दिव्य महाराष्ट्र मंडल

‘सामाजिक विकृति के लिए अभिभावक जिम्मेदार’ पक्ष-विपक्ष दोनों ने दृढ़ता से रखे विचार

- मराठी सोहळा में हुआ महाविद्यालयीन स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन

रायपुर। मराठी सोहळा के तीसरे और अंतिम दिन महाविद्यालय स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विषय था ‘सामाजिक विकृति के लिए अभिभावक जिम्मेदार’। निर्धारित विषय पर पक्ष और विपक्ष दोनों ने पूरी दृढ़ता के साथ अपने-अपने विचार रखें। सामाजिक कुरीति के लिए अभिभावक को जिम्मेदार मनाते हुए पक्ष में अपने विचार रखते हुए स्पर्धा में मैका कालेज की हर्षिता परिदा ने प्रथम स्थान और धवल शाह ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं विपक्ष से प्रिंस केशरवानी ने प्रथम और गौरी ठाकुर द्वितीय स्थान पर रही। स्पर्धा का आयोजन महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति और साहित्य समिति के सहयोग से किया गया।

पक्ष में अपने विचार रखते हुए प्रतिभागी अंकित कुमार राठौर ने कहा कि आज अभिभावकों का लाड प्यार और डिजीटल लापरवाही बच्चों को सामाजिक कुरीति की ओर ले जा रही है। अगर पैरेट्स बच्चों को समय से पहले मोबाइल न दें तो बच्चे की लत लगेगी ही नहीं। अभिभावकों द्वारा अनुशासन न सीखाना ही उनकी गलती है। वहीं विपक्ष में अपने विचार ऱखते हुए उमेश कुमार मेश्राम ने कहा कि एक ही घर में अच्छे और बुरे दोनों लोग मिलते है, दो भाई में अलग-अलग संस्कार परिलक्षित होते है तो क्या आप यह कहेंगे कि दोनों को अलग-अलग संस्कार दिए गए। यह तो हमारे ऊपर डिपेंड करता है कि हम उन संस्कार को कैसे ग्रहण करते है।

विपक्ष में अपने विचार रखते हुए एनआईटी रायपुर के प्रिंस केशरवानी ने कहा कि आज का बच्चा बाहरी चीजों, सोशल मीडिया से अपना खुद का इनवायरमेंट चुन रहा है, ऐसे में अभिभावकों को दोष नहीं दिया जा सकता है। बेशक बच्चों के प्रारंभिक गुरु मां-बाप होते है, लेकिन क्या बड़ा होने के साथ वह सीखना बंद कर देता है। जब वह सीख रहा है तो अभिभावकों को कैसे दोष दिया जा सकता है।

एनआईटी के छात्र धवल शाह ने पक्ष में अपने विचार रखते हुए सामाजिक कुरीतियों के लिए अभिभावकों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आखिर अभिभावक बच्चों से सिर्फ अपने हित ही उम्मीद क्यों रखते है। बच्चा अच्छा नंबर लाया तो ठीक नहीं तो उसे सिर्फ डांट ही क्यों मिलती है। अभिभावकों के इसी व्यवहार के कारण बच्चे सामाजिक कुरीतियों की ओर बढ़े चले जाते है। इस अवसर पर गौऱी ठाकुर प्रशात साहू, जसगुन गौर और वीणा यादव ने भी अपने विचार ऱखे।

कार्यक्रम में निर्णायक की भूमिका लेखिक डा. सुनीता पाठक और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के प्राध्यापिका डा. अदिती देशमुख ने अदा की। कार्यक्रम में मंडल के साहित्य समिति की समन्वयक कुमुद लाड, प्रमुख अभय भागवतकर, युवा समिति की समन्वयक डा. शुचिता देशमुख, पुरुष प्रमुख शुभम पुराणिक, महिला प्रमुख श्रावणी मुकादम, छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति के समन्वयक अभिषेक बक्षी, पर्यावरण समिति के प्रमुख पराग दलाल सहित युवा समिति के सदस्य उपस्थित थे।