मंदोदरी की व्यथा, शकुनि की कुटिल चाल मंच पर हुई जीवंत
- महाराष्ट्र मंडल के साथ रंगभूमि ने अपनी 10वीं सालगिरह पर आयोजित किया रंग यानिकी
रायपुर। सीता सा है मेरा चरित्र और उर्मिला सा है मेरा समर्पण। मेरा प्रेम, त्याग, किसी भी तरह कम नहीं। मैं मन दो धरी, इसलिए कहलाई मंदोदरी। रंजना ध्रुव ने मंदोदरी की व्यथा को इतनी संवेदनशीलता से मंच पर प्रस्तुत किया कि रंगप्रेमी दर्शक बस देखते ही रह गए। बात हो रही है सिविल लाइंस स्थित वृंदावन हाल में रंगभूमि की 10वीं सालगिरह पर आयोजित रंग यानिकी की। इस मौके पर वरिष्ठ रंगसाधक आचार्य रंजन मोड़क के निर्देशन में हिंदी और छत्तीसगढ़ी में अपनी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्म को लेकर प्रभावशाली प्रस्तुतियां हुई।
‘मैं हूं शकुनि, क्योंकि जब मेरे स्वजनों को कुचला गया तब मैंने धर्म की किताब पहनकर अपने बदलों की चालों में निपटा दिया। मेरी सबसे बड़ी जीत क्या थी, कौरवों की हार, पांडवों का विनाश, नहीं मेरी सबसे बड़ी जीत थी धर्म की भाषा बोलकर अधर्म करना।‘ चैतन्य मोड़क ने शकुनि के किरदार को इतनी जीवंतता से मंच पर उतारा कि लगा हमारे आसपास, समाज में ऐसे शकुनि की कमी नहीं है। बिल्कुल इसी तीखे और आक्रामक अंदाज में सुषमा गायकवाड़ ने ‘मैं हूं और मैं ही रहूंगी’ की जानदार प्रस्तुति दी। सुषमा ने कहा कि लोग कहते है कि तुम राधा बनो, सीता बनो, मीरा बनो, तुम उर्मिला बनो, यशोधरा बनो पर मैं हूं मैं कोई और क्यों बनूं।

इसी तरह प्रभात साहू ने छत्तीसगढ़ी कविता सुरता, ट्विंकल परमार ने तन्हाई, दीप्ती त्यागी ने ईस्कूल, रिया परमार ने कजरी, भारती पलसोदकर ने बचपन, क्षितिज महोबिया ने दादाजी, आकाश वरठी ने पापी पेट और जयप्रकाश साहू ने कविता गाय पर सुंदर प्रस्तुति दी। इस बीच अनुष्का टेंबे, प्रार्थना दंडवते और नन्हीं सी मानवी साहू ने सधे हुए रवींद्र नृत्य से कार्यक्रम को और ऊंचाई दी। इस मौके पर वरिष्ठ लोक कलाकार नरेंद्र यादव को लोकरंग पुरोधा सम्मान से नवाजा गया। वहीं वरिष्ठ कवयित्री डॉ.सीमा श्रीवास्तव को निरंतर साहित्य साधना हेतु, बजरंगी भाई के नाम से प्रसिद्ध गौ सेवक लितेश साहू को गौ सेवा के लिए और 25 वर्षो से निर्धन विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा दे, प्रदेश का भविष्य को संवारने वाले एम. राजीव को शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान हेतु सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वाले नरेंद्र यादव ने इस अवसर पर अपने लोक रंग के सफर में महाराष्ट्र मंडल की यादों को सांझा किया और कहा कि इतनी पुरानी संस्था आज भी कला की सेवा के लिए समर्पित है, यह अपने आप में बड़ी बात है। इस मौके पर महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने लोकरंग की 10वर्षों की रंगभूमि की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि हर समय रंजन मोड़क की इस संस्था के साथ महाराष्ट्र मंडल खड़ा था और आगे भी इसी तरह साथ निभाएगा। कार्यक्रम का संचालन अक्षदा मातुरकर ने किया।