दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्‍ट्र मंडल ने किशोरों को जोड़ने की शुरू की मुहिम: दंडवते

- बाहर रहने वाले रायपुर निवासी युवाओं को भी जोड़ा जा रहा मंडल से

 
रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल न केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को समाज और समाजसेवा से जोड़ने की मुहिम कई वर्षों से जारी रखे हुए हैं, बल्कि अब 15 से 18 वर्ष के किशोर वय वालों को भी जोड़ने का अभियान शुरू कर चुका है। इसका उद्देश्‍य बस यही है कि कच्‍ची उम्र के किशोरों को न केवल अच्‍छे संस्‍कार देना है, बल्कि सकारात्‍मक तरीके से समाज और समाजसेवा से जोड़ना भी है। मंडल के ऐसे आजीवन सभासद, जिनके बच्‍चे 15 ये 18 साल के हैं, वे भी मंडल में अपने बच्‍चों को सभासद बनाने की मानसिकता बनाने लगे हैं। यह जानकारी महाराष्ट्र मंडल में 14 वर्षों से बतौर सचिव कार्यरत चेतन गोविंद दंडवते ने साझा की। 
 
दंडवते कहते हैं कि जिस उम्र में बच्‍चों के वैचारिक व मानसिक रूप से भटकने की आशंका हो सकती है, उसी उम्र में उन्‍हें महाराष्‍ट्र मंडल शिक्षा, संस्‍कार और खेलकूद से जोड़कर बड़ी संख्‍या में लोगों से उन्‍हें मिलने- जुलने का अवसर प्रदान कर रहा है। मंडल से जुड़ने पर इन बच्‍चों को शिक्षा, रोजगार, खेल, कॅरियर सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में मार्गदर्शन देने के लिए अनुभवी काउंसलर आसानी से मिल जाएंगे। अपने हम उम्र दोस्‍तों के बीच उठने- बैठने और अपनी दोस्‍ती का दायरा बढ़ाने का मौका भी मिलेगा।   
 
चेतन दंडवते ने कहा कि इसके अलावा हमारे ऐसे आजीवन सभासद और सभासदों के बच्‍चे जो रायपुर से बाहर, खासकर पुणे, मुंबई, हैदराबाद, बंगलुरु, नई दिल्‍ली, नोयडा में रहते हैं, उनके नाम, पते और मोबाइल नंबर जुटाए जा रहे हैं। ताकि समय- समय पर न केवल उन्‍हें महाराष्‍ट्र मंडल के कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी जा सके, बल्कि विपरीत समय में उनकी मदद की जा सके। अथवा मुसीबत में फंसे अपने ही किसी सभासद या उनकी संतान के लिए उनसे मदद ली जा सके।   
 
दंडवते के अनुसार करीब दो साल पहले हमारे एक सभासद को बेंगलुरु में आपातकालीन परिस्थितियों में खून की जरूरत थी। वहां उनका कोई जान पहचान का नहीं होन पर उन्होंने रायपुर में महाराष्‍ट्र मंडल के पदाधिकारियों से मदद मांगी। यहां अध्‍यक्ष व कार्यकारिणी सदस्‍य तुरंत सक्रिय हो गए। मंडल की कार्यकारिणी सदस्‍य आस्‍था काले के बंगलुरु में नौकरी कर रहे चिरंजीव अनमोल अभय काले को सूचना भेजी गई। अनमोल ने तुरंत अपना रक्‍त दान कर जरूरतमंद सभासद को मुसीबत से बाहर निकाला।
 
सचिव दंडवते के अनुसार 91 वर्षीय महाराष्‍ट्र मंडल का भविष्‍य यदि अगले 50 साल तक सुरक्षित है, तो सिर्फ यहां युवाओं के लगातार मंडल से जुड़ने के कारण है। यही वजह है कि हमारी कार्यकारिणी भी युवाओं के विचार का सम्‍मान करते हुए उनके प्रभार, नेतृत्‍व में बहुत से कार्यक्रम आयोजित करती है। इसके बाद भी मंडल शांत नहीं बैठा है, बल्कि अभी भी अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने की मुहिम में लगा हुआ है।