छत्तीसगढ़

मत्स्य पालन से बनी मिसाल योगेश्वरी कश्यप

जांजगीर चांम्पा। मुख्यमंत्री  साय की मंशानुरूप युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। शासन की योजनाओं ने शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान किए हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर युवा न केवल अपना व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।ऐसी ही एक कहानी है जांजगीर-चाम्पा जिले विकास खंड नवागढ़ के ग्राम पंचायत पचेड़ा के निवासी -योगेश्वरी कश्यप, जिन्होंने मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है।

योगेश्वरी कश्यप,जांजगीर-चाम्पा जिले के छोटे से गांव पचेड़ा की रहने वाली है,घर पर ही खेती किसानी और अपने पति के कार्यों का सहयोग करती थी,उन्होंने स्वयं का मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर दूसरों को भी रोजगार देने की सोची। इसी दौरान उन्हें मछली पालन की जानकारी मिली तो उन्होंने अपनी जमीन पर मनरेगा द्वारा तालाब निर्माण के लिए आवेदन किया। शासन द्वारा मनरेगा से तलाब बनाया स्वीकृति दीं,और मनरेगा द्वारा तलाब निर्माण किया गया, अब योगेश्वरी कश्यप मछली पालन करके अच्छी आमदनी कमा रही साथ ही खुद आत्मनिर्भर बनके दुसरो क़ो रोजगार दे रही है,

योगेश्वरी कश्यप ने तालाब में फिंगरलिंग रोहू,पंगासिंस, कतला, मृगल, कॉमन कार्प,का मत्स्य बीज संचयन किया। आज उनका व्यवसाय फल-फूल रहा है और प्रति वर्ष 6+7टन मछली का उत्पादन करते है। जिसे थोक भाव में 120रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री करने पर उन्हें सालाना लगभग 10 से 11लाख रुपये की आय होती है। खर्च निकालने के बाद भी उन्हें 7 से 8 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। इसके अलावा, उनके इस काम में 15से 20लोगों को स्थायी रोजगार भी मिला है।
 

जिससे उनका परिवार चल रहा है। योगेश्वरी की सफलता साबित करती है कि अगर मन में कुछ कार्य करने क़ो ठाने तो सफलता एक दिन जरूरी मिलती है, आज योगेश्वरी समय का सही उपयोग उनकी मेहनत और लगन ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि गांव के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया है।साथ ही योगेश्वरी कश्यप की मछली पालन द्वारा आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और बेरोजगारी दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।