दिव्य महाराष्ट्र मंडल

छापामार युद्ध और नौसेना गठन शिवाजी की देनः पात्रीकर

0- महाराष्ट्र मंडल में छत्रपति शिवाजी महाराज की मासिक आरती में जुटे अनेक पदाधिकारी व सभासद

रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज को शिवाजी या शिवाजी राजे भोसले के नाम से भी जाना जाता है। वे भारत के महान योद्धा और रणनीतिकार थे। हम सब जानते हैं कि उनके नाम से मुग़ल कांपते थे। साल 1674 में उन्होंने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। प्रति माह 19 तारीख को होने वाली मासिक महाआरती में सोमवार को उक्ताशय के विचार वरिष्ठजन सेवा समिति के प्रभारी दीपक पात्रीकर ने कहे। 
 
पात्रीकर ने समूह चर्चा में कहा कि शिवाजी महाराज ने अपने राज्य की सुरक्षा को और मजबूती प्रदान करने के लिए इतिहास में पहली बार शक्तिशाली नौसेना बनाई थी। यही वजह है कि उन्हें भारतीय नौसेना के पितामह के रूप में भी जाना जाता है। अपने शासन के प्रारंभिक चरणों में ही उन्हें नौसैनिक बल के महत्व का आभास हो गया था। उन्हें यकीन था कि यह डच, पुर्तगाली और अंग्रेजों सहित विदेशी आक्रमणकारियों से उनके साम्राज्य को स्वतंत्र रखेगा और समुद्री डाकुओं से भी कोंकण तट की भी रक्षा करेगा। यहां तक कि उन्होंने जयगढ़, विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग और अन्य कई स्थानों पर नौसेना किलों का निर्माण भी करवाया था।
 
वरिष्ठ रंग साधक अनिल श्रीराम कालेले ने समूह चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि शिवाजी महाराज युद्ध की रणनीति बनाने में माहिर थे। सीमित संसाधन के होने के बावजूद छापामार युद्ध कौशल का परिचय उन्होंने तब दिया, जब वे स्वयं महज 15 साल के थे और उन्होंने 'तोरना' किले फतह करके बीजापुर के सुल्तान को पहला तगड़ा झटका दिया था। साल 1655 आते- आते उन्होंने एक के बाद एक कोंडन, जवली और राजगढ़ किलों पर जीत का परचम लहराकर धीरे- धीरे संपूर्ण कोकण और पश्चिमी घाट पर कब्जा जमा लिया था। क्षत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती के दौरान मेस प्रभारी दीपक किरवईवाले, दिव्या पात्रीकर, अतुल गद्रे, अर्चना मुकादम, मनीष देसाई, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी समेत कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।