फिजियोथेरेपी में धैर्य और निमयित अभ्यास देता है राहत डा. डीके नेताम
रायपुर। अक्सर लोग दो-चार दिन फिजियो कराने के बाद सोचते है कि फिजियोथेरेपी का असर नहीं दिख रहा है। और कई लोग बंद कर देते है। फिजियोथेरेपी एक ऐसा ट्रीटमेंट हैं, जिसमें आराम मिलने में थोड़ा समय लगता है। शुरुआत में थोड़ी परेशानी और थकान महसूस होती है, लेकिन धैर्य और नियमित अभ्यास निश्चित तौर पर आराम देता है, और इसके परिणाम भी अद्भुत होते है। उक्त विचार फिजियोथेरेपिस्ट डा. डीके नेताम ने मंडल में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए।
डा. नेताम ने कहा कि फिजियोथेरेपी जिसे भौतिक चिकित्सा भी कहा जाता है। यह एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें बिना सर्जरी या दवाइयों के, विशेष व्यायाम, शारीरिक गतिविधियों और विभिन्न उपकरणों की मदद से शरीर के दर्द को कम किया और अंगों की कार्यक्षमता को सुधारा जाता है। आज हमें यह समझने की जरूरत है कि स्वस्थ्य जीवन के लिए लिए यह कितनी अहम भूमिका निभाता है।
आमतौर पर हमें कोई बीमारी होती है या चोट लगती है तो हम तुरंत दवाईयों और सर्जरियों का सहारा लेते है। लेकिन फिजियोथेरेपी एक ऐसी चिकित्सा पद्धाति है जिसमें बिना किसी भारी भरकम दवाईयों के केवल सही व्यायाम मैनुअल थेरेपी और विशेष तकनीकों से इसे ठीक किया जा सकता है। यह हमारे शरीर को गतिशीलता प्रदान करता है और ताकत लाने में मदद करता है। कमर दर्द, गर्दन में दर्द, घुटनों का दर्द या जोड़ो की जकड़न को दूर करने में फिजियोथेरेपी असरदार है।