बच्चों को मानवीय, नैतिक और मौलिक जिम्मेदारी सीखाना बेहद जरूरीः डा. अरविंद नेरल
2025-09-05 07:04 PM
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- महाराष्ट्र मंडल में हुआ संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के शिक्षकों का सम्मान
रायपुर। शिक्षक कभी सम्मान नहीं मांगा करते, पेड़ कभी छाया से किराया नहीं मांगा करते...। जी हां मनुष्य के जीवन में एक शिक्षक की भूमिका उस पेड़ की भांति होती है, जो अपनी छांव से किराया नहीं मांगते और उस छांव को अपना संरक्षण प्रदान करते है। हमारे जीनव में शिक्षक भी हमें जीवन मूल्यों में चलने की राह दिखाते हैं और संरक्षण प्रदान करते है। उक्ताशय के विचार शिक्षक दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र मंडल में आयोजित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के शिक्षक सम्मान समारोह में सिकलसेल के डायरेक्टर जनरल और मेडिकल कालेज रायपुर के रिटाटर्ड प्रोफेसर डा. अरविंद नेरल ने कहें।

छात्रों के जीवन में शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने पूर्व की दो विशेष घटना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा एक बार ओमान देश की यात्रा पर गए थे। उस दौरान ओमान पहुंचने पर वहां के सुल्तान उनके स्वागत के लिए खुद एयरपोर्ट पहुंचे। विमान की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गए और उनका स्वागत किया।

फिर खुद कार ड्राइव करते हुए उन्हें अपने महल तक लेकर गए। बाद में उनके प्रोटोकाल अधिकारी ने जब उनसे कहा कि ऐसी क्या बात थी कि आपने सुल्तान का प्रोटोकाल तोड़ दिया। इस बार उन्होंने कहा कि मैं एक राष्ट्रपति को लेने नहीं गया था। बल्कि मैं अपने गुरू को लेने गया था। उन्होंने मुझे पुणे के इंस्टीट्यूट में पढ़ाया था ऐसा ही एक वाक्या अब्दुल कलाम जी के समय हुआ। उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में अपने प्राइमरी और मीडिल स्कूल के शिक्षकों को बुलाया था। यह दोनों घटनाएं शिक्षक को राष्ट्रपति से भी अधिक पूज्यनीय बनाती है।

नेरल ने आगे कहा कि आज बच्चों को किताबों ज्ञान से अधिक व्यवहारिक और सामाजिक ज्ञान की आवश्यकता है। क्योंकि किताबों में मिलने वाला ज्ञान उसे मोबाइल फोन पर आसानी से मिल जाएगी। लेकिन जीवन मूल्यों का ज्ञान, मानवीय गुण, जिम्मेदारियों का एहसास कराना एक शिक्षक का काम होता है। मैं आशा करता हूं कि आप सभी इस कार्य को भी बखूबी कर रहे होंगे। आज एआई का जमाना है, टीचिंग में नई तकनीक का इस्तेमाल करें। आज इसे नहीं अपनाएंगे तो आने वाले कुछ समय के बाद हम पीछे रह जाएंगे।

इससे पूर्व अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि शिक्षक दिवस के मौके पर आज हमारे बीच ऐसी शख्तियत मौजूद हैं जिन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया। आकांक्षा जैसी संस्था के माध्यम से मानसिक विकार या मानसिक बीमारी से जूझ रहे बच्चों की सेवा कर रहे है।

उन्होंने आगे कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि आज सभी अवैतनिक और वैतनिक ढंग से महाराष्ट्र मंडल जैसी समाजसेवी संस्था के साथ जुड़े है। समाज से हमें जितना जो कुछ मिला हो हमें उसे वापस करना चाहिए। यहीं समाजसेवा का मूल आधार है। कार्यक्रम का संचालन संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर और आभार प्रदर्शन स्कूल के सहप्रभारी नवीन देशमुख ने किया।
