छत्तीसगढ़

92 वर्ष की उम्र में बूझ गया यहां शिक्षा दीप, अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा का पर्याय बने 92 वर्षीय राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक एडी दास (अमृत दास दास) का शनिवार को निधन हो गया। एडी दास के पढ़ाए विद्यार्थियों में से कई राजनेता बने, व्यापार के क्षेत्र में कई विद्यार्थी सफल हुए, कई विद्यार्थी बड़े-बड़े अधिकारी बने। आज बरसते पानी में भी उनके चाहने वाले सैकड़ों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
 
 
बालोद के शिकारीपाड़ा निवासी एडी दास ने शनिवार को सुबह अंतिम सांस ली। एडी दास का जीवन कई मायने में लोगों के लिए अनुकरणीय रहा है।  शिक्षक के रूप में शिक्षक की मर्यादा को सारा जीवन निभाते हुए वे शिक्षकों के लिए एक आदर्श थे। दूसरी ओर 92 वर्ष की उम्र तक वे अपना काम स्वयं करते थे। गरीब बच्चों के लिए अकिंचन छात्रावास खोलकर मानो उन्होंने जीवन भर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहने का प्रण कर लिया था 91 वर्ष तक लगातार डायरी लिखने का क्रम भी उन्होंने जारी रखा था। उनकी आलमारी में 200 से ज्यादा डायरियां रखी हुई है। जिनमें कई साल की यादगार घटनाएं दर्ज है। आदर्श शिक्षक के रूप में आयाम स्थापित करने के कारण ही उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया।
 
पूर्व प्राचार्य बीआर बेलसर ने बीते हुए पल को याद करते हुए बताया कि 1970 में मैं जिस छात्रावास में रह रहा था उसके वे अधीक्षक थे। उसके बाद जब मैं शिक्षक बन गया तो बीटीआई में जब प्रशिक्षण लेने आया तब भी उन्होंने मुझे प्रशिक्षण दिया। यानी जब मैं छात्र था तब वे मेरे गुरु थे और जब मैं शिक्षक बन गया तब भी वे मेरे गुरु थे।
 
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भिषम लाल ठाकुर (बीएल ठाकुर) ने बताया कि कक्षा नवमी में अध्ययन करने एडीडास के हॉस्टल में आया। यहां मैं उनके सानिध्य में 4 साल रहा। इस दौरान यह पाया कि शिक्षक एडीडास जी सभी बच्चों के लिए समान भावना रखते थे।