दिव्य महाराष्ट्र मंडल

प्रख्‍यात अभिनेता मनोज जोशी आज महाराष्‍ट्र मंडल में.... नाट्य मंडल के रंगमंचीय कलाकारों का करेंगे मार्गदर्शन

रायपुर। हिंदी, मराठी और गुजरात सिने उद्योग के सुप्रसिद्ध अभिनेता पद्मश्री मनोज जोशी रविवार, 18 मई को शाम पांच बजे महाराष्ट्र मंडल में रंग साधकों से मुलाकात करेंगे। इस मौके पर धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक और छत्‍तीसगढ़ी फिल्‍मों के सुपर स्‍टार अनुज शर्मा और समाजसेवी व छत्‍तीसगढ़ी फिल्‍मों के अभिनेता योगेश अग्रवाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
 
मंडल के वरिष्‍ठ रंग साधक रंजन मोडक ने बताया कि रंग संस्‍कार महोत्‍सव के समापन समारोह में बतौर मुख्‍य अतिथि मुंबई से पहुंच रहे मनोज जोशी को जब महाराष्‍ट्र नाट्य मंडल के 65 वर्षीय इतिहास के बारे में सविस्‍तार बताया गया। नाट्य मंडल की उपलब्धियों की जानकारी दी गई तो उन्‍होंने भी महाराष्‍ट्र मंडल के रंग साधकों के बारे में और भी बहुत कुछ जानना चाहा। यही वजह है कि जब उनसे महाराष्‍ट्र मंडल के रंग साधकों से मुलाकात करने का आग्रह किया गया तो वे इसके लिए सहर्ष तैयार हो गए।
 
रंजन मोडक के अनुसार रंग संस्‍कार महोत्‍सव के आयोजकों के साथ मिलकर महाराष्‍ट्र मंडल के विशेष मुलाकात के लिए गुंजाइश निकाली गई तो सर्व सम्‍मति से रविवार को शाम पांच बजे का समय सुनिश्चित किया जा सका। कार्यक्रम में मनोज जोशी रंगमंच के कलाकारों को मार्गदर्शन देंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि यदि भविष्‍य में उन्‍हें फिल्‍मों में कॅरियर बनाना है, तो इसके लिए उनकी तैयारी कैसे हो।
 
कौन है मनोज जोशी...
14 दिसंबर 1965 को जन्‍मे मनोज जोशी गुजराती, मराठी और हिंदी रंगमंच के बडे़ प्रतिष्ठित अभिनेता माने जाते हैं। उन्‍होंने साल 1998 में आमीर खान की फिल्‍म ‘सरफरोश’ में बाला ठाकुर की भूमिका से बॉलीवुड में अपने कॅरियर का आगाज किया। उसके बाद एक से बढ़कर एक भू‍मिकाओं से उन्‍होंने अपनी पहचान संवेदनशील अभिनेता के साथ कॉमेडी जॉनर में जबरदस्‍त पहचान बनाई। आज वे प्रख्‍यात निर्देशकों प्रियदर्शन और मधुर भंडारकर की हंगामा, हलचल, दे दनादन, क्‍योंकि, खट्टा मीठा, भागमभाग, चुप चुप के, चांदनी बार, फुटपाथ, आन, पेज-3 जैसी प्रत्‍येक फिल्‍मों में होते हैं। दो बार राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार और साल 2018 में महेंद्र सिंह धोनी के साथ पद्म श्री सम्‍मान से नवाजे गए मनोज जोशी आज भी ‘हंगामा’ के इंसपेक्‍टर वाघमारे, ‘फिर हेराफेरी’ के कचरा सेठ, ‘भागमभाग’ मनुभाई गांधी के रूप में जाने जाते हैं।