दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महाराष्ट्र मंडल में सजीं सुरों, नृत्य और हास्य की अविस्मरणीय संध्या

- गणेशोत्सव 2026 के दौरान भिलाई के अलंकार समूह ने दी शानदार प्रस्तुति

रायपुर। महराष्ट्र मंडल में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में 19 सितंबर को आयोजित प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। महाराष्ट्र मंडल के मंच पर प्रस्तुत यह सांस्कृतिक कार्यक्रम सुमधुर गायन, भावपूर्ण प्रस्तुति, नृत्य और हास्य से सजी एक सुंदर सांस्कृतिक मेजवानी साबित हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत अजय लोंढे द्वारा प्रस्तुत भावस्पर्शी गीत ‘सूर निरागस हो’ से हुई। इसके बाद श्रीकांत देव ने ‘गारवा’, स्नेहा जोशी ने ‘रूपेरी वाळूत’ और अजय लोंढे ने ‘मन उधाण वाऱ्याचे’ प्रस्तुत कर वातावरण को सुरमयी बना दिया। पूजा नालमवार के ‘अधीर मन झाले’, आशीष करमरकर के ‘राधा ही बावरी’ और स्नेहा जोशी के ‘अप्सरा आली’ ने दर्शकों की विशेष वाहवाही बटोरीं।

इसके बाद दिलीप पाठक ने ‘गुलाबी साडी’ और साईनाथ रमेश अय्यर ने ‘याड लागलंय’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में और रंग भर दिया। आशीष करमरकर और रेवती जोशी की ‘गोमू संगतीने’, श्रीकांत देव एवं स्नेहा जोशी की ‘जीव रंगला दंगला’, तथा दिलीप पाठक और पूजा नालमवार की ‘मी डोलकर’ प्रस्तुतियों ने भी रसिकों के मन पर विशेष छाप छोड़ी। अजय लोंढे एवं रेवती जोशी का ‘बहरला हा मधुमास’, साईनाथ रमेश एवं स्नेहा जोशी का ‘प्रियकरा’ और अंत में स्नेहा जोशी, पूजा नालमवार एवं रेवती जोशी द्वारा प्रस्तुत ‘दिसला ग बाई दिसला’ ने कार्यक्रम का समापन उत्साह और उमंग से भरपूर वातावरण में किया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत दो हास्य नाटिकाओं ने इस संगीतमय मैफल में एक अलग ही रंग भर दिया। रेवती जोशी और स्मिता फडे द्वारा प्रस्तुत सास-बहू के रिश्ते पर आधारित हास्य प्रसंग ने दर्शकों को खूब हंसाया और गुदगुदाया। वहीं दूसरी हास्य नाटिका के माध्यम से हास्य के साथ सामाजिक जागरूकता का सुंदर संदेश दिया गया। मनोरंजन के साथ समाजोपयोगी संदेश देने का यह प्रयास विशेष रूप से सराहनीय रहा। सभी कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों में स्वर की मधुरता, अभिनय की सहजता, नृत्य की स्फूर्ति और मंच पर आत्मविश्वास का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।

इस संपूर्ण कार्यक्रम का निर्देशन श्री हर्षवर्धन वझे ने किया। विभिन्न कलाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए तथा प्रत्येक कलाकार को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर देते हुए उन्होंने कार्यक्रम को एक सुंदर और प्रभावशाली रूप प्रदान किया। संगीत, नृत्य, अभिनय, हास्य और सामाजिक संदेश का यह सुंदर संगम महाराष्ट्र मंडल के रसिक दर्शकों के लिए निश्चित रूप से एक आनंददायी, यादगार और अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव रहा