युवाओं की ने छत्तीसगढ़ी गीतों और प्रस्तुति ने मोहा मन..... सीएम के पहुंचते ही "कका कका" के नारे से गूंज उठा जयंती स्टेडियम
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग संभाग के युवाओं के साथ भेंट-मुलाकात के लिए जयंती स्टेडियम, सेक्टर-6, भिलाई भेंट-मुलाकात स्थल पहुंचे। कार्यक्रम स्थल में छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर, राज गीत के साथ मुख्यमंत्री ने युवाओं से भेंट–मुलाकात कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री के आगमन के साथ ही युवाओं का जोश दोगुना हो गया है। धुमाल और बैंड परफॉर्मेंस की धुन में उत्साहित युवाओं के "कका कका" के नारे से गूंज उठा जयंती स्टेडियम।
युवाओं के साथ भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल राजनांदगांव, कवर्धा, बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़, मानपुर-मोहला-अंबागढ़-चौकी और दुर्ग जिले से आए युवाओं से जयंती स्टेडियम, भिलाई में सीधी बातचीत कर रहे हैं। दिग्विजय कॉलेज की छात्रा ईश्वरी ने बताया कि इन 5 सालों में मैंने जाना कि हम सब ज्यादा सुरक्षित हुई हैं। ज्यादा तरक्की कर रहे हैं। हम लोग उद्यमिता के क्षेत्र में बढ़ रहे हैं।
बालोद से टेकराम पटेल ने कहा कि मेरी माटी इस दुनिया को सुवासित करती है। आल्हादित करती है। महानदी की धाराओं की तरह हमारा विकास हो रहा है। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव के विद्यार्थी मुकेश कुमार साहू ने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ विषय पर केंद्रित कविता पढ़ी। मुकेश ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलायी जा रही जनहितैषी योजनाओं का समावेश अपनी कविता में करते हुए प्रस्तुति दी। बेमेतरा जिले के मनीष वर्मा ने आल्हा शैली की तर्ज में योजनाओं को गाकर सुनाया।
मुख्यमंत्री ने पूछा कि किन युवाओं ने रायपुर और बिलासपुर का प्रोग्राम यूट्यूब से देखा।युवाओं ने आवाज लगाई हमने। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ युवाओं ने अपनी आकांक्षा बताई। उनका जो सपना है। वही हमारे पुरखों का भी सपना था। सरकार का भी यही सपना है। पौने 2 लाख करोड़ रुपये पैसा डालने का काम हमारी सरकार ने किया। इससे मंदी नहीं आई। यूनिवर्सिटी खोले, 4 मेडिकल कॉलेज खोले।
जहां -जहां भेंट मुलाकात के लिए गए, दो मांग आती है स्वामी आत्मानंद स्कूल खोल दें और बैंक खोल दें। इतने साल हो गए इंग्लिश माध्यम के कॉलेज नहीं थे। हमने 10 कॉलेज खोले। आगे भी खोलेंगे। अब छत्तीसगढ़ की पहचान हमारी विशिष्ट संस्कृति से है। चाहे आदिवासी परम्परा हो, राम वन पथ गमन हो, कबीर सरोवर हो या बाबा घासीदास के पुण्यस्थलों से जुड़े स्थलों का विकास।