सबका समय, कार्य और जवाबदारी पहले से तयः अजय
2025-04-04 08:53 AM
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रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित रामायण के पात्रों पर चर्चा के दौरान अजय पोतदार ने कहा कि इस धरती पर आए सभी लोगों के काम, समय, कार्य और जवाबदारी पहले से तय है। ऐसे में हम कई बार यह सोचते है कि इस कार्य के लिए अगर वह होता तो ऐसा होता। यानी ईश्वर ने सभी के कार्य और जवाबदारी पहले से तय कर रखी है। रामायण में भी राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुध्न के साथ माता सीता, कौशल्या, राजा दशरथ, कैकई और मंथरा का कार्य पहले से तय था। कुछ लोग सोचते होंगे की अगर मंथरा कैकई को नहीं भड़काती तो शायत राम को वनवास न होता। आप सोचिए कि वनवास नहीं होता तो रावण का वध कैसे होता।
अजय ने चर्चा के दौरान आगे कहा कि आज से 5000 साल पहले महर्षि बाल्मिकी ने रायायण की रचना की। जो पूरी तरह संस्कृत में लिखी गई। जिसे सिर्फ वेदाध्ययन करने वाले बड़े संत पढ़ा करते थे। फिर करीब 16वीं शताब्दी में तुलसीदास जी ने रामायण को जन-जन तक पहुंचाने के लिए रामचरित मानस की रचना की। जो पढ़े लिखे लोगों तक पहुंची और घर-घर में रामचरित मानस पढ़ी जाने लगी। फिर 1988-89 में रामानंद सागर ने रामायण धारावाहिक बनाया। उन्होंने निरक्षरों तक भी रामायण की महिमा पहुंचाई। इसके लिए उन्होंने कई भाषाओं में लिखा रामायण का अध्ययन किया। यानी सब के कार्य और समय पहले से निर्धारित था।
उन्होंने शिवधनुष पिनाक की कथा सुनाते हुए उसके टूटने का कारण और वर्तमान परिदृश्य में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। श्रीराम परशुराम संवाद और चाणक्य चंद्रगुप्त संवाद का उल्लेख करते हुए कथा के मूल भाव को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा अदभुत है लेकिन उसके लिए प्रयत्न आवश्यक है। जैसे आप रोज पूजा में रामायण के ऊपर 1 नया फूल चढ़ाते हैं, कोशिश करिए रोज एक नया पृष्ठ पढ़ भी सकें तो रामायण आपको आदर्श जीवन जीने की कला सिखा सकती है।