दिव्य महाराष्ट्र मंडल

हनुमान जयंती पर राममंदिर में हुआ नारदीय कीर्तन

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पधारे पुणे के कथावाचक रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने हनुमान जयंती के अवसर पर चौबे कालोनी स्थित राम मंदिर में नारदीय कीर्तन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते, आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले, अजय देशपांडे, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे। इस अवसर पर भक्तजनों ने नारदीय कीर्तन का लाभ लिया। 
 
कथावाचक अय्यर ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित हनुमान जी बल, बुद्धि, विद्या और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जो राम काज के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे न केवल एक परम भक्त हैं, बल्कि वेदों के ज्ञाता, चतुर कूटनीतिज्ञ और संकटमोचक भी हैं, जिन्होंने सीता माता की खोज और लक्ष्मण के प्राण बचाकर महाशक्तिशाली भूमिका निभाई। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हनुमान जी का चरित्र प्रबंधन, अटूट समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य व साहस के साथ समाधान खोजने की प्रेरणा देता है। जो आज के वर्तमान युग में बेहद जरूरी है। 
 
कथावाचक अय्यर ने हनुमान जयंती पर वाल्मिकी रामायण में वर्णित भगवान हनुमान के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि हनुमान जी का जन्म वानर राज केसरी और माता अंजना के पुत्र के रूप में हुआ था। मान्यता है कि माता अंजना ने शिव के अंशावतार पुत्र की प्राप्ति के लिए 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया, जिसके फलस्वरूप पवनदेव के माध्यम से यज्ञ का प्रसाद मिलने पर अंजना ने हनुमानजी को जन्म दिया। यह तपस्या उन्हें एक श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण थी।