निंदा करने वाले हमें शुद्ध बनाते है: आचार्य धनंजय
0 महाराष्ट्र मंडल में भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन धुंधली- आत्मदेव और वेदव्यास- शुक शावक की सुनाई गई कथा
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में जारी भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन आचार्य धनंजय शास्त्री ने निंदक को पास रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि निंदा करने वालों का विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने पास रखना चाहिए और प्रशंसकों को दूर से ही प्रणाम करना चाहिए। आचार्य ने कहा कि निंदा करने वाले हमें शुद्ध करते हैं।
आचार्य धनंजय ने स्पष्ट किया कि आत्महत्या करने से दुख की वृद्धि ही होती है। धुंधली- आत्मदेव की कथा सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि आत्मदेव के मन में आत्महत्या करने का विचार आया, लेकिन अंतिम क्षण में सरोवर के किनारे ऋषि वृंद ने उनसे कहा कि दुख को भोगकर- सहनकर समाप्त करना चाहिए। आत्महत्या करने से अगले जनम में हमें बचे हुए दुख का भी भागी बनना पड़ता है। ब्रह्माण्ड में ऐसा कोई नहीं जिसे दुख नहीं। वरुण देव जब पृथ्वी पर देखते होंगे, तो उन्हें भी दुख होगा कि वर्षा के रूप में शुद्ध पानी देने के बाद लोगों ने जमीन में सोखने की जगह ही नहीं छोड़ी। शुद्ध जल को नाली- नालों में बहा दिया। इंद्रदेव एवं देवतागण भी दुखी रहते हैं। उससे भागने का प्रयास नहीं करते।

एक प्रसंग में आचार्य धनंजय शास्त्री ने कहा कि पितृपक्ष के भरणी नक्षत्र में श्राद्ध करने से पितरों को गया के श्राद्ध का पुण्य मिलता है। इससे तो ज्ञात-अज्ञात पितर भी तृप्त होते हैं। किसी भी पितर का पितृपक्ष के भरणी नक्षत्र में श्राद्ध कराने विधान है। उन्होंने गोकर्ण और उनके भाई धुंधकारी की कथा सुनाते हुए कहा कि अंतिम यात्रा में अर्थी का विशेष महत्व होता है। क्योंकि वह बांस से बनती है। बांस के अंदर जो पोला भाग होता है, उसी में दिवंगत की आत्मा बैठकर यात्रा करती है। हमें अपने घरों में शो पीस वाले चाइनीज बेंबू नहीं रखना चाहिए। यह अंदर से पोले होते हैं। कपड़े सूखाने के बांस भी ठोस होने चाहिए।
वेद व्यास और शुक शावक की कथा सुनाते हुए आचार्य धनंजय शास्त्री ने कहा कि मां पार्वती को श्रीमद् भागवत कथा में नौंवे स्कंद तक श्री कृष्ण की लीलाएं सुनने पसंद आता है। वहीं दसवें स्कंद में सिद्धांत की बातें आने पर उन्हें नींद आने लगती है। जबकि सिद्धांत की बातें भगवान शिव को पसंद थी। आचार्य अहिंसा की बात करते हुए कहते हैं कि अकारण वध नहीं करना चाहिए। बैल का वध वर्जित है। गो हत्या में सौ बैल का पाप लगता है। ब्राह्मण की हत्या में सौ गायों का, स्त्री की हत्या में सौ ब्राह्मणों का, गर्भवती स्त्री की हत्या में सौ स्त्री की हत्या का पाप लगता है। इसी तरह भ्रूण हत्या भी आदि अनंत काल से निषेध है।