महाराष्ट्र मंडल नारी सशक्तीकरण की दिशा में करे उल्लेखनीय काम
मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के दूसरे दिन परिचर्चा में वक्ताओं ने अगले दशक का महाराष्ट्र मंडल का खींचा खाका
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में ये क्षमता है कि वो नारी सशक्तीकरण की दिशा में बहुत कुछ कर सकता है। जरूरतमंद व प्रतिभाशाली बच्चियों की पढ़ाई की खर्च जिस तरह महाराष्ट्र मंडल संत ज्ञानेश्वर स्कूल के माध्यम से उठाता है, उसी तरह उनकी उच्च शिक्षा का खर्च भी महाराष्ट्र मंडल उठाने की व्यवस्था करें, ताकि उनकी शिक्षा स्वावलंबन की दृष्टि से सार्थक अंजाम तक पहुंच सके। डॉ. कमल वर्मा ने इस आशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के दूसरे दिन आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किए।
परिचर्चा में तमाम वक्ताओं ने अगले 10 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल की योजनाओं व कार्यों का खाका खींचा। डॉ. वर्मा ने कहा कि महिलाओं की तरह ही बच्चियों को भी सशक्त बनाने के लिए महाराष्ट्र मंडल को कराते- कुंग फू प्रशिक्षण कक्षाएं लगानी चाहिए। इससे उनमें असुरक्षा की भावना खत्म होगी और आत्मविश्वास बढेगा। डॉ. वर्मा के मुताबिक दिव्यांग बालिका गृह के लिए वे ग्रामीण अंचल में दिव्यांग बच्चियों को तलाशने के लिए तैयार हैं। यदि हम अभिभावकों का भरोसा जीत पाए तो हमें और भी दिव्यांग बच्चियां मिलेंगी।
मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल ने कहा कि केरला समाज, आंध्रा समाज, सिख समाज, बंगाली समाज की तर्ज पर महाराष्ट्र मंडल को भी अपने परिसर में एक मंदिर शुरू करना चाहिए। इससे दूसरे समाज के श्रद्धालुओं को भी महाराष्ट्र मंडल आने और उसे जानने का मौका मिलेगा। जरूरत पडे तो इसके लिए वार्षिक सामान्य सभा में एक विशेष संविधान बनाना चाहिए। इससे हमारे समाज की भावी पीढी को भी आध्यात्म से जुडने का एक मौका जरूर मिलेगा।
स्वास्थ्यजन सेवा समिति के पूर्व प्रभारी अरविंद जोशी ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल के सामने इस समय सदस्यता का बढ़ती उम्र का होना, युवाओं का घटता जुड़ाव, एक कमजोर डिजिटल उपस्थिति और वित्तीय अस्थिरता गंभीर चुनौती है। ये मुद्दे मंडल की भविष्य की प्रासंगिकता के लिए गंभीर जोखिम प्रस्तुत करते हैं। जोशी के मुताबिक महाराष्ट्र मंडल में पारदर्शी और जवाबदेह नेतृत्व को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही अगली पीढ़ी के नेताओं को सक्रिय रूप से विकसित करना भी मंडल के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है।
जोशी के विचारों में पारंपरिक त्योहारों में नवाचार लाना और मराठी कला व भाषा को आधुनिक तरीकों से बढ़ावा देना महाराष्ट्र मंडल की जिम्मेदारी है और अगले दशक इसका निर्वहन होना चाहिए। सामुदायिक और सामाजिक प्रभाव को गहरा करने के लिए युवाओं पर केंद्रित पहल की जानी चाहिए। मंडल में महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम और सामाजिकता को और भी बढावा देने की जरूरत है।
पर्यावरण समिति के समन्वयक अभय भागवतकर ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल को एमएमवायडीपी (महाराष्ट्र मंडल यूथ डेवलपमेंट प्रोग्राम) को शुरू कर एक नई दिशा की ओर से कदम बढ़ाना चाहिए। युवा स्वावलंबन योजना के तहत स्व रोजगार को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करना चाहिए। भागवतकर के अनुसार नारी सशक्तीकरण के लिए मंडल को दुर्गा वाहिनी, रानी लक्ष्मीबाई वाहिनी, रानी अहिल्या बाई वाहिनी या दामिनी योजना बनानी चाहिए, ताकि हमारे समाज और आसपास नारी पर अत्याचार न हो।
भागवतकर ने कहा कि मंडल को स्वामी विवेकानंद, छत्रपति शिवाजी, संभाजी महाराज, स्वातंत्र्य वीर विनायक सावरकर के नामों से ‘संस्कार योजना शुरू करना चाहिए। इसी तरह अगले 10 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल संत ज्ञानेश्वर स्कूल की दो और शाखाएं शुरू करें। इससे गरीब परिवारों के लाभार्थी बच्चों की संख्या बढेगी। महाराष्ट्र मंडल खेल अकादमी की स्थापना भी हमारे समाज के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अवसर प्रदान करेगी। इसी तरह महाराष्ट्र मंडल को संगीत प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना करनी चाहिए। मंडल को ‘मेरी सेना मेरा देश’ गौरव योजना के माध्यम से युवाओं को सशस्त्र बल में सेवाओं के अवसर दिलाने के लिए कार्यशाला आयोजित करना चाहिए।
सचेतक रविंद्र ठेंगडी ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल की पहचान मूलत: सामाजिक संस्था के रूप में है इसलिए यहां के सेवाभावी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर बड़े पैमाने पर करना चाहिए। इसमें दिव्यांग बच्चियों की संख्या बढ़ाने, संत ज्ञानेश्वर स्कूल की कम से कम तीन शाखाएं खोलकर अधिकाधिक गरीब परिवार के बच्चों के लिए सस्ती व निशुल्क शिक्षा देने, बड़ी संख्या में कामकाजी महिलाओं व छात्राओं को सखी निवास में लाभान्वित करने और शहर में कम से कम 10 स्थानों पर लगातार संस्कार शिविर लगाने जैसे काम करने चाहिए।
ठेंगडी के अनुसार इस सब कामों के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की जरूरत होगी। उसके लिए महाराष्ट्र मंडल और मेस को बडे पैमाने पर लगातार प्रचारित करने की जरूरत होगी। इसी तरह अपुलकी योजना, पालना घर योजना, गोशाला, गुरुकुल जैसी मंडल की भावी योजनाओं को यथाशीघ्र शुरू करने की जरूरत है। इनसे मंडल की पहचान राजधानी रायपुर में एक अनिवार्य जरूरत के रूप में हो सके। सखी निवास प्रभारी नमिता शेष ने परिचर्चा की शुरुआत में सभी वक्ताओं का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सभी वक्ताओं का आभार माना और भरोसा दिलाया कि इन सुझावों को भविष्य में धरातल पर लाया जाएगा।