वाल्मीकि रामायण की कीर्ति के लिए स्वयं के लिखे रामायण को नष्ट किया श्रीहनुमान ने : डॉ मंजिरी बक्षी
रायपुर। बजरंगबली भगवान राम के अनन्य भक्त हैं। राम नाम का जाप, उनसे प्रेम एवं प्रभु चरणों में वास करते करते स्वयं भगवान हो गए हनुमान। हनुमानजी अपनी शक्ति और बल के लिए जाने जाते हैं एवं अपने भक्तों की रक्षा करते, उनकी इच्छाओं को पूरा करते है, अपने भक्तों को शक्ति और साहस प्रदान करते हैं एवं भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति कराते हैं। वह भगवान राम की सेना के महत्वपूर्ण सदस्य थे जो अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई के लिए जाने जाते हैं। उक्ताशय के विचार डॉ मंजिरी बक्षी ने रामायण के पात्रों की चर्चा के दौरान कहें।
मंजिरी ने आगे कहा कि सीताहरण के बाद जामवंत जी ने हनुमान को उनके शक्ति का स्मरण कराया (जो हनुमानजी भूल चुके थे ) तभी गुरु के आदेश का पालन करने हेतु, समय न गवाते हुए उन्होंने अथाह समुद्र को पार कर सीता माता के बारे में जानकारी ली।
मंजिरी ने कहा कि जब हम जिंदगी में असमंजस में होते है तब श्री हनुमान के जैसे ही गुरु के, या तो प्रभु की शरण में लीन हो जाए, क्योंकि गुरु ही वह स्रोत है जो जामवंत की तरह आपको आपकी भूली हुई क्षमता, शक्ति एवं बुद्धि से मिलवाता है, स्मरण कराता है। उन्होंने बताया कि प्रभु एवं गुरु की शरण जाने से ही हमे ब्रह्मांड की ऊर्जा का जल्दी अनुभव होता है। मंजिरी ने आगे हनुमान जी की पूंछ के करतब के किस्से बताए जो रावण की लंका दहन के वक्त एवं उसके साथ युद्ध करते हुए जानकारी में सामने आते है।
अंत में उन्होंने कहा कि चिरंजीवी भगवान श्री हनुमान अपनी कृपा और दया के लिए जाने जाते हैं एवं कलियुग में भी उनके होने एवं अपने भक्तों को मदद करने के किस्से सोशल मीडिया में सुने जा सकते है। अंत में मंजिरी ने अपने वक्तव्य में भजन " हे दुःख भंजन......." प्रस्तुत किया।