दिव्य महाराष्ट्र मंडल

अनिकेत की भावनाओं के ज्‍वार में बह गए रंगप्रेमी

0-  महाराष्‍ट्र मंडल की 90वीं वर्षगांठ पर आयोजित मराठी सोहला के दूसरे दिन खचाखच भरे संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह में ‘मैं अनिकेत हूं’ का प्रभावशाली मंचन

रायपुर। मायूसी भरा जख्‍मी चेहरा और नम आंखों के बीच सन्‍नाटे को चीरती हुई तेज आवाज ‘मैं अनिकेत हूं..... मैं अनिकेत हूं.... और मैं अनिकेत ही हूं…’ के बाद रंगप्रेमी दर्शकों से खचाखच भरे संत ज्ञानेश्‍वर सभागृह में करीब 10 सेकंड तक सन्‍नाटा छाया रहता हैं। फिर तालियां बजनी शुरू होती हैं और कई मिनटों तक बजते ही रहती है। बात हो रही हैं महाराष्‍ट्र मंडल के कुमुदिनी वरवंडकर स्‍मृति रंगमंच पर मंचित हिंदी नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ की।
 

मराठी और हिंदी रंगमंच के वरिष्‍ठ रंगसाधक शशि वरवंडकर ने हिंदी नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ में न केवल केंद्रीय भूमिका अनिकेत को जीवंत किया, बल्कि उन्‍होंने पहली बार इसी नाटक से अपनी निर्देशन प्रतिभा से भी प्रशंसा बटोरी। नाटक में अपनी पहचान को दोबारा स्‍थापित करने के लिए संघर्ष करते युवक की भूमिका में अपने सधे हुए अभिनय से शशि वरवंडकर शुरू से अंत तक रंगप्रेमियों को बांधे रखते हैं।
 
 
बताते चले कि करीब 23 साल पहले महाराष्‍ट्र मंडल के रंगमंच सहित विभिन्‍न स्‍थानों और शहरों में मंचित इसी नाटक में शशि अनिकेत की भूमिका निभा चुके हैं। साथ ही उनकी पत्‍नी मीनाक्षी शर्मा की भूमिका में डॉ. अनुराधा दुबे ने पहले भी प्रभावित किया था और इस बार भी। लगभग 90 मिनट के नाटक में शशि के साथ बराबरी से टक्‍कर लेते हुए चेतन गोविंद दंडवते वकील भारद्वाज की भूमिका में आकर्षित करते हैं। वहीं मीनाक्षी की भूमिका के साथ अनुराधा दुबे न्याय करती नजर आई। सावित्री बाई की भूमिका में भारती पलसोदकर के हिंदी मराठी संवादों ने खूब तालियां बटोरीं। आचार्य रंजन मोड़क में डॉक्टर शिरोडकर की भूमिका निभाई और उनके ओजस संवादों और डॉक्टर की उपलब्धियों ने खूब तालियां बटोरीं।

 
वरिष्‍ठ रंगसाधक प्रकाश खांडेकर, दिलीप लांबे, रंजन मोडक, डा. प्रीता लाल, रविंद्र ठेंगड़ी अपनी- अपनी भूमिकाओें में जमे।  ‘मैं अनिकेत हूं’ के माध्यम से समीर टल्‍लू, भारती पलसोदकर, विनोद राखुंडे, पंकज सराफ, श्याम सुंदर खंगन, डा. अभया जोगलेकर हिंदी रंगमंच का अपना सफर शुरू कर रहे हैं।
 

अजय पोतदार व प्रवीण क्षीरसागर की सेट डिजाइन पूरे नाटक में वास्‍तविक कोर्ट रूम का एहसास कराती है। रूप सज्जा दिनेश धनकर, वेशभूषा डा. अभया जोगलेकर, प्रकाश व्यवस्था लोकेश साहू व नितिन यादव, संगीत चैतन्य मोड़क और नेपथ्य अस्मिता कुसरे, रंजना ध्रुव का भी सहयोग प्रशंसनीय रहा।