भारतीय चिंतन में महिलाओं का स्थान बहुत उच्चः शताब्दी पांडे
रायपुर। रायगढ़ के सभागृह में तेजस्विनी मातृशक्ति सम्मेलन का आयोजन किया गया। लगभग 15 सौ महिलाओं व युवतियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। विभिन्न महिला संगठनों की प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर बढ़ चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शताब्दी पांडे थी। मुख्य वक्ता के रुप में इंदौर की शोभा पैठणकर पहुंची थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता की आशा त्रिपाठी ने की। विशेष अतिथि के रुप में व्रणिका शर्मा, दिल्ली की गीता भट्ट अंतिम सत्र की मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रही। मुख्य अतिथि शताब्दी पांडे ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय चिंतन में महिलाओं का स्थान बहुत उच्च है, पूजनीय है, भारतीय चिंतन स्त्री प्रधान या पुरुष प्रधान नही धर्म प्रधान है, भारत में स्त्री गृह लक्ष्मी मानी गई है। भारत में समाज और राष्ट्र के पुनरूत्थान में महिला का योगदान महत्वपूर्ण है।
शोभा पैठणकर ने कहा कि कुटुंब व्यवस्था में नारी का महत्वपूर्ण स्थान है, और स्त्री पुरुष दोनों को मिलकर परिवार को चलाना होता है यह ही भारतीय चिंतन है। भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर दिल्ली से आई गीता भट्ट ने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आदिकाल से आज तक हम देखते है कि प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं का देश के विकास में योगदान है।
कार्यक्रम तीन सत्रों में सम्पन्न हुआ। प्रथम सत्र का विषय था भारतीय चिंतन में महिला, द्वितीय सत्र चर्चा सत्र था जिसका विषय था महिलाओं की स्थिति, प्रश्न और करणीय कार्य। तृतीय सत्र का विषय था भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका।
इस अवसर पर चर्चा सत्र में कुछ बिंदु समक्ष आए वो है शराब की समस्या, कौशल विकास की कमी, आर्थिक स्वावलंबन की कमी, साइबर क्राइम का बढ़ना। इन सभी महिला संबंधी समस्याओं पर क्या समाधान कारक कार्य हो सकते है इस पर भी विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा बताया गया। कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए।