जन्म से मृत्यु तक कौन....। इसी सोच ने महाराष्ट्र मंडळ को पहुंचाया जन-जन तक
रायपुर। जन्म से लेकर मृत्यु तक कौन किसके साथ रहता है। एक आदमी का जन्म हुआ तो माता- पिता साथ होते है, मृत्यु के समय वो साथ नहीं होते। क्योंकि वे आप से पहले चले जाते है। आपके साथ आपके बच्चे होते है। यह जीवन का यथार्थ सत्य है। जन्म से मृत्यु तक कौन इस प्रश्न ने महाराष्ट्र मंडळ को जन-जन तक पहुंचाया। महाराष्ट्र मंडळ एक व्यक्ति विशेष नहीं एक ऐसी संस्था है जो कोई रहे या न रहे यह जरूर रहेगा। मंडळ अपने सदस्यों को जन्मदिन की बधाई से लेकर शोक संवेदना, दुख वाले घर में 25 लोगों को भोजन भेजता है। इतर इसके बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, विवार, मोटिवेशन न जाने क्या क्या सबकुछ सबके लिए करता है। यह सोच हैं मंडळ के उन वयोवृद्ध बुजुर्गों की जिन्होंने इसकी नींव रखीं।
महाराष्ट्र मंडळ के वर्तमान अध्यक्ष अजय काळे ने बताया कि मंडळ के सदस्य बनने के लिए 18 वर्ष से ऊपर की आयुसीमा, मराठी भाषा का ज्ञान और 1510 रुपये आजीवन सदस्यता शुल्क निर्धारित है। इसके लिए जाति और धर्म का कोई बंधन नहीं है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र मंडल अपने सदस्यों को जन्मदिन पर वाट्सएप और फेसबुक पर बधाई संदेश देता है। इसके साथ राजधानी निवासी सदस्यों के घर मंडळ के ग्रीटिंग कार्ड भी उसी दिन भेजा जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि सदस्य परिवार को मण्डल के समस्त कार्यक्रम में आमंत्रण वाट्सएप के माध्यम से दिया जाता है। मण्डल में महिला समिति, पर्यावरण, स्पोर्ट्स, साहित्य युवा, कला, संस्कृति, नाटय, वैधानिक परामर्श, वरिष्ठ सदस्य सेवा, स्वास्थ्य, कैरियर, व्यवसाय साहित्यक, समिति में निरन्तर होने वाले कार्यक्रमों की सूचना मिलती रहती है। इसके अलावा सदस्य को 70 वर्ष तक न्यू इंडिया इन्सुरेंस कम्पनी द्वारा एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी दिया जाता है। मराठी परिवार में दुःखद घटना होने पर उस दिन 25 व्यक्तियों के भोजन व्यवस्था मंडळ की ओर से की जाती है।
मंडळ के सचिव चेतन दंडवते ने बताया कि मंडळ के सदस्य सामाजिक कार्यों में अपना योगदान दे सकते है। जैसे अपने आसपास के बच्चों को मंडळ द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में नर्सरी से 12वीं तक कक्षा में प्रवेश के लिए प्रेरित कर सकते है। आसपास के परिचितों को आपात परिस्थितियों में व्हील चेयर वाकर हॉस्पिटल बेड अन्य मेडिकल सामग्री उपलब्ध करा सकते है। आवश्यकता पड़ने पर रक्तदान या अन्य कोई भी सहयोग मंडळ के द्वारा करवा सकते है। छोटे बड़े कार्यक्रमो के आयोजन के लिए मण्डल भवन के विषय में जानकारी देकर बुकिंग के लिए प्रोत्साहित कर सकते है।
इसके अलावा मेस के माध्यम से नाश्ता, भोजन, दिवाली फराल मंडळ के दिव्यांग गृह के सहायतार्थ स्वयं के साथ-साथ अन्य परिचितों के ऑर्डर दिलवा कर सहयोग कर सकते है। क्योंकि डेली सुविधा मण्डल में जारी है। अपने आसपास परिचितों के यहां कोई विशेष उपलब्धि जानकारी मंडल को देकर अन्य लोगों के प्रेरणा का कार्य कर सकते है। कामकाजी महिला /स्टूडेंट्स होस्टल में आवश्यकता पड़ने पर परिचितों को प्रवेश दिलवा सकते है। मण्डल की विभिन्न समितियो के कार्यो में स्वरूचि अनुसार कार्य कर सकते है।
मंडळ के सदस्य इन कार्यों के अलावा अपने प्रियजनों के स्मृति में प्रावीण्य या अन्य क्षेत्र में पुरस्कार या अन्य जिसमें रुचि हो राशि प्रायोजित कर सन्मान राशि दे सकते है। कार्यक्रमों को प्रायोजित कर या भवन में, दिव्यांग गृह को या निर्धन विद्यार्थियों को या परिवार को सहयोग कर आयकर अधिनियम की 80जी के अंतर्गत 50% छूट प्राप्त कर सकते है। यदि आप किसी विधा में पारंगत है तो उसे अन्य को सीखा सकते है जैसे अंग्रेजी, मराठी, गणित या अन्य क्षेत्र एंकरिंग, व्यवसाय, गायन मार्गदर्शन, कॉउंसलिंग, लीडरशिप आदि क्योंकि सिखाया जाएगा तभी वो आपके बाद भी आपके नाम को स्मरण रखेगा।