दिव्य महाराष्ट्र मंडल

आसान नहीं योगासान, श्वांस लेने—छोड़ने का भी रखना होता है ध्यान... महाराष्ट्र मंडल के बाल योग शिविर समापन पर... एक्सपर्ट की टिप्स

रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर के समता कॉलोनी स्थित दिव्यांग बालिका गृह में विगत सप्ताहभर से जारी बाल योग शिविर का बुधवार को समापन हो गया है। इस समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रशांत ढेकने, जो महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सदस्य होने के साथ ही एनआईटी के रजिस्ट्रार भी हैं, ने शिरकत की। वहीं योग एक्सपर्ट के तौर पर सन्मुख राव शामिल हुए। इन अतिथियों का सूत माला और शॉल श्रीफल से सम्मान किया गया। 

बीते सप्ताहभर से प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे से 7:30 बजे तक महाराष्ट्र मंडल की योग समिति प्रभारी आस्था काले इन बच्चों को प्रारंभिक योग से लेकर बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के आवश्यक योग का प्रशि​क्षण दे रही थीं। शिविर में शामिल होने वाले बच्चों ने भी इस बात को महसूस किया कि महज सप्ताहभर के भीतर उनके भीतर काफी परिवर्तन आए हैं और यह सब नियमित योगाभ्यास की वजह से ही संभव हो पाया है। 
 
 

बुधवार को समापन अवसर पर योग एक्सपर्ट के तौर पर शामिल हुए सन्मुख राव ने मौजूद सभी बच्चों को बताया कि योग के अपने नियम हैं। आसनों को जान लेना, अभ्यस्त होना और नियमित दिनचर्या में शामिल करना, बहुत अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि इससे आपका जीवन बेहतर रहेगा, लेकिन योगासन इतना भी आसाना नहीं, जितना समझा जाता है। उन्होंने बताया कि योगासन में श्वांस लेना और छोड़ना, इसकी सही जानकारी होनी चाहिए। तभी योग के आसनों का सही लाभ मिल पाता है। इसके अलावा भी उन्होंने योग से जुड़ी कई अन्य जरूरी बातों से भी बच्चों को अवगत कराया।
 
 

इसके बाद समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रशांत ढेकने ने योग शिविर में शामिल सभी बच्चों को प्रशस्ति पत्र भेंटकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
 
आवासीय संस्कार शिविर 7 जून से 

इस मौके पर महाराष्ट्र मंडल के सचेतक रविन्द्र ठेंगड़ी ने योग शिविर में शामिल बच्चों के उत्साह को देखते हुए आगामी 7 जून से 14 जून तक के लिए आवासीय संस्कार शिविर की घोषणा कर दी है। यह कैंप महाराष्ट्र मंडल के इसी दिव्यांग बालिका गृह में आयोजित किया जाएगा, जिसमें बच्चों को दैनिक जीवन में किन बातों को शामिल करना है, अपने जीवन को किस तरह से बेहतर किया जा सकता है, तनाव और अभाव में भी खुद को कैसे इन परेशानियों से मुक्त रखा जा सकता है, जैसी आवश्यक बातों की जानकारी दी जाएगी। 

सचेतक ठेंगड़ी ने बताया कि इस आवासीय कैंप में बच्चों के रहने, खाने, घुमने, खेलने से लेकर प्रत्येक बातों का ख्याल रखा जाएगा और उन बच्चों को आत्मनिर्भर बनने की सीख दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 6 साल से 14 साल तक के बच्चे उस कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, जिसे जैसा चाहे आकार दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज इन बच्चों को अच्छे संस्कार दे दिए जाएं, तो वह उनके जीवनभर की पूंजी बन जाएगी और वे सफलतापूर्वक अपने जीवन का निर्वाह कर पाने में सक्षम होंगे।