जेएनयू दिल्ली में रायपुर की जाधव दंपती ने पढ़ा शिवाजी पर अपना शोध पत्र
रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नईदिल्ली के राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर महाराष्ट्र मंडल, रायपुर के इतिहास शोधकर्ता गणेशा जाधव पाटिल एवं श्रीमती मंगल गणेशा जाधव पाटिल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राष्ट्रनिर्माण, सुशासन, सामरिक चिंतन एवं ऐतिहासिक विरासत पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर महाराष्ट्र मंडल, रायपुर का गौरव राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, कृतित्व, राष्ट्रनिर्माण दृष्टि तथा प्रशासनिक एवं सामरिक चिंतन पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जेएनयू के प्रतिष्ठित विद्वत् मंच पर जाधव दंपती की शोधपरक सहभागिता विशेष आकर्षण रही। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने इस उपलब्धि पर जाधव दंपती को इस सफलता के लिए शुभकामनाएं दी है। बतादें कि कार्यक्रम का आयोजन सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, महाराष्ट्र शासन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली तथा श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक समिति, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
गणेशा जाधव पाटिल ने “इक्कीसवीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रासंगिकता” तथा मंगल गणेशा जाधव पाटिल ने “छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक : नवयुग का आरंभ” विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। दोनों शोध-पत्रों में स्वराज्य, सुशासन, सामरिक दूरदर्शिता, सांस्कृतिक चेतना, राज्यनिर्माण तथा आधुनिक भारत में शिवाजी महाराज की प्रासंगिकता का शोधपरक विश्लेषण किया गया। महाराष्ट्र मंडल, रायपुर से जुड़े जाधव दंपती द्वारा एक ही राष्ट्रीय मंच पर दो स्वतंत्र विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया जाना इस सहभागिता की विशिष्ट उपलब्धि रही।
2 एवं 3 सितंबर 2026 को जेएनयू में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के इतिहासकारों, विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस राष्ट्रीय मंच पर महाराष्ट्र मंडल, रायपुर की ओर से जाधव दंपती सहित अंशुमन गनोडवाले, सुमिता रायजादा एवं कुमारी अदिति रायजादा ने सहभागिता की। कार्यक्रम में तंजावुर संस्थान के महाराजा बाबाजी राजे भोसले, जेएनयू की कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक समिति के अध्यक्ष रघुजी राजे आंग्रे, सचिव श्री सुधीर थोरात तथा राष्ट्रीय विचारक मुकुल कानिटकर सहित अनेक विद्वान एवं गणमान्य उपस्थित रहे।
आयोजकों द्वारा विद्वत् परिषद के पश्चात प्रतिभागियों के लिए ऐतिहासिक अध्ययन यात्राओं का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत 4 सितंबर को पानीपत के ऐतिहासिक “काला आम” का अध्ययन-दौरा किया गया, जहां प्रतिभागियों ने मराठा शौर्य, संघर्ष एवं बलिदान के इतिहास को निकट से समझा। इसके पश्चात 5 सितंबर को छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय, नई दिल्ली का अध्ययन-दौरा किया गया, जहां शिवाजी महाराज के जीवन, सैन्य परंपरा एवं ऐतिहासिक विरासत से संबंधित सामग्री का अवलोकन किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर जाधव दंपती सहित प्रतिभागियों को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की ओर से प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध-विषयों के संक्षिप्त एवं सारगर्भित सारांशों का सारांश-संग्रह पुस्तिका के रूप में प्रकाशन किया गया, जिसमें गणेशा जाधव पाटिल एवं मंगल गणेशा जाधव पाटिल के शोध-पत्र भी सम्मिलित किए गए।
यह उपलब्धि जाधव दंपती के शोध-कार्य के साथ-साथ महाराष्ट्र मंडल, रायपुर की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक सक्रियता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। JNU जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर उनकी सहभागिता से रायपुर की शोधपरंपरा और महाराष्ट्र मंडल की राष्ट्रीय उपस्थिति को नई पहचान मिली है।
जाधव दंपती ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज केवल इतिहास के महानायक नहीं, बल्कि सुशासन, सामरिक आत्मनिर्भरता, सांस्कृति क स्वाभिमान और राष्ट्रनिर्माण की आज भी जीवंत प्रेरणा हैं।”»