस्थान राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस), बेंगलुरु को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रोत्साहन के लिए 2024 के नेल्सन मंडेला पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 2019 में स्थापित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रोत्साहन के लिए नेल्सन मंडेला पुरस्कार, उन व्यक्तियों, संस्थानों और या सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों को मान्यता देता है जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रोत्साहन में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने निमहांस को यह पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह "समावेशी स्वास्थ्य सेवा में भारत के प्रयासों को मान्यता है।"
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत के प्रयासों और अग्रणी कार्य को मान्यता मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इस उपलब्धि के लिए निमहांस को बधाई दी।

निमहांस की निदेशक डॉ. प्रतिमा मूर्ति ने कहा, "हमें अपनी संस्थागत यात्रा के इस मोड़ पर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रोत्साहन के लिए प्रतिष्ठित नेल्सन मंडेला पुरस्कार प्राप्त करने पर बेहद गर्व है।" "यह पुरस्कार न केवल हमारी पिछली और वर्तमान उपलब्धियों की मान्यता है, बल्कि निमहांस की स्थापना के बाद से ही इसका मार्गदर्शन करने वाली स्थायी विरासत और दृष्टि को भी मान्यता है। यह मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के हमारे मिशन को जारी रखने के हमारे संकल्प को मजबूत बनाता है - जिससे हम जिन लोगों की सेवा करते हैं उनके जीवन में एक ठोस बदलाव ला सकते हैं।"
यह पुरस्कार मानसिक स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा देने के लिए निमहांस के समर्पण और उत्कृष्ट योगदान का प्रमाण है। निमहांस मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, अनुसंधान, शिक्षा और रोगी देखभाल के लिए अभिनव दृष्टिकोणों का समर्थन करता रहा है। यह विविध आबादी की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले अग्रणी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्रारंभ करने और लागू करने में सहायक रहा है। इसके प्रयासों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को सामान्य स्वास्थ्य देखभाल में एकीकृत करने, समुदाय-आधारित रणनीतियों को विकसित करने तथा डिजिटल स्वास्थ्य कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के विश्व स्तर पर मान्यता मिली है।
यह सम्मान निमहांस के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण समय पर आया है, क्योंकि संस्थान अपनी स्थापना के 50 वर्ष और अपने पूर्ववर्ती अखिल भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (एआईआईएमएच) की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। निमहांस की दोहरी उपलब्धि के प्रतीक के रूप में यह पुरस्कार विशेष महत्व रखता है, जो मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में संस्थान की समृद्ध विरासत व निरंतर विकास को दर्शाता है।
भारत ने हाल के दिनों में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। आज देश के लगभग सभी जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य इकाइयों को सहायता दी जा रही है। भारत की राष्ट्रीय टेली मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन, टेली मानस, जिसे 10 अक्टूबर 2022 को लॉन्च किया गया था, ने भी हाल ही में 10 लाख कॉल संभालने की उपलब्धि हासिल की है।
इस अवसर पर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपर सचिव हेकाली झिमोमी और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सिहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने महादेव घाट स्थित हटकेश्वरनाथ जी के दर्शन कर विशेष श्रृंगार किया
रायपुर | सिहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा ने महादेव घाट स्थित हटकेश्वरनाथ जी के दर्शन कर विशेष श्रृंगार किया | मशहूर कथावाचक सिहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा इन दिनों छत्तीसगढ़ के अमलेश्वर में हैं | कुरूद में शिवपुराण कथा करने के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा दुर्ग के अमलेश्वर में 26 मई से शिवपुराण कथा का वाचन कर रहे | दुर्ग में पंडित प्रदीप मिश्रा का कार्यक्रम चल रहा है भीषण गर्मी को देखते हुए कार्यक्रम स्थल में पानी की व्यवस्ता की गई है, साथ ही कार्यक्रम स्थल में भव्य पंडाल बनाया गया है।
अमलेश्वर में सीहोर वाले पं. प्रदीप मिश्रा कर रहे कथा के चौथे दिवस समर्पण भक्ति, विश्वास एवं अन्न के प्रभाव को लेकर अपनी कथा को विस्तार दिया। पं. प्रदीप मिश्रा ने शिव तत्व पर तीन समर्पण पत्र भी पड़ा। उन्होंने अपील करते हुए कहा की बहुत से लड़के मिलेंगे जो अपना नाम धर्म बदलकर बहलाएंगे। पैसे दिखाएंगे फिर बेटी उनके चंगुल में फंसी तो सूटकेस में शरीर के टुकड़े मिलेंगे। इसलिए बिटिया सब निर्णय खुद ले, लेकिन विवाह का निर्णय माता-पिता के ऊपर छोड़ दें। कोई भी माता-पिता अपने संतान के लिए अच्छे से अच्छा जीवनसाथी खोजता है। बेटियों का एक गलत निर्णय दो परिवार खराब कर देता है। पं. मिश्रा ने कहा कि जब जीवन मिला है तो परोपकार, पुण्य कर जीवन को संवारना चाहिए। किसी को धोखा नहीं देना चाहिये |
जिस घर का बच्चा शिव मंदिर की सीढ़ी चढ़ता है, उस घर का वृद्ध कभी वृद्धाश्रम के सीढ़ी नहीं चढ़ता। सावन में कुछ लोग ही पूजा करते थे। शिव की कितनी बेटी है, कोई नहीं जानता था। प्रत्येक महीने शिव रात्रि कोई नहीं जानता था। कांवर लेकर कोई कोई ही जाता था, पशुपतिनाथ का व्रत कोई नहीं जानता था। पर अब शिव की महिमा देखो, शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। । अब शिव युग आ गया है। घर के बच्चे भी घर से जल लेकर शिव मंदिर जा रहे हैं।प्रपंच से बचना है तो शिव भक्ति में लीन हो जाओ। मोबाइल के माध्यम से किसी से बात करते हैं तो सामने वाला नहीं दिखता लेकिन हम अपनी दिल की बात कह देते हैं, सामने वाला सुन् भी लेता है। उसी तरह शिवालय में एक लोटा जल लेकर चले जाएं, अपनी समस्या महादेव से कह दें। वे सुनेंगे जरूर, समस्या दूर करेंगे। पं. मिश्रा ने कहा कि जिस देवी देवता से आपका चित्त जुड़ जाए, उनका ध्यान पूरे समर्पण से करें, वे आपकी जरूर सुनेंगे।
चिंतन शिविर में हिस्सा लेने आईआईएम रायपुर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय: साथ में डिप्टी सीएम सहित पूरा कैबिनेट रहेगा मौजूद
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय चिंतन शिविर में हिस्सा लेने आईआईएम रायपुर पहुंचे। चिंतन शिविर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्य लेंगे भाग। आप सभी आईआईएम के विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव करेंगे साझा। इस दो दिनों में मंत्री विकसित छत्तीसगढ़ का दस वर्षों का विजन, सामाजिक स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों का कुशल उपयोग, खनन क्षेत्र में सुधार, संचार एवं मीडिया प्रबंधन, एग्रीकल्चर और सोशल सेक्टर की जानकारी भी लेंगे। कार्यक्रम में नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम समेत कई विद्वानों का उद्बोधन भी होगा।

राज्य सरकार के मंत्रियों के प्रशिक्षण के लिए होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत 31 मई को सुबह दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा भी शामिल होंगे। इसके बाद सबसे पहले विकसित छत्तीसगढ़ 10 वर्षों का विजन विषय पर नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
इसके उपरांत सुबह 11 से 11:40 तक सामाजिक क्षेत्र स्वास्थ्य विषय पर प्रोफेसर शेष राजेश चांदवानी आईआईएम अहमदाबाद अपनी बात रखेंगे। दोपहर 12 से 12:50 तक अधोसंरना विषय पर प्रो. अजय पांडेय, आईआईएम अहमदाबाद अपनी बात रखेंगे। दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक प्राकृतिक संसाधनों का कुशल उपयोग खनन क्षेत्र में सुधार विषय पर प्रो. शंकर राय आईएएस धनबाद, संजय लोहिया एडिशनल सचिव खान भारत सरकार अपने विचार व्यक्त करेंगे।