छोटे बच्चों ने कविता तो बड़ों ने नाट्य मंचन कर बताई गुरू की महिमा
रायपुर। जब दुनिया में था अंधियारा, न दिखता है कोई भी सहारा, तब एक किरण बनकर आए, गुरु... आपने हमें राह दिखलाई..... कविता की इन चंद लाइनों के साथ संत ज्ञानेश्वर स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों ने गुरू पूर्णिमा पर अपने गुरुओं को नमन किया। वहीं बड़े बच्चों ने नाट्य मंचित कर जीवन में गुरु के महत्व को बताते हुए यह बताने का प्रयास किया कि जीवन में प्रगति और सही मार्गदर्शन के लिए एक अच्छे गुरु का होना बेहद जरूरी है। पढ़ने वाले बच्चे, बदमाश बच्चे, आलसी बच्चे के साथ क्लास में एक गुरु की दूरदर्शिता और बच्चों के प्रति समान भाव को नाट्य में दिखाया गया।

स्कूल की शिक्षिका अपर्णा आठले ने बताया कि सुबह की पाली में पांचवीं तक के बच्चों ने गुरुपूर्णिमा पूरे उत्साह के साथ मनाया। बच्चों ने शाला में प्रवेश के साथ ही अपने शिक्षक-शिक्षिकाओं को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए उनका आशीर्वाद लिया। वहीं कुछ बच्चों ने अपने गुरुओं के लिए ग्रीटिंग्स कार्ड अपने हाथों से बनाकर लाए थे। गुरु पूर्णिमा उत्सव का शुभारंभ स्कूल स्टाफ पीयूष गोयल ने दीप प्रज्ज्वल के साथ किया। बच्चों को गुरु के महत्व के बारे में बताया गया। अनय अम्बोरे, पवन, अविशा, प्रथम और अभिगा ने अपनी प्रस्तुति दी। शिक्षिका किरण सुतार ने स्व रचित कविता 'गुरु का दीपक ' की बहुत ही अच्छी प्रस्तुति दी। हिमानी, लावण्या, रुचि, भावना, भावेश, सुनिकेत, गौरव, कनिका, आस्था द्वारा गीत प्रस्तुत किया गया।

शिक्षिका अराधना लाल ने बताया कि मीडिल क्लास के बच्चों ने भी सुंदर प्रस्तुति दी। खुशी सहारे और हुसिका ने कार्यक्रम का संचालन किया। पुरातन संस्कृति में गुरू-शिष्य परंपरा और आधुनिक शिक्षा पद्धाति दोनों का सुंदर मंचन बच्चों ने किया। कक्षी आठवीं की गार्गी, समृद्धि मिश्रा और ग्रुप ने गुरु के महत्व के बारे में बताया। पल्लवी और ग्रुप ने भी सुंदर प्रस्तुति दी। दुष्यंत, हंसिका ,दीपिका, विनय ,हर्ष, अनामिका, शिवानी रिद्धि सभी ने अपनी-अपनी प्रसुतित दी। कार्यक्रम के अंत में अदिति ग्रुप में डांस प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन शिक्षिका मेघा जैन ने किया।
