छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का यह सरपंच केंद्रीय मंत्री के बंगले तक सड़क पर लेटते हुए पहुंचा... जानिए क्या है मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक सरपंच ने देश की राजधानी दिल्ली में अनोखा प्रदर्शन किया है। अपनी मांग को लेकर वह केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आवास तक सड़क पर लेटते हुए पहुंचा। सरपंच का कहना है कि गांव में सड़क नहीं है। अफसर ध्यान नहीं दे रहे। कहीं से फंड भी नहीं दे रहे, इसलिए अब वह गांव में सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय मंत्री के पास पहुंचा है। सरपंच को दिल्ली तक पहुंचाने ग्रामीणों ने बकायदा 5 हजार रुपये चंदा भी जमा किया।

महासमुंद जिले में ग्राम पंचायत बंबूरडीह के सरपंच शत्रुघ्न चेलक दिल्ली पहुंचे। वह अपने गांव में सड़क निर्माण के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सड़क नहीं बन रही है। ऐसे में उन्होंने अपनी बात केंद्रीय मंत्री तक पहुंचाने की ठानी। गांव के लोगों ने चंदा करके सरपंच को पांच हजार रुपये दिए। सरपंच यह पैसे लेकर दिल्ली पहुंचे और सड़क की मांग को लेकर अनोखा प्रदर्शन किया। सरपंच सड़क पर लेटकर लुढ़कते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के आवास पहुंचे, हालांकि सरपंच से नितिन गडकरी की मुलाकात नहीं हुई। जिस समय सरपंच शत्रुघ्न चेलक मंत्री के बंगले पर गए थे उस समय नितिन गड़करी अपने आवास पर नहीं थे।

सरपंच चेलक ने बताया कि वह दो किलोमीटर की सड़क बनवाने के लिए नेता और अधिकारियों की चक्कर लगाते-लगाते थक गए हैं। कहीं से भी उन्हें सड़क बनाने का भरोसा नहीं मिल रहा है। जिस कारण से मैंने इस तरह से विरोध करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सड़क रामाडबरी से बावनकेरा गांव तक बननी है। अभी कच्ची सड़क है। बारिश के सीजन में सड़क पर चलना मुश्किल होता है। वाहन आना तो बड़ी दूर की बात है। कोई बीमार हो जाए तो अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। मरीजों को चारपाई में लेकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है।

सरपंच शत्रुघ्न चेलक ने बताया कि गांव में सड़क नहीं होने से लोग इस गांव में शादी करने नहीं आते हैं। लड़के-लड़कियों की शादी सड़क के कारण नहीं हो पाती है। ग्रामीण भी लगातार इस सड़क के लिए मंत्री और नेताओं से मिलते हैं, लेकिन अभी तक सड़क बनाने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ। सरपंच ने बताया कि इससे बड़ी हैरानी की बात तो यह है कि हमारे गांव का नाम राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दुरूस्त नहीं है। यह गांव भारत सरकार के नक्शे में भी नहीं और गूगल में भी नहीं दिखता है। जिस कारण से इस गांव के लोगों को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।