दिव्य महाराष्ट्र मंडल

महिलाओं ने जाना 'गणपति बप्पा मोरया' कहने का धार्मिक कारण

- अवंती विहार महिला केंद्र ने मनाया कोजागिरी उत्सव

रायपुर। प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की पूजे के बाद आमतौर पर हम 'गणपति बप्पा मोरया' कहते है। इसके पीछे का मुख्य धार्मिक कारण भगवान गणेश और उनके अनन्य भक्त संत मोरया गोसावी के बीच की अटूट भक्ति और एक वरदान है। कहा जाता है कि 14वीं से 16वीं शताब्दी के दौरान महाराष्ट्र के पुणे के पास चिंचवड़ में संत मोरया गोसावी हुए, जो भगवान गणेश के परम भक्त थे। ऐसा माना जाता है कि संत मोरया गोसावी की कठोर तपस्या और सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उन्हें वरदान दिया था कि भक्तगण जब भी गणेश जी को पुकारेंगे, तो उनके नाम के साथ में 'मोरया' का नाम भी लिया जाएगा।  'गणपति' का अर्थ भगवान गणेश, 'बप्पा' का अर्थ पिता या सबसे प्रिय रूप, और 'मोरया' उनके प्रिय भक्त का प्रतीक है। यह जयकारा केवल भगवान का स्मरण नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के पवित्र रिश्ते को दर्शाता है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के अवंती विहार महिला केंद्र के कोजागिरी उत्सव के दौरान केंद्र की सदस्या सुमिता भंडारी ने कहें।

अवंती विहार महिला केंद्र का कोजागिरी उत्सव प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक प्रस्तुति के साथ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और उत्सव में आई महिलाओं को वाण देकर किया गया। वाण में हल्दी-कुंकू, शगुन की सामग्री, गजरा और कुंमकुम की डिबिया शामिल थीं। उत्सव का आयोजन अवंती विहार केंद्र के पौराणिक ग्रुप द्वारा किया गया। जिसमें महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।

केंद्र की सदस्या और पौराणिक ग्रुप की मुखिया सुश्री सुमिता भंडारी ने गणपति बप्पा मोरया कहने के धार्मिक कारणों पर प्रकाश डाला। वहीं वेद, उपनिषद, पुराण कितने हैं, देवी का नाम क्या है? इसके साथ ही दशावतार का वर्णन, 'देवी का अवतार, महिषासुर मर्दिनी गोंधल, कलियुग के देवताओं के बीच युद्ध को नृत्य के माध्यम से दिखाया गया। भक्ति, मुक्ति और ज्ञान का त्रिवेणी संगम देखकर सभी अभिभूत हो गए।

 

इस अवसर पर 'फुगा फोड़ने' का खेल खेला गया। जिसमें सुदेशना मेने प्रथम, पूजा भंडारी, शुभदा चौधरी और छाया भालकर दूसरे स्थान पर रहीं। एक अन्य खेल में सुदेशना मेने प्रथम पहले, भारती, निशा और नीना दूसरे स्थान पर रहीं। पौराणिक ग्रुप ने उम्मीद के मुताबिक खूबसूरत सजावट की थी। सभी अपने पारंपरिक कपड़ों में सुंदर लग रहे थे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ कोजागिरी के पवित्र दूध का स्वाद लिया।