दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडळ में सामूहिक मंगळागौरी व्रत का उद्यापन 19 अगस्त को

रायपुर। महाराष्ट्र मंडळ और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र की ओर से चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडळ में मंगलवार 19 अगस्त को सुबह 10 बजे से सामूहिक मंगळागौरी व्रत का उद्यापन किया जाएगा। उद्यापन को लेकर व्रत रखने वाली महिलाओं ने अपना पंजीयन करा लिया है। महाराष्ट्र मंडळ के सचिव आचार्य चेतन दंडवते ने बताया कि व्रत को लेकर 28 महिलाओं ने अपनी पंजीयन करा लिया है। 
 
दंडवते ने बताया कि साक्षी सार्थक फड़नवीस, प्रतिक्षा प्रभात भांडारी, मीनल गणोदवाले, रेणु बापट, माधवी पार्थ पांडे, सौ.प्राची जोशी, उत्तरा सप्तपुत्रे, करुणा अंकित आष्टिकर, अपूर्वा टोकेकर, श्रुति आभास करकशे, दर्शना शिरालकर, तृप्ति करमरकर, सोनाली आशीष घोलें, प्रजक्ता नितीश रावेरकर, श्रेष्ठा कुपटकर, विभाष राहटगांवकर, सृष्टि कालगांवकर, देवश्री कविश्वर शुक्ल, यशस्वी शुभम बक्षी, सुवर्णा अमित वाडी, माधुर्या वैभव तांबे,  शिवानी अतुल भादे, श्वेतालीना काळे, अपूर्वा चिटनिस, रचिता हर्षित कश्यप, ऐश्वर्या शब्दार्थ दुबे, सोनम, विकल्प श्रवणे और धनश्री, समीर जोशी ने पंजीयन कराया है। जिसमें कुछ लोग रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर और अन्य शहरों के है। 
 
आचार्य दंडवते के अनुसार पुराणों के अनुसार वैवाहिक जीवन मे खुशहाली के लिए, पुत्र प्राप्ति, पति/ पुत्र की लंबी आयु, व अन्य सुखों के लिए सुहागन स्त्रियों के द्वारा इस व्रत को किया जाता है। गौरी पूजन नाम से स्पष्ट है, माँ गौरा अर्थात् माता पार्वती के लिए यह व्रत किया जाता है। भगवान शिव-पार्वती को श्रावण माह अति प्रिय है। इसलिए यह व्रत श्रावण माह के मंगलवार को ही किया जाता है। इसलिए इसे मंगला गौरी भी कहा जाता है।
 
मन्नत के अनुसार, अपने मंगला गौरी के व्रत पूर्ण कर आखरी मंगलवार को किसी पंडित या पुरोहित के सानिध्य में तथा सोलह सुहागन स्त्रियों को भोजन करा कर इस व्रत की समाप्ति करनी चाहिए। जिसमें पूजन विधि हर मंगलवार की तरह करके, आखिरी मंगलवार को पूरे परिवार के साथ माता-पिता के साथ व सुहागन स्त्री अपने पति के साथ करें। पूरे परिवार व सगे संबंधियों को शामिल कर अंत में आरती करें। इस तरह मंगला गौरी व्रत का उद्यापन किया जाता है।