छत्तीसगढ़

मोदी ने मन की बात में की अम्बिकापुर के Garbage Cafe का उल्लेख

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात की 127वीं कड़ी के प्रसारण में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में चलाए जा रहे गार्बेज कैफे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और स्वच्छता के प्रयास, इस पर भी मुझे ढ़ेर सारे संदेश मिले हैं। मैं आपसे देश के तीन अलग-अलग शहरों की ऐसी गाथाएं साझा करना चाहता हूँ जो बहुत प्रेरणादायक हैं। छतीसगढ़ के अम्बिकापुर में शहर से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए एक अनोखी पहल की गई है। अम्बिकापुर में Garbage Cafe चलाए जा रहे हैं। ये ऐसे cafe हैं, जहाँ प्लास्टिक कचरा लेकर जाने पर भरपेट खाना खिलाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति एक किलो प्लास्टिक लेकर जाए उसे दोपहर या रात का खाना मिलता है और कोई आधा किलो प्लास्टिक ले जाए तो नाश्ता मिल जाता है। ये cafe अम्बिकापुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चलाता है।

इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने मन की बात शुरूआत करते हुए कहा कि पूरे देश में इस समय त्योहारों का उल्लास है। हम सबने कुछ दिन पहले दीपावली मनाई है और अभी बड़ी संख्या में लोग छठ पूजा में व्यस्त हैं। घरों में ठेकुआ बनाया जा रहा है। जगह-जगह घाट सज रहे हैं। बाजारों में रौनक है। हर तरफ श्रद्धा, अपनापन और परंपरा का संगम दिख रहा है। छठ का व्रत रखने वाली महिलाएं जिस समर्पण और निष्ठा से इस पर्व की तैयारी करती हैं वो अपने आप में बहुत प्रेरणादायक है।

छठ का महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच की गहरी एकता का प्रतिबिंब है। छठ के घाटों पर समाज का हर वर्ग एक साथ खड़ा होता है। ये दृश्य भारत की सामाजिक एकता का सबसे सुंदर उदाहरण है। आप देश और दुनिया के किसी भी कोने में हों, यदि मौका मिले, तो, छठ उत्सव में जरूर हिस्सा लें। एक अनोखे अनुभव को खुद महसूस करें। मैं छठी मैया को नमन करता हूँ। सभी देशवासियों को, विशेषकर बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के लोगों को छठ महापर्व की शुभकामनाएँ देता हूँ।

मोदी ने कहा कि बेंगलुरु में इंजीनियर कपिल शर्मा ने यहां झीलों को नया जीवन देने का अभियान शुरू किया है। कपिल जी की टीम ने बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में 40 कुंओं और 6 झीलों को फिर से जिंदा कर दिया है। खास बात तो ये है कि उन्होंने अपने mission में corporates और स्थानीय लोगों को भी जोड़ा है। उनकी संस्था पेड़ लगाने के अभियान से भी जुड़ी है।

बदलाव के एक और प्रयास का उदाहरण, मैं आपसे साझा करना चाहता हूँ। आप सब जानते हैं जैसे पहाड़ों पर और मैदानी इलाकों में जंगल होते हैं ये जंगल मिट्टी को बांधे रहते हैं, कुछ वैसी ही अहमियत समंदर के किनारे mangrove की होती है। Mangrove समुद्र के खारे पानी और दलदली जमीन में उगते हैं और समुद्री eco-system का एक अहम हिस्सा होते हैं। सुनामी या cyclone जैसी आपदा आने पर ये Mangrove बहुत मददगार साबित होते हैं।

क्या आप जानते हैं कि मन की बातमें हम जिन विषयों पर चर्चा करते हैं, उनमें मेरे लिए सबसे संतोष की बात क्या होगी? तो मैं इस बारे में यही कहूँगा कि मन की बातमें हम जिन विषयों की चर्चा करते हैं, उनसे लोगों को समाज के लिए कुछ अच्छा, कुछ Innovative करने की प्रेरणा मिलती है। इससे हमारी संस्कृति, हमारे देश के कई पहलू उभरकर सामने आते हैं।