रिंग फाइट के खिलाड़ियों ने सीखा टाइमिंग और पावर का सही इस्तेमाल
2025-11-18 12:27 PM
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- खिलाड़ी संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के खेल मैदान में कर रहे अभ्यास
- पश्चिम बंगाल में 12 से 14 दिसंबर तक होगी 9वीं नेशनल रिंग फाइट चैम्पियनशिप
रायपुर। रिंग फाइट मुक्केबाजी, मिश्रित मार्शल आर्ट (MMA) या कुश्ती जैसा खेल है। छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन की टीम लगातार कई वर्षों से नेशनल चैंम्पियनशिप में भाग ले रही है। पिछले वर्ष टीम ने आंध्रप्रदेश में तीन स्वर्ण सहित कुल 10 पदक अपने नाम किया था। इस खेल में टाइमिंग और पावर का सही इस्तेमाल ही जीत का आधार होता है। टीम के कोच और छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन सचिव ओपी कटारिया संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में खिलाड़ियों को टाइमिंग और पावर का सही इस्तेमाल करना सीखा रहे है।
ओपी कटारिया ने बताया कि पश्चिम बंगाल में 12 से 14 दिसंबर को होने वाले 9वें नेशनल रिंग फाइट चैम्पियनशिप में की तैयारी टीम कर रही है। रिंग फाइट का खेल तीन राउंड का होता है। पहला राउंड रस्सा खींच है। इसके लिए प्रतिभागी को महज 15- 20 सेकंड दिया जाता है। इसमें एक ही झटके में प्रतिभागी को अपनी ओर खींचना होता है। झुक जाने पर प्रतिस्पर्धी को हारा हुआ मान लिया जाता है। इस राउंड के लिए फाइटर्स ने प्रशिक्षकों की देखरेख में शानदार प्रशिक्षण दिया।
ओपी कटारिया ने आगे बताया कि स्पर्धा का दूसरा राउंड पंचेस फाइट का होता है। इसके लिए दो मिनट का समय निर्धारित होता है। दोनों खिलाड़ी एक- दूसरे के चेहरे पर पंच बरसाते हैं। तीसरा राउंड किक्स का होता है। इसमें प्रतिभागी प्रतिस्पर्धी पर दो मिनट में ही फ्री स्टाइल में फाइटिंग करते हैं। कैंप में शामिल फाइटरों को इसी के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि उनके पंचेस सटीक हो सके।
छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि अनुभवी कोच ओपी कटारिया और वरिष्ठ खिलाड़ी वर्तिका क्षीरसागर के मार्गदर्शन में टीम समन्वय, अनुशासन और इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए गए। अभी प्रत्येक शनिवार और रविवार को सुबह स्कूल परिसर में कैंप लगाया जा रहा है। शिविर में रेशू जायसवाल, प्रणवी ओगले, गौरव हेमने, अभिमन्यु कुमार, आदित्य नारायण कन्नौजे, अवनीश जायसवाल, सृजन, आयुष्मान काळेले, विहान, रौनक वर्मा उपस्थित रहे।