दिव्य महाराष्ट्र मंडल

संत ज्ञानेश्वर स्कूल के बच्चों ने मनाई सावित्री बाई फुले की जयंती

- सावित्री बाई बनकर पहुंची दिव्यांशी ने खींचा सभी  का ध्यान

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती शुक्रवार, 3 जनवरी को मनाई गई। सावित्री बाई फुले की वेशभूषा में पहुंची कक्षा दूसरी की छात्रा दिव्यांशी साहू बच्चों को प्रेरक उद्बोधन दिया। सुबह की प्रार्थना सभा में इस उत्सव का आयोजन शिक्षिका अस्मिता कुसरे के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने भी  बच्चों का मार्गदर्शन किया।  

प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बच्चों को बताया कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। इनका विवाह 1841 में ज्योतिराव फुले से हुआ था। सावित्रीबाई भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। वे स्कूल जाती थीं, तो विरोधी लोग उनपर पत्थर मारते थे। उन पर गंदगी फेंक देते थे। आज से 191 साल पहले बालिकाओं के लिये जब स्कूल खोलना पाप का काम माना जाता था तब ऐसा होता था।

 उन्होंने बताया कि 5 सितंबर 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्होंने महिलाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पांच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हें सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिए सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया। 10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया।