छत्तीसगढ़

एनआईटी रायपुर में छात्रों ने लिया नशामुक्त भारत का संकल्प

रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में नशा मुक्त भारत अभियान तथा मिशन ड्रग फ्री कैंपस के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। यह आयोजन 26 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस की पूर्व संध्या पर किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को नशे की लत के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना था।

इस सत्र का आयोजन एनसीसी के फैकल्टी इन-चार्ज डॉ. जितेन्द्र कुमार राउत एवं कमल सिंह मान के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डीन (स्टूडेंट वेलफेयर) डॉ. मनोज चोपकर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में एसोसिएट डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) डॉ. मीना मुर्मू, डॉ. सौम्या अग्रवाल सहित फैकल्टी सदस्य, स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, रायपुर के मनोचिकित्सा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. निशांत कुमार साहू ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।

अपने व्याख्यान में डॉ. साहू ने बताया कि नशे की शुरुआत आमतौर पर साथियों के दबाव, तनाव, चिंता और जानकारी के अभाव में होती है। उन्होंने शराब, गांजा, कोकीन, और हेरोइन जैसी नशीली वस्तुओं के दुष्परिणामों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि ऐसे पदार्थ व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुँचाते हैं।

डॉ. साहू ने बताया कि इन पदार्थों का सेवन न केवल स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, बल्कि दुर्घटनाओं, अपराधों और पारिवारिक विघटन जैसी सामाजिक समस्याओं को भी जन्म देता है। उन्होंने मारिजुआना के दीर्घकालिक प्रभावों, कोकीन के कारण होने वाली हृदय समस्याओं तथा शराब के सामाजिक परिणामों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नशे से बचाव के उपायों की चर्चा करते हुए छात्रों को सकारात्मक सोच अपनाने, आत्मविश्वास से ‘ना’ कहने, रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने और जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है।

सत्र के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर में छात्रों ने नशे से संबंधित मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक प्रभाव और समाधान के पहलुओं पर प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. साहू ने संतोषजनक उत्तर दिया।  यह जागरूकता कार्यक्रम न केवल जानकारीवर्धक रहा, बल्कि इससे छात्रों को एक स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज की दिशा में सोचने की प्रेरणा भी मिली।