वार्षिक उत्सव 'धरोहर: एक विरासत' में बेहतरीन प्रस्तुतियों के साथ बच्चों ने कराई चांद की सैर
- संत ज्ञानेश्वर स्कूल के वार्षिक उत्सव 'धरोहर: एक विरासत' का आयोजन
- 300 से अधिक बच्चों ने दी छत्तीसगढ़ी, हिंदी और धार्मिक प्रस्तुतियां
- जायकेदार आनंद मेले की रही धूम... बच्चों ने खूब उठाया आनंद

रायपुर। छोटे-छोटे कदमों के साथ महराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभा गृह के मंच पर चढ़े बच्चों ने जब ‘आओ तुम्हें चांद पे ले जाए’ गीत पर शानदार प्रस्तुति दी तो पूरा हाल तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं प्री प्राइमरी के बच्चों ने ‘दिल है छोटा सा’ का शानदार प्रस्तुति दी। इससे पहले वार्षिकोत्सव 'धरोहर: एक विरासत' के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध समाजसेवी व उद्योगपति रोहित काले ने बच्चों को एक बेहतर संवेदनशील इंसान बनने की सीख दी।

पहली बार महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में आयोजित वार्षिकोत्सव में मुख्य आतिथ्य की आसंदी से रोहित काले ने कहा कि इतनी अच्छी संस्था और उसके संचालन में इतने बढ़िया स्कूल में आपको पढ़ने का अवसर मिला है। इसका लाभ लेते हुए आप लोग मानवता से परिपूर्ण एक अच्छे इंसान बनिए। इसके लिए अनुशासन, ईमानदारी, सकारात्मक विचार, सौम्य व्यवहार अहम रोल अदा करते है। इससे आपको, आपके परिवार को, समाज को और देश को फायदा होगा। पैसा तो आते-जाते रहता है। इसके पीछे भागने की जरूरत नहीं है।

मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने अध्यक्षीय संबोधन में संत ज्ञानेश्वर स्कूल के साथ महाराष्ट्र मंडल की उपलब्धियों पर चर्चा की। विशेष अतिथि के रुप में मंच पर सचिव चेतन दंडवते, उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, शाला के पूर्व प्रभारी निरंजन पंडित, सुवोध टोले, महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले व रेणुका पुराणिक ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने स्वागत भाषण दिया।

गणपति वंदना से शुरू हुए रंगारंग धरोहर में एक तरफ प्री-प्राइमरी के नन्हें मुन्हें बच्चे छा गए। तो वहीं मीडिल और हायर सेकंडरी के बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से धमाल मचाया। सांस्कृतिक कार्यक्रम इसलिए भी रोचक और मजेदार रहा क्योंकि इसमें फिल्मी गानों के साथ छत्तीसगढ़ी, मराठी गानों का बेहतर संगम था। छत्तीसगढ़ के सभी तीज-त्योहार को एक ही गीत में पिरोकर बच्चों ने प्रस्तुत किया। वहीं रानी अहिल्या बाई होल्कर की वीर गाथा बच्चों ने मंचित किया। कक्षा 8वीं के बच्चों ने ‘नमो-नमो शंकराय...’ गीत पर योगा की प्रयोगात्मक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन तृप्ति अग्निहोत्री और सुनिधि रोकड़े ने किया। आयोजन में शाला प्रभारी परितोष डोनगांवकर और सह प्रभारी नवीन देशमुख का विशेष योगदान रहा।

जायकेदार आनंद मेले में बच्चों ने अभिभावकों के साथ झालमुड़ी, दाबेली, चाउमीन, म्च्यूरियन, कटलेट, भेल, नड्डा रोल जैसे अनेक आइटमों के स्टाल में जमकर लुफ्त उठाया। कार्यक्रम के अंत तक स्टालों में भीड़ लगी रही। स्टाल की तरह ही सेल्फी जोन में लगातार तस्वीर खींचाने के लिए होड़ लगी रही।
