दिव्य महाराष्ट्र मंडल

डॉ. कर ने गाया- जिंदगी में सुर नहीं है, इसलिए किसी का भय नहीं है...’

0- गिरीश पंकज व डॉ. विश्‍वकर्मा की गज़लों से महाराष्ट्र मंडल में सजी महफिल, चित्‍तरंजन कर की रुहानी आवाज ने बिखेरा जादू

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में गज़लों की सुमधुर महफिल सजीं। तबले की सुरमय थाप और हारमोनियम की लाजवाब संगत के बीच वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार व गायक डॉ. चितरंजन कर ने अपनी रुहानी आवाज में गज़ल की प्रस्तुति दी। झूमते श्रोताओं की तालियों ने गज़ल संध्‍या को और भी जीवंत बना दिया। डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ और गिरीश पंकज की ओर से लिखी गई गज़लों को इतने सुरबद्ध अंदाज में जिसने सुना, कि बस वह अपनी सीट पर बैठा ही रह गया। 
 
 
डॉ. विश्वकर्मा की लिखी गज़ल ‘जिंदगी में सुर नहीं है, लय नहीं है, इसलिए मन में किसी का भय नहीं है….’ में श्रोता खो से गए। ‘बेख़ुदी में लोग पीते हैं, मचलने के लिए कौन पीता है’ में लोगों ने अपने आपको गज़ल के किरदार के रूप में देखा। नवरंग की गज़लों ‘ज़माने में संभलने के लिए…’ ‘धीरे धीरे चाँद गगन में ढलता है, चुपके- चुपके कोई दिल में पलता है…’ ने दर्शकों को लगभग डेढ़ घंटे तक बांधे रखा। इन गज़लों को सुनते- सुनते दर्शकों ने कई बार तालियां बजाईं, दाद दीं। वहीं साहित्यकार गिरीश पंकज की लिखी गज़लों ‘ज़िंदा हैं इसलिए लिखना ज़रूरी है....’, ‘बार बार टूटे हैं सपने…’ ‘पिता हमारे सपनों में अकसर आ जाते हैं...’ की प्रस्तुतियों से श्रोता बस मंत्रमुग्‍ध रहे। 
 
 
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि डॉ. चितरंजन कर, गिरीश पंकज, डॉ. माणिक विश्वकर्मा, महेंद्र चौहान, महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, वरिष्ठ सभासद और रंगसाधक शशि वरवंडकर ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। अपने उद्बोधन में डॉ. माणिक विश्वकर्मा ने अपनी गज़ल ‘जिसमें ढालोगे, मैं उसमें ढल जाऊँगा, नेह दोगे, मुझे मैं पिघल जाऊँगा...’ का वाचन किया। गिरीश पंकज ने अपने संबोधन में महाराष्‍ट्र मंडल से अपने 45 साल पुराने संबंधों को स्‍मरण किया। उन्‍होंने ‘आपकी शुभकामनाएं मेरे साथ हैं...’ पढ़क श्रोताओं से आत्‍मीयता रिश्‍ता जोड़ा। 
गजल संध्‍या के प्रस्‍तुतकर्ता शशि वरवंडकर व मंडल अध्‍यक्ष अजय काले ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का आयोजन महाराष्ट्र मंडल की साहित्यिक समिति और श्री ग्रुप आफ कंपनीज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
 
 
वरिष्ठ पत्रकार और आकाशवाणी के उद्घोषक शशांक खरे ने रोचक और शायराना अंदाज में मंच का संचालन कर श्रोताओं को प्रभावित किया। आभार प्रदर्शन मंडल के साहित्य समिति की समन्वयक कुमुद लाड ने किया। कार्यक्रम में अनेक साहित्‍यकार, रंगसाधक सहित महाराष्‍ट्र मंडल के सभासद बड़ी संख्‍या में उपस्थित रहे।