बाल संस्कार शिविर में बच्चों के प्रदर्शन से पालक भी अभिभूत
2025-05-22 05:26 PM
367
0- महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के ग्रीष्म कालीन ऑनलाइन प्रयास से प्रशिक्षणार्थियों में गजब का आ रहा बदलाव
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से एक मई से शुरू हुए ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर में शामिल हो रहे बच्चों में तीन सप्ताह के बाद अब गजब का बदलाव स्वयं बच्चों के माता-पिता महसूस कर रहे हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश जारी होने के बावजूद उनमें सुबह से जो अनुशासन देखने को मिल रहा है और आध्यात्म के प्रति उनकी बढ़ती रुचि से वास्तव में अभिभावक अभिभूत हैं।
ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर में नियमित रूप से शामिल 13 वर्षीय यशस्वी, नौ वर्षीय युक्ता रोकडे के पिता अजय व मां मेघना रोकडे कहते हैं कि इस शिविर के माध्यम से बच्चे शिष्टाचार सीख रहे हैं। भगवान से जुड़ रहे हैं। शिविर के माध्यम से बच्चे अपनी छुट्टियों का बेहतरीन उपयोग कर रहे हैं। यह हमारे लिए बहुत अच्छी बात है।
ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर की नियमित शिविरार्थी अवनी मिश्रा के पिता प्रणव और मां अंजलि मिश्रा के अनुसार बच्चों के लिए जितनी गंभीरता से व नियमित रूप से आप लोग ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर संचालित कर रहे हैं, वह प्रशंसनीय है। यह बच्चों के लिए अपनी जड़ों से, अपनी संस्कृति से जुड़ने का एक शानदार अवसर है। इसके साथ ही बच्चों को अपनी हिंदू संस्कृति को समझने का भी यह मौका है।
शिविर में हर रोज शामिल होने वाले अर्नव के पिता सारंग जोशी और मां रेणुका जोशी सगर्व कहते हैं कि शिविर के माध्यम से बच्चों को भगवान का स्वरूप मानते हुए उन्हें सुंदर, शिक्षाप्रद कहानियाँ सुनाईं जा रहीं है। आप लोगों का यह प्रयास बच्चों के संस्कार निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही मनोरंजन से उन्हें प्रसन्न भी रखा जा रहा है। इसके लिए हम महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति और सदस्यों की सेवाभावना व समर्पण के आभारी हैं।
सुबह शिविर में शामिल होने वाले सानवी ओर अविशा गुप्ता के पिता विशाल और माता साधना गुप्ता कहते हैं कि ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर में बहुत ही बढ़िया क्लास लगाई जा रही हैं। हम भी अपने बच्चों को हमारे धर्म और संस्कृति के बारे में इतने विस्तार से नहीं बता पाते, जितना यहां बताया जाता है। इस क्लास में बच्चों को इसी तरह शिक्षा और ज्ञान प्राप्त हो रहा है। साथ ही साथ गर्मियों की छुट्टी का भी सार्थक उपयोग हो रहा है। यह सराहनीय कार्य है। विशालगुप्ता ने कहा कि एक पिता के नाते वे महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के आभारी हैं।
शिविर की कुशाग्र छात्रा दीक्षा साहू के पिता महेंद्र साहू व मां मुकेश्वरी साहू ने कहा कि बाल संस्कार शिविर बहुत अच्छा लग रहा है, जो हम अपने बच्चों को धर्म और संस्कृत वेद, गीता, पुराण के बारे में नहीं पढ़ा सकते, नहीं सीखा सकते हो, नहीं बता सकते हो। इस बार संस्कार केंद्र में उनकी बच्ची वही पढ़ाई कर रही है। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे को इसी तरह से बाल संस्कार शिविर के माध्यम से सीखने को संस्कार मिलते रहे। इसी तरह हमारे बच्चे वेद, पुराण गीता के बारे में पढ़ाई करते रहे और आप लोग उन्हें जानकारी देते रहें।
शिविर में नियमित रूप से शामिल नौ वर्षीय अभिज्ञान राजवाडे, 13 वर्षीय प्राची राजवाडे के पिता दत्ता प्रसन्ना राजवाडे ने कहा कि बच्चे इस शिविर में स्तोत्र एवं प्रेरक कहानियों के माध्यम से बहुत ही मनोरंजक तरीके से ज्ञानवर्धन कर रहे हैं। साथ ही योग उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व का भी ज्ञान मिल रहा है, हम आप सभी ऑर्गनाइजर्स के आभारी हैं, जिनके कारण बच्चों को इतना कुछ सीखने मिल रहा है।
मां दीपाली राजवाडे़ ने कहा कि मेरे बच्चों अभिज्ञान व प्राची बाल संस्कार शिविर में सहभागिता कर रहे हैं। यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। मंत्रोच्चार एवं संस्कारों का ज्ञान प्राप्त करना , आपकी पूरी टीम धन्यवाद। आप लोग बधाई के पात्र हैं, जो बच्चों को इतने महत्वपूर्ण संस्कार देने के लिए अपना समय दे रहे हैं। निश्चित ही इस शिविर से सभी बच्चे लाभान्वित होंगे।
आशीष और अनुप्रिया सिन्हा के बच्चे 13 वर्षीय अर्नव सिन्हा और आठ वर्षीय तक्षशील सिन्हा महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर में नियमित रूप से पूरे उत्साह के साथ शामिल हो रहे हैं। सिन्हा दंपती का इस संदर्भ में कहना है कि शिविर से बच्चों को करेंट अफेयर्स, आर्ट, योग, कहानियां, श्लोक, मंत्र पाठ, संस्कृत जैसी असाधारण भाषा पढ़ने और सीखने का अवसर मिल रहा है और वो भी एक ही कक्षा में। बच्चे पूरे उत्साह के साथ कहते हैं कि मंजूषा मरकले सरलता, और धैर्य के साथ एक- एक बच्चों को बार- बार अभ्यास कराते हैं और यह भी बहुत सराहनीय है।
अहान भूषण कुलकर्णी कहते हैं कि बाल संस्कार शिविर की ऑनलाइन क्लास बहुत ही अच्छा माध्यम है हमारे बच्चों को हिंदू संस्कृति के बारे में सीने का। सबसे अच्छी बात ये हे कि बच्चे आनलाइन क्लास के लिए खुद ही उत्साहित रहते हैं और खुद ही जल्दी उठकर क्लास के लिए लॉग इन करते हैं। आप लोग भी पूरे धैर्य के साथ बच्चों को श्लोक याद करवा देते हैं और उसका अर्थ भी समझाते हैं। इसी से ही बच्चे खुशी से ही क्लास में सब कुछ सीख जाते हैं।
अहान के अनुसार इस शिविर की खासियत ये है कि यहां सिर्फ श्लोक और संस्कार ही नहीं् बल्कि सभी विषयों पर बात होती है। अभी का लेटेस्ट टॉपिक भारत- पाकिस्तान युद्ध पर बच्चों को जागरूक करना बहुत ही संतोषजनक है। इस तरह छत्रपति शिवाजी महाराज पर भी संवाद हुआ। इसके लिए शिविर से जुडे़ हर एक सदस्य का हृदय से आभार है।
राघव कुकडे इस शिविर के बारे में कहते हैं कि बाल संस्कार शिविर अच्छा हो रहा है। बच्चे अलग अलग- बहुत सारी बातें सीख रहे हैं। योग, ड्राइंग, कहानियां, सहित आप लोगों की ओर से की जा रही पहल बहुत सराहनीय है। राघव पहले शांत रहता था लेकिन अब धीरे- धीरे बोलने लगा है। इससे भी बड़ी बात अब वो अपनी राय बिना झिझक या डरे देने लगा है। आप लोगों ने बच्चों से बहुत ही अच्छा संवाद बनाया है और इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं।
इस बीच ऑनलाइन बाल संस्कार शिविर की संकल्पना करने वाली आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया है कि अब प्रत्येक शनिवार शिविर में बच्चों को रसिका थानवी भजन सिखाएंगी।